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संपति एवं विभव कर को पूर्णत: लागू करने की मांग
Updated Sat, 05 May 2018 01:36 AM IST
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संपत्ति एवं विभव कर को पूर्णत: लागू करें
व्यापारियों ने कृषि मंत्री को दिया ज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
जिला पंचायत द्वारा वर्ष 1998 से लागू किए संपत्ति एवं विभव कर को पूर्णत: लागू करने या व्यापारियों से वसूल किए जा रहे कर वापस किए जाने के संबंध में व्यापारियों ने शुक्रवार को कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही को एक ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में बताया गया कि प्रदेश में जिला पंचायतों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से वर्ष 1998 में संपत्ति एवं विभव कर को लागू करने का प्रावधान किया गया था, जिसका गजट सभी जिला पंचायतों द्वारा अलग-अलग कराया गया था। तीन जुलाई 2017 को इस संबंध में एक प्रतिवेदन संगठन द्वारा शासन को दिया था। जिला पंचायत द्वारा 20 हजार रुपया वार्षिक आमदनी के ऊपर तीन प्रतिशत की दर से लेने का प्रावधान किया गया था। अधिनियम में राज्य या केंद्र सरकार के कर्मचारी या सरकारों के किसी उपक्रम के कर्मचारी, सरकारों की किसी संस्था का कर्मचारी या सरकार से मान्यता प्राप्त कर्मचारी या किसी कंपनी या फर्म का कर्मचारी से उपरोक्त कर लिए जाने का प्रावधान किया गया था। उक्त गजट में विभागध्यक्ष या नियोजक को कर्मचारी के वेतन में से तीन प्रतिशत की दर से या छह हजार रुपया वार्षिक अधिकतम वसूल करने के प्रावधान किए गए थे। उपरोक्त कर को मात्र व्यापारियों व ठेकेेदारों से ही वसूल किया जा रहा है, जो न्यायोचित नहीं है। गजट में उल्लिखित सभी लोगों से कर न लिए जाने का कारण जिला पंचायत को प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए की क्षति हो रही है। जिसे जिम्मेदार लोगों, अधिकारियों, कर्मचारियों से वसूल कर उनके विरुद्ध कार्रवाई किए जाना आवश्यक है। 20 हजार वार्षिक आय की सीमा बहुत ही कम है, जिसे बढ़ा कर दो लाख रुपये वार्षिक किया जाना आवश्यक है। व्यापारियों ने कृषि मंत्री से उक्त बिंदुओं पर आवश्यक कार्रवाई कर इसे पूर्णत: लागू कराने या व्यापारियों को इस प्रकार के लगाए गए जजिया श्रेणी के करों से मुक्त कराने की मांग की है। ज्ञापन पर विधायक रामरतन कुशवाहा, सांसद प्रतिनिधि प्रदीप चौबे, जिला उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के जिलाध्यक्ष प्रदीप कुमार त्रिपाठी, प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेंद्र जैन मयूर गल्ला व्यापार संघ अध्यक्ष अशोक अनौरा, महेंद्र सतभैया, संतोष साहू, नितिन अग्रवाल आदि के हस्ताक्षर हैं।
गल्ला मंडी से न हटाएं फुटकर व्यापारी
गल्ला व्यापार मंडल के तत्वावधान में शुक्रवार को कृषि मंत्री को एक ज्ञापन देकर व्यापारियों ने गल्ला मंडी में कार्य कर रहे फुटकर व्यापारियों को न हटाया जाए। ज्ञापन में बताया कि गल्ला मंडी में करीब 25 वर्षों से फुटपाथ पर फड़ लगाकर या छोटे-छोटे खोखे रखकर छोटे किसानों का माल खरीदकर मंडी के आढ़तियों को बेच देते हैं। इससे इन छोटे व्यापारियों के परिवार की आजीविका चल रही है। कुछ व्यवसायियों का चाय पान, हाथ ठेला या खोखे पर बैठकर चाय एवं पान का विक्रय करके रोजी रोटी चला रहे हैं। कई फुटकर गल्ला व्यापारी वर्ष 1985 से मंडी परिसर में लाइसेंस हैं और उनका नवीनीकरण प्रतिवर्ष किया जाता है। अभी हाल में प्रशासन द्वारा मंडी परिसर में रखे खोखो को हटाने का आदेश जारी किया, जिसे परेशानी से मंडी परिसर में कारोबार कर अपनी आजीविका चला रहे करीब एक सैकड़ा परिवार बेरोजगार हो जाएंगे और वे भुखमरी की कगार पर होंगे। उनके समक्ष आजीविका की बहुत बड़ी समस्या आ जाएगी और फुटकर व्यवसायियों के व्यापार करने से स्थापित व्यापारियों को कोई असुविधा नहीं होती है। गल्ला व्यापार मंडल ने कृषि मंत्री से फुटकर व्यापारियों को मंडी से नहीं हटाने की मांग की है।
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व्यापारियों ने कृषि मंत्री को दिया ज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
जिला पंचायत द्वारा वर्ष 1998 से लागू किए संपत्ति एवं विभव कर को पूर्णत: लागू करने या व्यापारियों से वसूल किए जा रहे कर वापस किए जाने के संबंध में व्यापारियों ने शुक्रवार को कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही को एक ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में बताया गया कि प्रदेश में जिला पंचायतों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से वर्ष 1998 में संपत्ति एवं विभव कर को लागू करने का प्रावधान किया गया था, जिसका गजट सभी जिला पंचायतों द्वारा अलग-अलग कराया गया था। तीन जुलाई 2017 को इस संबंध में एक प्रतिवेदन संगठन द्वारा शासन को दिया था। जिला पंचायत द्वारा 20 हजार रुपया वार्षिक आमदनी के ऊपर तीन प्रतिशत की दर से लेने का प्रावधान किया गया था। अधिनियम में राज्य या केंद्र सरकार के कर्मचारी या सरकारों के किसी उपक्रम के कर्मचारी, सरकारों की किसी संस्था का कर्मचारी या सरकार से मान्यता प्राप्त कर्मचारी या किसी कंपनी या फर्म का कर्मचारी से उपरोक्त कर लिए जाने का प्रावधान किया गया था। उक्त गजट में विभागध्यक्ष या नियोजक को कर्मचारी के वेतन में से तीन प्रतिशत की दर से या छह हजार रुपया वार्षिक अधिकतम वसूल करने के प्रावधान किए गए थे। उपरोक्त कर को मात्र व्यापारियों व ठेकेेदारों से ही वसूल किया जा रहा है, जो न्यायोचित नहीं है। गजट में उल्लिखित सभी लोगों से कर न लिए जाने का कारण जिला पंचायत को प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए की क्षति हो रही है। जिसे जिम्मेदार लोगों, अधिकारियों, कर्मचारियों से वसूल कर उनके विरुद्ध कार्रवाई किए जाना आवश्यक है। 20 हजार वार्षिक आय की सीमा बहुत ही कम है, जिसे बढ़ा कर दो लाख रुपये वार्षिक किया जाना आवश्यक है। व्यापारियों ने कृषि मंत्री से उक्त बिंदुओं पर आवश्यक कार्रवाई कर इसे पूर्णत: लागू कराने या व्यापारियों को इस प्रकार के लगाए गए जजिया श्रेणी के करों से मुक्त कराने की मांग की है। ज्ञापन पर विधायक रामरतन कुशवाहा, सांसद प्रतिनिधि प्रदीप चौबे, जिला उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के जिलाध्यक्ष प्रदीप कुमार त्रिपाठी, प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेंद्र जैन मयूर गल्ला व्यापार संघ अध्यक्ष अशोक अनौरा, महेंद्र सतभैया, संतोष साहू, नितिन अग्रवाल आदि के हस्ताक्षर हैं।
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गल्ला मंडी से न हटाएं फुटकर व्यापारी
गल्ला व्यापार मंडल के तत्वावधान में शुक्रवार को कृषि मंत्री को एक ज्ञापन देकर व्यापारियों ने गल्ला मंडी में कार्य कर रहे फुटकर व्यापारियों को न हटाया जाए। ज्ञापन में बताया कि गल्ला मंडी में करीब 25 वर्षों से फुटपाथ पर फड़ लगाकर या छोटे-छोटे खोखे रखकर छोटे किसानों का माल खरीदकर मंडी के आढ़तियों को बेच देते हैं। इससे इन छोटे व्यापारियों के परिवार की आजीविका चल रही है। कुछ व्यवसायियों का चाय पान, हाथ ठेला या खोखे पर बैठकर चाय एवं पान का विक्रय करके रोजी रोटी चला रहे हैं। कई फुटकर गल्ला व्यापारी वर्ष 1985 से मंडी परिसर में लाइसेंस हैं और उनका नवीनीकरण प्रतिवर्ष किया जाता है। अभी हाल में प्रशासन द्वारा मंडी परिसर में रखे खोखो को हटाने का आदेश जारी किया, जिसे परेशानी से मंडी परिसर में कारोबार कर अपनी आजीविका चला रहे करीब एक सैकड़ा परिवार बेरोजगार हो जाएंगे और वे भुखमरी की कगार पर होंगे। उनके समक्ष आजीविका की बहुत बड़ी समस्या आ जाएगी और फुटकर व्यवसायियों के व्यापार करने से स्थापित व्यापारियों को कोई असुविधा नहीं होती है। गल्ला व्यापार मंडल ने कृषि मंत्री से फुटकर व्यापारियों को मंडी से नहीं हटाने की मांग की है।
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