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वैदिक संस्कारों को अपनाने से समाज व राष्ट्र का संरक्षण संभव
Updated Mon, 23 Oct 2017 01:02 AM IST
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वैदिक संस्कार अपनाने से समाज व राष्ट्र का संरक्षण संभव
ललितपुर।
कंपनी बाग में महर्षि दयानंद सरस्वती योग संस्थान आर्य समाज के तत्वाधान में युवा पीढ़ी में सांस्कृतिक मूल्यों का क्षरण पर आयोजित संगोष्ठी में वैदिक संस्कारों को अपनाने पर बल दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि वैदिक संस्कारों से समाज और राष्ट्र का संरक्षण संभव है।
मुख्य वक्ता स्वामी सुरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी पश्चिम सभ्यता को अपना रही है। इससे नैतिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है, जिसे वैदिक संस्कारों द्वारा ही उपचारित किया जा सकता है। मुख्य अतिथि सदर विधायक रामरतन कुशवाहा ने कहा कि भारत की महान सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए युवा पीढ़ी को संस्कारित करना आवश्यक है। मुख्य वक्ता वैदिक चिंतक समाजसेवी धर्मेंद्र गोस्वामी ने भारतीय संस्कृति व राष्ट्र निर्माण में आर्य समाज के अतुलनीय योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश को आजाद कराने में जिन महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति दी, वह सभी दयानंद सरस्वती व आर्य समाज से प्रेरित थे। मुनि पुरुषोत्तम वानप्रस्थ ने कहा कि नैतिक पतन के गर्त में जाती युवा पीढ़ी को बचाने के लिए वैदिक संस्कृति और आर्य समाज से जोड़ना होगा।
अध्यक्षता कर रहे समाजसेवी गंधर्व सिंह बाबू ने कहा कि आर्य समाज द्वारा ही समाज व राष्ट्र का संरक्षण व संबर्द्धन संभव है। शिक्षक डीएल यादव ने कहा कि युवा पीढ़ी को संस्कारित करने की पहल जरूरी है। विजय सिंह निरंजन संस्थापक एमएसडी महाविद्यालय पाली ने बताया कि आदिवासी बालक-बालिकाओं के शिक्षित होने का अंदाजा से इससे लगाया जा सकता है कि उन्हें कंठस्थ मंत्र याद हैं। इस मौके पर जिला संयोजक अरविंद जैन, प्रीति जैन, लखनलाल आर्य, अनुराग चतुर्वेदी, मुकेश साहू, राम किशोर विश्वकर्मा, रामसेवक निरंजन, विजय सिंह निरंजन, सुरेश कोंते, मिशन बेटियां से डॉ. जीत गुप्ता जीत, अज्जू बाबा, हरीश कपूर, नीरज जैन, प्रमेंद्र सिंह, ठाकुर राघवेंद्र सिंह सिमिरिया, रामकुमार दुबे, डॉ. अरिमर्दन सिंह राजपूत, केशव साहू, डॉ. राजीव निरंजन, आदर्श रावत, परशुराम निरंजन, मनीष खरे, कल्लन कुशवाहा, राजपाल यादव, आधार यादव उपस्थित रहे। संचालन आयोजक आर्य मंत्री शिक्षक लखन लाल आर्य ने किया। अंत में आभार कार्यक्रम प्रभारी इंदर सिंह पटेल ने जताया।
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ललितपुर।
कंपनी बाग में महर्षि दयानंद सरस्वती योग संस्थान आर्य समाज के तत्वाधान में युवा पीढ़ी में सांस्कृतिक मूल्यों का क्षरण पर आयोजित संगोष्ठी में वैदिक संस्कारों को अपनाने पर बल दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि वैदिक संस्कारों से समाज और राष्ट्र का संरक्षण संभव है।
मुख्य वक्ता स्वामी सुरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी पश्चिम सभ्यता को अपना रही है। इससे नैतिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है, जिसे वैदिक संस्कारों द्वारा ही उपचारित किया जा सकता है। मुख्य अतिथि सदर विधायक रामरतन कुशवाहा ने कहा कि भारत की महान सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए युवा पीढ़ी को संस्कारित करना आवश्यक है। मुख्य वक्ता वैदिक चिंतक समाजसेवी धर्मेंद्र गोस्वामी ने भारतीय संस्कृति व राष्ट्र निर्माण में आर्य समाज के अतुलनीय योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश को आजाद कराने में जिन महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति दी, वह सभी दयानंद सरस्वती व आर्य समाज से प्रेरित थे। मुनि पुरुषोत्तम वानप्रस्थ ने कहा कि नैतिक पतन के गर्त में जाती युवा पीढ़ी को बचाने के लिए वैदिक संस्कृति और आर्य समाज से जोड़ना होगा।
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अध्यक्षता कर रहे समाजसेवी गंधर्व सिंह बाबू ने कहा कि आर्य समाज द्वारा ही समाज व राष्ट्र का संरक्षण व संबर्द्धन संभव है। शिक्षक डीएल यादव ने कहा कि युवा पीढ़ी को संस्कारित करने की पहल जरूरी है। विजय सिंह निरंजन संस्थापक एमएसडी महाविद्यालय पाली ने बताया कि आदिवासी बालक-बालिकाओं के शिक्षित होने का अंदाजा से इससे लगाया जा सकता है कि उन्हें कंठस्थ मंत्र याद हैं। इस मौके पर जिला संयोजक अरविंद जैन, प्रीति जैन, लखनलाल आर्य, अनुराग चतुर्वेदी, मुकेश साहू, राम किशोर विश्वकर्मा, रामसेवक निरंजन, विजय सिंह निरंजन, सुरेश कोंते, मिशन बेटियां से डॉ. जीत गुप्ता जीत, अज्जू बाबा, हरीश कपूर, नीरज जैन, प्रमेंद्र सिंह, ठाकुर राघवेंद्र सिंह सिमिरिया, रामकुमार दुबे, डॉ. अरिमर्दन सिंह राजपूत, केशव साहू, डॉ. राजीव निरंजन, आदर्श रावत, परशुराम निरंजन, मनीष खरे, कल्लन कुशवाहा, राजपाल यादव, आधार यादव उपस्थित रहे। संचालन आयोजक आर्य मंत्री शिक्षक लखन लाल आर्य ने किया। अंत में आभार कार्यक्रम प्रभारी इंदर सिंह पटेल ने जताया।
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