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धर्म: चंद्रग्रहण की खबर
Updated Fri, 27 Jul 2018 04:16 AM IST
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धर्म: चंद्रग्रहण की खबर
आज शाम को मंदिरों में नहीं होगी भगवान की पूजा
गुरुपूर्णिमा के दिन 3 तीन घंटे 55 मिनट रहेगा चंद्रग्रहण
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। इस वर्ष का सबसे बड़ा पूर्ण चंद्रग्रहण शुक्रवार को गुरुपूृर्णिमा के दिन होगा। चंद्रग्रहण से करीब नौ घंटे पूर्व सूतक लगने के कारण मंदिरों व घरों में भगवान के कपाट दोपहर से ही बंद हो जाएंगे, इसके शुक्रवार को मंदिरों में शाम की पूजा आरती नहीं होगी। गुरुपूर्णिमा पर पड़ना वाला यह चंद्रग्रहण मध्य रात्रि में शुरु होकर 3 घंटे 55 मिनट का होगा।
गुरुपूर्णिमा के दिन शुक्रवार को चंद्रग्रहण मध्य रात्रि 11.54 से शुरु होगा, जो अगले दिन तड़के 3.49 बजे तक रहेगा। इस चंद्रग्रहण का सूतक काल करीब नौ घंटे पहले दोपहर में 2.54 बजे से लगेगा। सूतक लगते ही मंदिरों व घरों में भगवान के पट बंद कर दिए जाएंगे। इसी दिन गुरु पूर्णिमा भी होगी। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि चंद्र ग्रहण के चलते इस समय बारिश होने की संभावना भी है, जिसकी वजह से चंद्रग्रहण का बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा। वहीं, चंद्रग्रहण होने की वजह से गुरुपूर्णिमा पर गुरु की पूजा व अन्य धार्मिक अनुष्ठान दोपहर से पहले यानि सूतक लगने से पहले ही करने होंगे। क्योंकि सूतक लगने के दौरान धार्मिक अनुष्ठान व मंदिरों में पूजा आयोजन नहीं होते हैं। यही वजह है कि आज शुक्रवार को दोपहर में 2.54 बजे सूतक लगने के दौरान सभी मंदिरों व घरों में विराजमान भगवान के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। इस दौरान मूर्तियों को स्पर्श नहीं नहीं किया जाता है।
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इन राशियों पर रहेगा चंद्रग्रहण का असर
इस बार शुक्रवार को पड़ने वाला सबसे बड़ा चंद्रग्रहण उत्तर आषाढ़ श्रवण एवं मकर राशि में लग रहा है। जिसके चलते जिन लोगों का जन्म उत्तराषाढ़-श्रवण नक्षत्र और जन्म राशि मकर या लग्न मकर है, उनके लिए यह चंद्रग्रहण अशुभ माना जा रहा है। वहीं, मेष, सिंह, वृश्चिक व मीन राशि वालों के लिए यह ग्रहण श्रेष्ठ, वृषभ, कर्क, कन्या व धनु राशि वालों के लिए यह चंद्रग्रहण मध्यम फलदायी रहेगा। जबकि, मिथुन, तुला, मकर व कुंभ राशि वालों को भी अशुभ बताया जा रहा है।
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यह रहेगा चंद्रग्रहण का समय व मोक्षकाल
इस बार का चंद्रग्रहण 27 जुलाई की मध्यरात्रि से शुरु होकर 28 जुलाई को तड़के तक रहेगा। यह चंद्रग्रहण 27 जुलाई को रात्रि 11.54 बजे शुरु होगा, जिसका सम्मिलन रात्रि एक बजे और इसका मध्य रात्रि 1.52 बजे होगा। इस चंद्रग्रहण का मोक्षकाल शनिवार को तड़के 3.49 बजे होगा। इस प्रकार यह चंद्रग्रहण तीन घंटे 55 मिनट तक का होगा।
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चंद्रग्रहण के दिन यह रखें सावधानियां
ग्रहणकाल में प्रकृति में कई तरह की अशुद्ध व हानिकारक किरणों का प्रभाव रहता है। इसलिए कई कार्य जिन्हें ग्रहण काल के दौरान नहीं किया जाता है। इसके तहत ग्रहणकाल में अन्न, जल ग्रहण नहीं करना चाहिए। ग्रहणकाल में यात्रा नहीं करना चाहिए। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान करना चाहिए। ग्रहण को खुली आंखों से नहीं देखना चाहिए। ज्योतिषियों के अनुसार ग्रहणकाल के दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए।
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इनका कहना है-
शुक्रवार को चंद्रग्रहण तीन घंटे पचपन मिनट का रहेगा, जिसके नौ घंटे पहले सूतक लग जाएगा। सूतक काल में भोजन और पूजन वर्जित माना जाता है। इसी दिन गुरुपूर्णिमा भी है, जिसके चलते शिष्य गुरुओं की पूजा व प्रसाद ग्रहण सूतक लगने से पहले तक कर सकते हैं। अध्यात्मिक पक्ष की दृष्टि से चंद्रग्रहण काल में जप आदि करना पुण्य माना गया है, जबकि मंत्र आदि सिद्धि भी चंद्रग्रहण के दौरान उत्तम होता है।
डा.ओमप्रकाश शास्त्री।
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आज शाम को मंदिरों में नहीं होगी भगवान की पूजा
गुरुपूर्णिमा के दिन 3 तीन घंटे 55 मिनट रहेगा चंद्रग्रहण
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। इस वर्ष का सबसे बड़ा पूर्ण चंद्रग्रहण शुक्रवार को गुरुपूृर्णिमा के दिन होगा। चंद्रग्रहण से करीब नौ घंटे पूर्व सूतक लगने के कारण मंदिरों व घरों में भगवान के कपाट दोपहर से ही बंद हो जाएंगे, इसके शुक्रवार को मंदिरों में शाम की पूजा आरती नहीं होगी। गुरुपूर्णिमा पर पड़ना वाला यह चंद्रग्रहण मध्य रात्रि में शुरु होकर 3 घंटे 55 मिनट का होगा।
गुरुपूर्णिमा के दिन शुक्रवार को चंद्रग्रहण मध्य रात्रि 11.54 से शुरु होगा, जो अगले दिन तड़के 3.49 बजे तक रहेगा। इस चंद्रग्रहण का सूतक काल करीब नौ घंटे पहले दोपहर में 2.54 बजे से लगेगा। सूतक लगते ही मंदिरों व घरों में भगवान के पट बंद कर दिए जाएंगे। इसी दिन गुरु पूर्णिमा भी होगी। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि चंद्र ग्रहण के चलते इस समय बारिश होने की संभावना भी है, जिसकी वजह से चंद्रग्रहण का बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा। वहीं, चंद्रग्रहण होने की वजह से गुरुपूर्णिमा पर गुरु की पूजा व अन्य धार्मिक अनुष्ठान दोपहर से पहले यानि सूतक लगने से पहले ही करने होंगे। क्योंकि सूतक लगने के दौरान धार्मिक अनुष्ठान व मंदिरों में पूजा आयोजन नहीं होते हैं। यही वजह है कि आज शुक्रवार को दोपहर में 2.54 बजे सूतक लगने के दौरान सभी मंदिरों व घरों में विराजमान भगवान के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। इस दौरान मूर्तियों को स्पर्श नहीं नहीं किया जाता है।
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इन राशियों पर रहेगा चंद्रग्रहण का असर
इस बार शुक्रवार को पड़ने वाला सबसे बड़ा चंद्रग्रहण उत्तर आषाढ़ श्रवण एवं मकर राशि में लग रहा है। जिसके चलते जिन लोगों का जन्म उत्तराषाढ़-श्रवण नक्षत्र और जन्म राशि मकर या लग्न मकर है, उनके लिए यह चंद्रग्रहण अशुभ माना जा रहा है। वहीं, मेष, सिंह, वृश्चिक व मीन राशि वालों के लिए यह ग्रहण श्रेष्ठ, वृषभ, कर्क, कन्या व धनु राशि वालों के लिए यह चंद्रग्रहण मध्यम फलदायी रहेगा। जबकि, मिथुन, तुला, मकर व कुंभ राशि वालों को भी अशुभ बताया जा रहा है।
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यह रहेगा चंद्रग्रहण का समय व मोक्षकाल
इस बार का चंद्रग्रहण 27 जुलाई की मध्यरात्रि से शुरु होकर 28 जुलाई को तड़के तक रहेगा। यह चंद्रग्रहण 27 जुलाई को रात्रि 11.54 बजे शुरु होगा, जिसका सम्मिलन रात्रि एक बजे और इसका मध्य रात्रि 1.52 बजे होगा। इस चंद्रग्रहण का मोक्षकाल शनिवार को तड़के 3.49 बजे होगा। इस प्रकार यह चंद्रग्रहण तीन घंटे 55 मिनट तक का होगा।
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चंद्रग्रहण के दिन यह रखें सावधानियां
ग्रहणकाल में प्रकृति में कई तरह की अशुद्ध व हानिकारक किरणों का प्रभाव रहता है। इसलिए कई कार्य जिन्हें ग्रहण काल के दौरान नहीं किया जाता है। इसके तहत ग्रहणकाल में अन्न, जल ग्रहण नहीं करना चाहिए। ग्रहणकाल में यात्रा नहीं करना चाहिए। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान करना चाहिए। ग्रहण को खुली आंखों से नहीं देखना चाहिए। ज्योतिषियों के अनुसार ग्रहणकाल के दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए।
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इनका कहना है-
शुक्रवार को चंद्रग्रहण तीन घंटे पचपन मिनट का रहेगा, जिसके नौ घंटे पहले सूतक लग जाएगा। सूतक काल में भोजन और पूजन वर्जित माना जाता है। इसी दिन गुरुपूर्णिमा भी है, जिसके चलते शिष्य गुरुओं की पूजा व प्रसाद ग्रहण सूतक लगने से पहले तक कर सकते हैं। अध्यात्मिक पक्ष की दृष्टि से चंद्रग्रहण काल में जप आदि करना पुण्य माना गया है, जबकि मंत्र आदि सिद्धि भी चंद्रग्रहण के दौरान उत्तम होता है।
डा.ओमप्रकाश शास्त्री।