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समस्या: मड़ावरा पेज
Updated Sun, 09 Sep 2018 01:36 AM IST
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बिजली नहीं तो इंटरनेट नहीं, कस्बे में थ्रीजी सेवा ठप
सफेद हाथी साबित हो रहा बीएसएनएल टॉवर
अमर उजाला ब्यूरो
मड़ावरा (ललितपुर)। देश को डिजिटल इंडिया बनाने के लिए भले ही लाख कोशिशें की जा रही हो, लेकिन प्रधानमंत्री महोदय का यह महत्वाकांक्षी सपना मड़ावरा में साकार होता नजर नहीं आ रहा है। तहसील मुख्यालय पर इन दिनों दूरसंचार और इंटरनेट व्यवस्था ध्वस्त पड़ी हुई है, जिससे आम ग्राहकों के साथ-साथ सरकारी कार्यालयों में बगैर इंटरनेट कनेक्टिविटी के कोई संपादित नहीं हो पा रहे हैं। गौरतलब है को कस्बे में तमाम निजी समेत सरकारी दूरसंचार कंपनियों द्वारा थ्रीजी और फोर जी इंटरनेट सेवा दिये जाने के दावे किये जा रहे हों, लेकिन वास्तविकता में वह सिर्फ सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। निजी कंपनियों से ज्यादा हालात तो सरकारी दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल की खराब है। आलम ये है कि कस्बे की बिजली जाते ही बीएसएनएल की इंटरनेट सेवा भी ठप हो जाती है। स्थानीय टेलीफोन एक्सचेंज पर खराब पड़ी बैटरियों को चार्ज करने के लिए तैनात कर्मचारियों द्वारा जनरेटर चलाने में कोताही बरती जाती है। लेकिन जनरेटर चलाये जाने का डीजल समेत अन्य खर्च कागजों में बाकायदा पूरा डाला जा रहा है। गौरतलब है कि तहसील मुख्यालय पर स्थित अधिकतर सरकारी कार्यालयों समेत निजी संस्थानों में इंटरनेट के लिये बीएसएनएल का कनेक्शन समेत मोबाइल धारकों द्वारा 3जी सेवा ली जा रही है लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और कर्मचारियों की कारगुजारी का खामियाजा ग्रामीण उपभोक्ताओं को उठाना पड़ रहा है।
एक्सचेंज पर बैटरी की समस्या बतायी जा रही जिससे हो सकता है नेटवर्क समस्या आ रही हो। जो भी इश्यू है उसे जल्द ही सॉल्व कराया जाएगा।
रमेश सिंह, उपखंड अधिकारी बीएसएनएल, महरौनी
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सफेद हाथी साबित हो रहा बीएसएनएल टॉवर
अमर उजाला ब्यूरो
मड़ावरा (ललितपुर)। देश को डिजिटल इंडिया बनाने के लिए भले ही लाख कोशिशें की जा रही हो, लेकिन प्रधानमंत्री महोदय का यह महत्वाकांक्षी सपना मड़ावरा में साकार होता नजर नहीं आ रहा है। तहसील मुख्यालय पर इन दिनों दूरसंचार और इंटरनेट व्यवस्था ध्वस्त पड़ी हुई है, जिससे आम ग्राहकों के साथ-साथ सरकारी कार्यालयों में बगैर इंटरनेट कनेक्टिविटी के कोई संपादित नहीं हो पा रहे हैं। गौरतलब है को कस्बे में तमाम निजी समेत सरकारी दूरसंचार कंपनियों द्वारा थ्रीजी और फोर जी इंटरनेट सेवा दिये जाने के दावे किये जा रहे हों, लेकिन वास्तविकता में वह सिर्फ सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। निजी कंपनियों से ज्यादा हालात तो सरकारी दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल की खराब है। आलम ये है कि कस्बे की बिजली जाते ही बीएसएनएल की इंटरनेट सेवा भी ठप हो जाती है। स्थानीय टेलीफोन एक्सचेंज पर खराब पड़ी बैटरियों को चार्ज करने के लिए तैनात कर्मचारियों द्वारा जनरेटर चलाने में कोताही बरती जाती है। लेकिन जनरेटर चलाये जाने का डीजल समेत अन्य खर्च कागजों में बाकायदा पूरा डाला जा रहा है। गौरतलब है कि तहसील मुख्यालय पर स्थित अधिकतर सरकारी कार्यालयों समेत निजी संस्थानों में इंटरनेट के लिये बीएसएनएल का कनेक्शन समेत मोबाइल धारकों द्वारा 3जी सेवा ली जा रही है लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और कर्मचारियों की कारगुजारी का खामियाजा ग्रामीण उपभोक्ताओं को उठाना पड़ रहा है।
एक्सचेंज पर बैटरी की समस्या बतायी जा रही जिससे हो सकता है नेटवर्क समस्या आ रही हो। जो भी इश्यू है उसे जल्द ही सॉल्व कराया जाएगा।
रमेश सिंह, उपखंड अधिकारी बीएसएनएल, महरौनी