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सोंरई गांव में गहराया पेयजल संकट
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सौंरई गांव में गहराया पेयजल संकट
मदनपुर (ललितपुर)। विकासखंड मड़ावरा के सौंरई गांव में पेयजल समस्या गंभीर रूप धारण करती जा रही है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चार मोहल्लों के बीच एक हैंडपंप है, जिससे लोग पीने का पानी जुटा रहे हैं। इस हैंडपंप पर सुबह से ही पानी भरने वालों की कतार लग जाती है। वहीं, कुछ लोग खुले कुएं से पानी भर रहे हैं।
सौंरई गांव की आबादी लगभग चार हजार है। इसके सापेक्ष पेयजलापूर्ति के साधन काफी कम हैं। कई हैंडपंपों ने इस भीषण गर्मी में या तो पानी निकालना बंद कर दिया है या फिर पानी कम देने लगे हैं। ऐसे में लोग सुबह से शाम तक हैंडपंप पर बाल्टी व कुप्पा लेकर खड़े नजर आते हैं। कुछ लोग तो भीड़ बचने के लिए खुले कुओं पर पानी भरने चले जाते हैं। समस्या इतनी गंभीर है कि लोग सुबह से लेकर शाम तक पानी के लिए जद्दोजहद करते नजर आते हैं। गांव चार मुख्य मुहल्लों साहू मुहल्ला, सोनीपुरा, मिश्रा मुहल्ला और सहरिया बस्ती के बीच सिर्फ एक सार्वजनिक हैंडपंप लगा है। इन चार मुहल्लों की कुल आबादी लगभग डेढ़ हजार के करीब होगी। यहां के लोगों ने कई बार इस समस्या को अफसरों के समक्ष रखा, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका है। गर्मी बढ़ते ही पानी की समस्या सिर चढ़कर बोलने लगी है।
उधर, ग्रामीणों का कहना है कि समस्या बेहद गंभीर बन गई है। हमें बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस ओर प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है, जिससे समस्या से निजात मिल सके। पेयजल समस्या का समाधान करने की मांग करने बालों में सुखलाल साहू, मूलचंद्र साहू, रामगोपाल सोनी, नन्ने सोनी, संतोष बुनकर, मुल्ले सहरिया, उमाशंकर मिश्रा, संदीप मिश्रा, दयाराम मिश्रा, ब्रजेश मिश्रा, प्रीतम साहू, दीपू बुनकर, पंकज साहू आदि शामिल हैं।
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पानी की टंकी बनी शोपीस
लगभग 22 साल पहले गांव में लाखों रुपये के बजट से पानी की टंकी का निर्माण किया गया था, लेकिन अभी तक टंकी से गांव में पानी की सप्लाई नहीं की जा सकी है। अगर पानी की टंकी से गांव में पेयजल की सप्लाई की जाए तो कुछ हद तक ग्रामीणों को पेयजल समस्या से निजात मिल सकती है।
हमें नया बोर कराने का अधिकार नहीं है। जो हैंडपंप खराब पड़े हैं, उन्हें चिह्नित कर जल्द ही रीबोर कराए जाएंगे।
- चंद्रकुमारी राजे, ग्राम प्रधान सौंरई
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मदनपुर (ललितपुर)। विकासखंड मड़ावरा के सौंरई गांव में पेयजल समस्या गंभीर रूप धारण करती जा रही है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चार मोहल्लों के बीच एक हैंडपंप है, जिससे लोग पीने का पानी जुटा रहे हैं। इस हैंडपंप पर सुबह से ही पानी भरने वालों की कतार लग जाती है। वहीं, कुछ लोग खुले कुएं से पानी भर रहे हैं।
सौंरई गांव की आबादी लगभग चार हजार है। इसके सापेक्ष पेयजलापूर्ति के साधन काफी कम हैं। कई हैंडपंपों ने इस भीषण गर्मी में या तो पानी निकालना बंद कर दिया है या फिर पानी कम देने लगे हैं। ऐसे में लोग सुबह से शाम तक हैंडपंप पर बाल्टी व कुप्पा लेकर खड़े नजर आते हैं। कुछ लोग तो भीड़ बचने के लिए खुले कुओं पर पानी भरने चले जाते हैं। समस्या इतनी गंभीर है कि लोग सुबह से लेकर शाम तक पानी के लिए जद्दोजहद करते नजर आते हैं। गांव चार मुख्य मुहल्लों साहू मुहल्ला, सोनीपुरा, मिश्रा मुहल्ला और सहरिया बस्ती के बीच सिर्फ एक सार्वजनिक हैंडपंप लगा है। इन चार मुहल्लों की कुल आबादी लगभग डेढ़ हजार के करीब होगी। यहां के लोगों ने कई बार इस समस्या को अफसरों के समक्ष रखा, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका है। गर्मी बढ़ते ही पानी की समस्या सिर चढ़कर बोलने लगी है।
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उधर, ग्रामीणों का कहना है कि समस्या बेहद गंभीर बन गई है। हमें बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस ओर प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है, जिससे समस्या से निजात मिल सके। पेयजल समस्या का समाधान करने की मांग करने बालों में सुखलाल साहू, मूलचंद्र साहू, रामगोपाल सोनी, नन्ने सोनी, संतोष बुनकर, मुल्ले सहरिया, उमाशंकर मिश्रा, संदीप मिश्रा, दयाराम मिश्रा, ब्रजेश मिश्रा, प्रीतम साहू, दीपू बुनकर, पंकज साहू आदि शामिल हैं।
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पानी की टंकी बनी शोपीस
लगभग 22 साल पहले गांव में लाखों रुपये के बजट से पानी की टंकी का निर्माण किया गया था, लेकिन अभी तक टंकी से गांव में पानी की सप्लाई नहीं की जा सकी है। अगर पानी की टंकी से गांव में पेयजल की सप्लाई की जाए तो कुछ हद तक ग्रामीणों को पेयजल समस्या से निजात मिल सकती है।
हमें नया बोर कराने का अधिकार नहीं है। जो हैंडपंप खराब पड़े हैं, उन्हें चिह्नित कर जल्द ही रीबोर कराए जाएंगे।
- चंद्रकुमारी राजे, ग्राम प्रधान सौंरई