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सौवें उर्स को एतिहासिकता का रंग देने की कोशिश
Updated Sat, 24 Feb 2018 12:29 AM IST
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सौवें उर्स को नया रूप देने की कोशिश
ललितपुर। शहर में बाबा सदनशाह की दरगाह पर 31 मार्च से शुरू होने वाले पांच दिवसीय सौवें उर्स को लेकर कमेटी द्वारा पूरी तैयारी के साथ इस बार आयोजन को नया रूप देने की कोशिश में लगी हुई है। आयोजन को लेकर विगत कुछ माह से दो पक्षों के बीच पनप रहे मतभेद उर्स के आयोजन में खटास भी पैदा कर रहे हैं। इसमें एक पक्ष उर्स आयोजन के दौरान होने वाले खर्च के हिसाब किताब और उर्स कमेटी की मंशा पर सवाल खड़े कर रहा है। उर्स कमेटी के पदाधिकारियों द्वारा सिर्फ वक्फ की संपत्ति को लेकर मतभेद बताया जा रहा है, लेकिन उर्स के आयोजन में उनका किसी से कोई मतभेद नहीं होना बताया है।
जनपद में 99 वर्ष तक लगातार बिना किसी मतभेद के उर्स का आयोजन बाबा सदनशाह की दरगाह में किया जाता रहा है, इस बार भी सौंवा उर्स यहां उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाए जाने की तैयारियां की जा रही हैं। बाबा सदनशाह की दरगाह पर उर्स आयोजन को लेकर लोक कथा है कि सदन कसाई भक्तमाल संत के नाम से जाने जाते हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि सदन कसाई भगवान शालिगराम के भी भक्त थे, जो बाद में हिंदू मुस्लिम एकता के प्रतीक के रूप में जाने गए।
कहा जाता है कि बाबा सदनशाह की दरगाह पर उर्स का आयोजन उनकी जन्मोत्सव की खुशी के रूप में मनाया जाता है, जो 31 मार्च से शुरू होकर चार अप्रैल तक यानि पांच दिवस तक चलता है। इस उर्स आयोजन में हर वर्ष देश विदेश से कई विख्यात कव्वालों ने अपनी प्रस्तुतियां दी हैं, जिन्हें सुनने के लिए हर समुदाय के लोग पूरे देश भर से यहां आते हैं। काफी बड़े स्तर पर उर्स मेला का आयोजन होता है, इसमें कई प्रदेशों के व्यवसायी अपना व्यापार करते हैं।
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झूला, सर्कस, तरह-तरह के गेम आदि का आयोजन भी होता है। लेकिन, इस बार सौवें उर्स के आयोजन के दौरान दो पक्षों में आपसी मतभेद सामने आने से कौमी एकता का प्रतीक उर्स के भव्य आयोजन को लेकर आम लोगों में तरह-तरह की भ्रांतियां पैदा हो गई हैं। एक ओर जहां उर्स कमेटी उक्त आयोजन को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है और सौवें उर्स को भव्यता और ऐतिहासिकता के साथ कराए जाने की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। गत दिवस बैठक में उर्स कमेटी द्वारा इसके सौवें उर्स की रूपरेखा तैयार की गई और उर्स के दौरान पूरे शहर को दुल्हन की तरह सजाने को सभी समुदाय के लोगों के साथ मंतव्य किया जा रहा है। एक दूसरे पक्ष द्वारा उक्त उर्स के आयोजन के दौरान कमेटी पर आय-व्यय पर सवालिया निशान खड़े किए हैं और वक्फ बोर्ड द्वारा गठित होने वाली कमेटी द्वारा उर्स का आयोजन कराए जाने की मंशा जाहिर की है। हालांकि उर्स कमेटी के साथ ही दूसरा पक्ष भी उर्स के आयोजन कराए जाने की स्वच्छ मंशा रखता नजर आ रहा है, लेकिन नये और स्वच्छ छवि के पदाधिकारियों की गठित कमेटी द्वारा उर्स आयोजन कराए जाने मंशा भी जाहिर करता है। जबकि जिला प्रशासन ने भी उक्त उर्स के आयोजन के लिए आयोजित की जाने वाली कमेटी के गठन के लिए आवेदन मांगे हैं, जो वक्फ बोर्ड को भेजे जाने हैं, जहां से नई कमेटी के गठन पर मुहर लगेगी। हालांकि शहरवासियों को हर वर्ष की तरह इस बार भी सदनशाह उर्स के आयोजन का बेताबी के साथ इंतजार है।
- फोटो-15
कैप्सन-बाबू बदरुद्दीन कुरैशी।
फोटो-18
उर्स आयोजन को लेकर नहीं, वक्फ की संपत्ति पर है विवाद
सदनशाह की दरगाह पर आयोजित होने वाला उर्स के आयोजन को लेकर नहीं, सिर्फ वक्फ संपत्ति को लेकर मतभेद है। जो कुछ अराजक तत्व हैं, उनका उर्स के आयोजन से कभी कोई संबंध नहीं रहा है और न ही वे उर्स कमेटी के कभी पदाधिकारी रहे हैं। बाबा सदनशाह उर्स में कौमी एकता के नाम से कार्यक्रम किए जाते हैं, लेकिन कुछ लोग सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उर्स कमेटी व वक्फ 143 हजरत बाबा सदनशाह दोनों अलग-अलग हैं और जिलाधिकारी ने वक्फ के लिए नाम मांगे हैं। इस बार सौवां उर्स पूरे उल्लास और भव्यता के साथ मनाया जाएगा।
बाबू बदरुद्दीन कुरैशी, सदर, उर्स कमेटी।
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फोटो-16
कैप्सन-नासिर मंसूरी।
उर्स के पक्ष में हैं, लेकिन व्यवस्था का विरोध है
बाबा सदनशाह कैंपस उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड एवं उत्तर प्रदेश सरकार की संपत्ति है, जिसका वक्फ संख्या 143 है। इस पर कोई भी संस्था बनाकर उर्स व प्रबंधन नियमानुसार आयोजन नहीं करा सकती है। सदनशह दरगाह पर सौवां उर्स का आयोजन भव्यता के साथ होना चाहिए, जो वक्फ बोर्ड द्वारा नामित गठित कमेटी द्वारा कराया जाए, जिन लोगों पर करोड़ों रुपये के गबन की जांच चल रही हैं, ऐसे लोगों को उर्स कमेटी के पदों से दूर रखा जाए।
नासिर मंसूरी, पूर्व अध्यक्ष मुस्लिम महासभा।
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कैप्सन-इकबाल बेग।
गबन के आरोपों की जांच तक सीज रहें अधिकार
हम उर्स कराए जाने के पूर्ण पक्ष में हैं और सदनशाह दरगाह पर सौवां उर्स का आयोजन भव्यता के साथ होना चाहिए। लेकिन जिन लोगों पर करोड़ों के गबन के आरोप हैं, जब तक जांच विचाराधीन है, तब तक उनके अधिकार उर्स के आयोजन के लिए सीज किए जाएं। जिलाधिकारी अपर सर्वे वक्फ आयुक्त होता है, वह उर्स का आयोजन करा सकते हैं।
इकबाल बेग. अधिवक्ता
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इनका कहना है-
वक्फ बोर्ड द्वारा कमेटी गठन के लिए नाम की सूची मांगी गई है, जो तय करके भेजे जा रहे हैं। उर्स का आयोजन नियमानुसार नई गठित कमेटी के माध्यम से ही कराया जाएगा।
महेश प्रसाद दीक्षित, उपजिलाधिकारी सदर।
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ललितपुर। शहर में बाबा सदनशाह की दरगाह पर 31 मार्च से शुरू होने वाले पांच दिवसीय सौवें उर्स को लेकर कमेटी द्वारा पूरी तैयारी के साथ इस बार आयोजन को नया रूप देने की कोशिश में लगी हुई है। आयोजन को लेकर विगत कुछ माह से दो पक्षों के बीच पनप रहे मतभेद उर्स के आयोजन में खटास भी पैदा कर रहे हैं। इसमें एक पक्ष उर्स आयोजन के दौरान होने वाले खर्च के हिसाब किताब और उर्स कमेटी की मंशा पर सवाल खड़े कर रहा है। उर्स कमेटी के पदाधिकारियों द्वारा सिर्फ वक्फ की संपत्ति को लेकर मतभेद बताया जा रहा है, लेकिन उर्स के आयोजन में उनका किसी से कोई मतभेद नहीं होना बताया है।
जनपद में 99 वर्ष तक लगातार बिना किसी मतभेद के उर्स का आयोजन बाबा सदनशाह की दरगाह में किया जाता रहा है, इस बार भी सौंवा उर्स यहां उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाए जाने की तैयारियां की जा रही हैं। बाबा सदनशाह की दरगाह पर उर्स आयोजन को लेकर लोक कथा है कि सदन कसाई भक्तमाल संत के नाम से जाने जाते हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि सदन कसाई भगवान शालिगराम के भी भक्त थे, जो बाद में हिंदू मुस्लिम एकता के प्रतीक के रूप में जाने गए।
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कहा जाता है कि बाबा सदनशाह की दरगाह पर उर्स का आयोजन उनकी जन्मोत्सव की खुशी के रूप में मनाया जाता है, जो 31 मार्च से शुरू होकर चार अप्रैल तक यानि पांच दिवस तक चलता है। इस उर्स आयोजन में हर वर्ष देश विदेश से कई विख्यात कव्वालों ने अपनी प्रस्तुतियां दी हैं, जिन्हें सुनने के लिए हर समुदाय के लोग पूरे देश भर से यहां आते हैं। काफी बड़े स्तर पर उर्स मेला का आयोजन होता है, इसमें कई प्रदेशों के व्यवसायी अपना व्यापार करते हैं।
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झूला, सर्कस, तरह-तरह के गेम आदि का आयोजन भी होता है। लेकिन, इस बार सौवें उर्स के आयोजन के दौरान दो पक्षों में आपसी मतभेद सामने आने से कौमी एकता का प्रतीक उर्स के भव्य आयोजन को लेकर आम लोगों में तरह-तरह की भ्रांतियां पैदा हो गई हैं। एक ओर जहां उर्स कमेटी उक्त आयोजन को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है और सौवें उर्स को भव्यता और ऐतिहासिकता के साथ कराए जाने की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। गत दिवस बैठक में उर्स कमेटी द्वारा इसके सौवें उर्स की रूपरेखा तैयार की गई और उर्स के दौरान पूरे शहर को दुल्हन की तरह सजाने को सभी समुदाय के लोगों के साथ मंतव्य किया जा रहा है। एक दूसरे पक्ष द्वारा उक्त उर्स के आयोजन के दौरान कमेटी पर आय-व्यय पर सवालिया निशान खड़े किए हैं और वक्फ बोर्ड द्वारा गठित होने वाली कमेटी द्वारा उर्स का आयोजन कराए जाने की मंशा जाहिर की है। हालांकि उर्स कमेटी के साथ ही दूसरा पक्ष भी उर्स के आयोजन कराए जाने की स्वच्छ मंशा रखता नजर आ रहा है, लेकिन नये और स्वच्छ छवि के पदाधिकारियों की गठित कमेटी द्वारा उर्स आयोजन कराए जाने मंशा भी जाहिर करता है। जबकि जिला प्रशासन ने भी उक्त उर्स के आयोजन के लिए आयोजित की जाने वाली कमेटी के गठन के लिए आवेदन मांगे हैं, जो वक्फ बोर्ड को भेजे जाने हैं, जहां से नई कमेटी के गठन पर मुहर लगेगी। हालांकि शहरवासियों को हर वर्ष की तरह इस बार भी सदनशाह उर्स के आयोजन का बेताबी के साथ इंतजार है।
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कैप्सन-बाबू बदरुद्दीन कुरैशी।
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उर्स आयोजन को लेकर नहीं, वक्फ की संपत्ति पर है विवाद
सदनशाह की दरगाह पर आयोजित होने वाला उर्स के आयोजन को लेकर नहीं, सिर्फ वक्फ संपत्ति को लेकर मतभेद है। जो कुछ अराजक तत्व हैं, उनका उर्स के आयोजन से कभी कोई संबंध नहीं रहा है और न ही वे उर्स कमेटी के कभी पदाधिकारी रहे हैं। बाबा सदनशाह उर्स में कौमी एकता के नाम से कार्यक्रम किए जाते हैं, लेकिन कुछ लोग सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उर्स कमेटी व वक्फ 143 हजरत बाबा सदनशाह दोनों अलग-अलग हैं और जिलाधिकारी ने वक्फ के लिए नाम मांगे हैं। इस बार सौवां उर्स पूरे उल्लास और भव्यता के साथ मनाया जाएगा।
बाबू बदरुद्दीन कुरैशी, सदर, उर्स कमेटी।
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कैप्सन-नासिर मंसूरी।
उर्स के पक्ष में हैं, लेकिन व्यवस्था का विरोध है
बाबा सदनशाह कैंपस उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड एवं उत्तर प्रदेश सरकार की संपत्ति है, जिसका वक्फ संख्या 143 है। इस पर कोई भी संस्था बनाकर उर्स व प्रबंधन नियमानुसार आयोजन नहीं करा सकती है। सदनशह दरगाह पर सौवां उर्स का आयोजन भव्यता के साथ होना चाहिए, जो वक्फ बोर्ड द्वारा नामित गठित कमेटी द्वारा कराया जाए, जिन लोगों पर करोड़ों रुपये के गबन की जांच चल रही हैं, ऐसे लोगों को उर्स कमेटी के पदों से दूर रखा जाए।
नासिर मंसूरी, पूर्व अध्यक्ष मुस्लिम महासभा।
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कैप्सन-इकबाल बेग।
गबन के आरोपों की जांच तक सीज रहें अधिकार
हम उर्स कराए जाने के पूर्ण पक्ष में हैं और सदनशाह दरगाह पर सौवां उर्स का आयोजन भव्यता के साथ होना चाहिए। लेकिन जिन लोगों पर करोड़ों के गबन के आरोप हैं, जब तक जांच विचाराधीन है, तब तक उनके अधिकार उर्स के आयोजन के लिए सीज किए जाएं। जिलाधिकारी अपर सर्वे वक्फ आयुक्त होता है, वह उर्स का आयोजन करा सकते हैं।
इकबाल बेग. अधिवक्ता
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इनका कहना है-
वक्फ बोर्ड द्वारा कमेटी गठन के लिए नाम की सूची मांगी गई है, जो तय करके भेजे जा रहे हैं। उर्स का आयोजन नियमानुसार नई गठित कमेटी के माध्यम से ही कराया जाएगा।
महेश प्रसाद दीक्षित, उपजिलाधिकारी सदर।