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भगवान राम के जन्म होते ही जयघोषों से गूंजा मैदान
Updated Thu, 21 Sep 2017 01:44 AM IST
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भगवान राम के जन्म होते ही जयघोषों से गूंजा मैदान
ललितपुर।
मुहल्ला तालाबपुरा में श्रीनृसिंह रामलीला समिति के तत्वावधान में आयोजित रामलीला के द्वितीय दिवस में रामजन्म की लीला हुई। भगवान रामजन्म होते ही जयघोषों से समूचा मैदान गुंजायमान हो उठा।
प्रथम दृश्य में रावण, कुंभकर्ण, विभीषण ब्रह्माजी को तप से प्रसन्न करके उनसे अमरता का वरदान प्राप्त करते हैं। इसके उपरांत रावण (असुरों) के पाप व अत्याचार का भार बढ़ जाता है। पृथ्वी माता इस भार को सहन नहीं कर पाती है। सभी जगह लोग त्राहि-त्राहि करने लगते हैं, तब देवताओं ने भगवान नारायण से विनती की कि वह कृपा करें और माता पृथ्वी को इस भार से मुक्त कराएं। कहीं ऐसा न हो कि माता पृथ्वी इस अधर्म के भार को सहन न कर पाने के कारण धरातल में न समा जाएं। देवों की प्रार्थना को सुनकर भगवान ने कोशल्या के गर्भ से भगवान श्रीराम को जन्म दिया। लीला के तीसरे दृश्य में अयोध्या के चक्रवती सम्राट दशरथ पुत्र की लालसा लिए गुरुदेव की आज्ञा से पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ करते हैं। यज्ञ से प्राप्त प्रसाद के फलस्वरूप राजा दशरथ को तीन रानियों से चार पुत्रों राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न की प्राप्ति होती है। भगवान श्रीराम का जन्म होते ही संपूर्ण प्रांगण जय श्रीराम के उद्घोषों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम की आरती उतारी और महिलाओं ने मंगल गीत गाए। श्रीराम जन्म की खुशी में श्रद्धालु झूम उठे। पूरा माहौल भक्ति के रस में डूब गया। कलाकार की भूमिका में श्रीराम आयुष्मान शर्मा, लक्ष्मण रुद्रांश चतुर्वेदी बने हैं। रामलीला देखने पहुंच रहे कलाकारों के अभिनय की तारीफ करते हुए दर्शक थक नहीं रहे हैं।
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ललितपुर।
मुहल्ला तालाबपुरा में श्रीनृसिंह रामलीला समिति के तत्वावधान में आयोजित रामलीला के द्वितीय दिवस में रामजन्म की लीला हुई। भगवान रामजन्म होते ही जयघोषों से समूचा मैदान गुंजायमान हो उठा।
प्रथम दृश्य में रावण, कुंभकर्ण, विभीषण ब्रह्माजी को तप से प्रसन्न करके उनसे अमरता का वरदान प्राप्त करते हैं। इसके उपरांत रावण (असुरों) के पाप व अत्याचार का भार बढ़ जाता है। पृथ्वी माता इस भार को सहन नहीं कर पाती है। सभी जगह लोग त्राहि-त्राहि करने लगते हैं, तब देवताओं ने भगवान नारायण से विनती की कि वह कृपा करें और माता पृथ्वी को इस भार से मुक्त कराएं। कहीं ऐसा न हो कि माता पृथ्वी इस अधर्म के भार को सहन न कर पाने के कारण धरातल में न समा जाएं। देवों की प्रार्थना को सुनकर भगवान ने कोशल्या के गर्भ से भगवान श्रीराम को जन्म दिया। लीला के तीसरे दृश्य में अयोध्या के चक्रवती सम्राट दशरथ पुत्र की लालसा लिए गुरुदेव की आज्ञा से पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ करते हैं। यज्ञ से प्राप्त प्रसाद के फलस्वरूप राजा दशरथ को तीन रानियों से चार पुत्रों राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न की प्राप्ति होती है। भगवान श्रीराम का जन्म होते ही संपूर्ण प्रांगण जय श्रीराम के उद्घोषों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम की आरती उतारी और महिलाओं ने मंगल गीत गाए। श्रीराम जन्म की खुशी में श्रद्धालु झूम उठे। पूरा माहौल भक्ति के रस में डूब गया। कलाकार की भूमिका में श्रीराम आयुष्मान शर्मा, लक्ष्मण रुद्रांश चतुर्वेदी बने हैं। रामलीला देखने पहुंच रहे कलाकारों के अभिनय की तारीफ करते हुए दर्शक थक नहीं रहे हैं।
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