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ललितपुर में पकेंगे प्राकृतिक विधि से केले
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ललितपुर में पकेंगे प्राकृतिक विधि से केले
ललितपुर। जनपद के लोगों को अब केमिकल से नहीं बल्कि कोल्ड स्टोर में पका केला मिलेगा। जिले में बुंदेलखंड विशेष पैकेज के अंतर्गत केला पकाने के लिए शीघ्र ही कोल्ड स्टोर का निर्माण किया जाएगा। यहां 10-10 मीट्रिक टन (सौ-सौ क्विंटल) के पांच चैंबर बनाए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार स्टोर से पका केले में 10 दिन तक कोई खराबी नहीं आती है। 50 लाख की लागत से से बनने बने स्टोर के लिए शासन 35 प्रतिशत सब्सिडी व्यापारी को प्रदान करेगी। अधिकारियों के अनुसार मार्च महीने में इसका शुभारंभ हो जाएगा।
मालूम हो कि केला ऊर्जा का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है, जो विटामिन व मिनरल्स से भरपूर होता है। केला पकाने में पहले कैल्शियम कार्बाइड केमिकल का इस्तेमाल किया जाता था। कैल्शियम कार्बाइड से पके फल खाने से कैंसर, मस्तिष्क विकार व सुन्नता के साथ जीवन उपयोगी अंगों पर खतरनाक असर पड़ता है। हालांकि सरकार ने कैल्शियम कार्बाइड से फल पकाने पर प्रतिबंध लगा रखा है। इसके बावजूद कैल्शियम कार्बाइड से फल पकाने का धंधा चोरी छिपे चल रहा है। इसको ध्यान में रखते हुए शासन ने केला पकाने के कोल्ड स्टोर लगाने पर सब्सिडी का प्रावधान किया है। इसके तहत ललितपुर के व्यापारी ने चंदेरा स्थित इंडस्ट्रियल एरिया में प्लांट लगाने के लिए उद्यान विभाग के माध्यम से प्रोजेक्ट शासन को भेज दिया है। कोल्ड स्टोर में केला पकाने के लिए तीन दिन का समय लगता है और यह प्रक्रिया पूरी तरह प्राकृतिक होती है। इससे यह केला स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं होता है और बाहर निकलने पर ज्यादा दिनों तक खराब भी नहीं होता है। उद्यान विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रोजेक्ट की फाइल बनाकर शासन को भेज दी है। बुंदेलखंड विशेष पैकेज के अंतर्गत इस स्टोर का निर्माण करवाया जाएगा, इसके तहत 50 लाख की लागत से बन रहे प्लांट के लिए व्यापारी को 35 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
यह है तकनीक
अधिकारियों ने बताया कि कोल्ड स्टोर में 10-10 मीट्रिक टन की क्षमता के पांच चैंबर बनाए जाएंगे। प्रत्येक चैंबर में सौ किलो केले पकाने की क्षमता होगी। अधिकारियों ने बताया कि इसमें उच्च क्षमता के हीटर व एसी लगाए जाएंगे। हीटर चैंबर में गर्मी पैदा कर वैज्ञानिक तरीके से केले को पकने में मदद करते हैं। कच्चे केलों को अच्छी तरह साफ करने के बाद क्रेट में डाल कर चैंबर में पकने के लिए रखे जाते हैं। तैयार होने के बाद केले के क्रेट एसी चैंबर में रख दिए जाते हैं। वहां से फिर उनकी बाजार में मांग के अनुसार आपूर्ति होगी। अधिकारियों ने बताया कि कोल्ड स्टोर से पका हुआ केला दस दिनों तक खराब नहीं होता है, जबकि केमिकल से पके केले शीघ्र ही खराब हो जाते हैं।
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यह होगी प्रक्रिया
मालूम हो कि जिले में महाराष्ट्र व आंध्र प्रदेश से कच्चे केलों की सप्लाई होती है। प्लांट लगने के बाद व्यापारी कच्चे केलों को थोक में लाकर उन्हें पकाने की प्रक्रिया पूरी करेगा। इसके बाद इसे जिले के व्यापारियों को बेचेगा।
प्राकृतिक विधि से पके केले जहां स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं, वहीं ज्यादा दिन तक स्टोर भी किया जा सकता है। चंदेरा में कोल्ड स्टोर बनाने के लिए प्रोजेक्ट की फाइल शासन के पास भेज दी है। मार्च तक इसका शुभारंभ हो जाएगा।
सुघर सिंह, जिला उद्यान अधिकारी
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ललितपुर। जनपद के लोगों को अब केमिकल से नहीं बल्कि कोल्ड स्टोर में पका केला मिलेगा। जिले में बुंदेलखंड विशेष पैकेज के अंतर्गत केला पकाने के लिए शीघ्र ही कोल्ड स्टोर का निर्माण किया जाएगा। यहां 10-10 मीट्रिक टन (सौ-सौ क्विंटल) के पांच चैंबर बनाए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार स्टोर से पका केले में 10 दिन तक कोई खराबी नहीं आती है। 50 लाख की लागत से से बनने बने स्टोर के लिए शासन 35 प्रतिशत सब्सिडी व्यापारी को प्रदान करेगी। अधिकारियों के अनुसार मार्च महीने में इसका शुभारंभ हो जाएगा।
मालूम हो कि केला ऊर्जा का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है, जो विटामिन व मिनरल्स से भरपूर होता है। केला पकाने में पहले कैल्शियम कार्बाइड केमिकल का इस्तेमाल किया जाता था। कैल्शियम कार्बाइड से पके फल खाने से कैंसर, मस्तिष्क विकार व सुन्नता के साथ जीवन उपयोगी अंगों पर खतरनाक असर पड़ता है। हालांकि सरकार ने कैल्शियम कार्बाइड से फल पकाने पर प्रतिबंध लगा रखा है। इसके बावजूद कैल्शियम कार्बाइड से फल पकाने का धंधा चोरी छिपे चल रहा है। इसको ध्यान में रखते हुए शासन ने केला पकाने के कोल्ड स्टोर लगाने पर सब्सिडी का प्रावधान किया है। इसके तहत ललितपुर के व्यापारी ने चंदेरा स्थित इंडस्ट्रियल एरिया में प्लांट लगाने के लिए उद्यान विभाग के माध्यम से प्रोजेक्ट शासन को भेज दिया है। कोल्ड स्टोर में केला पकाने के लिए तीन दिन का समय लगता है और यह प्रक्रिया पूरी तरह प्राकृतिक होती है। इससे यह केला स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं होता है और बाहर निकलने पर ज्यादा दिनों तक खराब भी नहीं होता है। उद्यान विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रोजेक्ट की फाइल बनाकर शासन को भेज दी है। बुंदेलखंड विशेष पैकेज के अंतर्गत इस स्टोर का निर्माण करवाया जाएगा, इसके तहत 50 लाख की लागत से बन रहे प्लांट के लिए व्यापारी को 35 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
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यह है तकनीक
अधिकारियों ने बताया कि कोल्ड स्टोर में 10-10 मीट्रिक टन की क्षमता के पांच चैंबर बनाए जाएंगे। प्रत्येक चैंबर में सौ किलो केले पकाने की क्षमता होगी। अधिकारियों ने बताया कि इसमें उच्च क्षमता के हीटर व एसी लगाए जाएंगे। हीटर चैंबर में गर्मी पैदा कर वैज्ञानिक तरीके से केले को पकने में मदद करते हैं। कच्चे केलों को अच्छी तरह साफ करने के बाद क्रेट में डाल कर चैंबर में पकने के लिए रखे जाते हैं। तैयार होने के बाद केले के क्रेट एसी चैंबर में रख दिए जाते हैं। वहां से फिर उनकी बाजार में मांग के अनुसार आपूर्ति होगी। अधिकारियों ने बताया कि कोल्ड स्टोर से पका हुआ केला दस दिनों तक खराब नहीं होता है, जबकि केमिकल से पके केले शीघ्र ही खराब हो जाते हैं।
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मालूम हो कि जिले में महाराष्ट्र व आंध्र प्रदेश से कच्चे केलों की सप्लाई होती है। प्लांट लगने के बाद व्यापारी कच्चे केलों को थोक में लाकर उन्हें पकाने की प्रक्रिया पूरी करेगा। इसके बाद इसे जिले के व्यापारियों को बेचेगा।
प्राकृतिक विधि से पके केले जहां स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं, वहीं ज्यादा दिन तक स्टोर भी किया जा सकता है। चंदेरा में कोल्ड स्टोर बनाने के लिए प्रोजेक्ट की फाइल शासन के पास भेज दी है। मार्च तक इसका शुभारंभ हो जाएगा।
सुघर सिंह, जिला उद्यान अधिकारी