फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lalitpur News ›   शहर में बंद का रहा मिला जुला असरा, दोपहर बाद खुल गया अधिकांश बाजार

शहर में बंद का रहा मिला जुला असरा, दोपहर बाद खुल गया अधिकांश बाजार

Sat, 29 Sep 2018 04:12 AM IST
Updated Sat, 29 Sep 2018 04:12 AM IST
विज्ञापन
शहर में बंद का रहा मिला जुला असरा, दोपहर बाद खुल गया अधिकांश बाजार

विज्ञापन
शहर में बंद का रहा मिलाजुला असर

ललितपुर। जीएसटी, एफडीआई व स्वकर प्रणाली आदि में सुधार के लिए व्यापारियों द्वारा केंद्रीय संगठन के आह्वान पर शुक्रवार को जिले में बाजार बंद का मिलाजुला असर देखने को मिला। शुक्रवार की सुबह करीब बारह तक तो करीब साठ फीसदी बाजार बंद रहा, लेकिन दोपहर बाद अधिकांश व्यापारी बाजार खोलते गए। वहीं कुछ व्यापारी व व्यापारी संगठन ने नैतिक रूप से बंद का पूर्ण समर्थन नहीं किया, लेकिन व्यापारी हित में विरोध भी नहीं किया।

इस अवसर पर जिला उद्योग व्यापार मंडल ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह को सौंपा, जिसमें बताया कि जीएसटी में दो दरें पांच प्रतिशत और सोलह प्रतिशत रखीं जाए। जीएसटी में किसी भी प्रकार का जुर्माना दस हजार से अधिक न हो एवं जेल की सजा का प्रावधान समाप्त हो। पंजीकृत व्यापारियों का उत्तर प्रदेश की तरह दस लाख का दुर्घटना बीमा हो व व्यापारियों को टैक्स कलेक्टर का दर्जा देते हुए पेंशन दी जाए। पूरे देश से मंडी शुल्क समाप्त किया जाए। सिंगल ब्रांड रिटेल में सौ प्रतिशत एफडीआई की अनुमति वापस हो। खुदरा व्यापार में विदेशी निवेश को अनुमति न दी जाए। ऑनलाइन ट्रेडिंग की व्यवस्था समाप्त की जाए। आयकर में छूट की सीमा पांच लाख की जाए एवं धारा 80 सी के तहत छूट सीमा डेढ़ लाख से बढ़ाकर ढाई लाख की जाए। देश में पत्थर एवं लकड़ी पर लागू वन विभाग के टैक्स को समाप्त किया जाए। खाद्य सुरक्षा अधिनियम में जुर्माना अधिकतम दस हजार व खाद्य कानून के मानक वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार फिर से निर्धारित किया जाए। खाद्यान्न एवं जरूरी वस्तुओं को वायदा कारोबार से बाहर रखा जाए। स्वकर के तहत निर्धारित किए गए भवन कर की दरें कम की जाएं एवं बीस वर्ष से अधिक पुराने मकान की दरें आधी की जाएं। जब तक नगर पालिका परिषद द्वारा ग्रहकर की राशि का सही निर्धारण नहीं हो जाता, तब तक जल संस्थान द्वारा दिए जा रहे भारी भरकम राशि के बिलों का स्थगित किया जाए। ज्ञापन पर जिलाध्यक्ष सुरेश बड़ेरा, नवनीत किलेदार, विजय, जितेंद्र सोनी, शैलेंद्र सिंघई, संजय जैन, मनीष सड़ैया, प्रदीप सतरवांस, अभिषेक अनौरा, सुधांशु हुंडैत, रामबाबू त्रिपाठी, हरविंदर सलूजा, समित समैया, अनिल चौधरी, संजय कुमार, समद खान, विशाल सराफ, विवेक शर्मा, राकेश व विभूति आदि के हस्ताक्षर थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed