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विद्युत व्यवस्था में सुधार, तो निजीकरण का फैसला गलत

Tue, 20 Mar 2018 02:03 AM IST
Updated Tue, 20 Mar 2018 02:03 AM IST
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विद्युत व्यवस्था में सुधार, तो निजीकरण का फैसला गलत
निजीकरण के विरोध में विद्युत अभियंता लामबंद
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ललितपुर। प्रदेश के पांच जिलों की विद्युत व्यवस्था पूर्णत: निजीकरण करने के विरोध में सोमवार को राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में जिले भर के विद्युत अभियंताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और सरकार से सवाल पूछा कि जब प्रदेश में विद्युत व्यवस्था में सुधार का दावा किया जा रहा है, तो निजीकरण का फैसला किस लिए लिया गया है। जेई संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया गया तो संगठन द्वारा जनपद सहित पूरे प्रदेश में कार्य का बहिष्कार किया जाएगा।
प्रदेश सरकार द्वारा राजधानी लखनऊ समेत गोरखपुर, वाराणसी, मेरठ व मुरादाबाद की बिजली वितरण व्यवस्था निजी क्षेत्र को सौंपने का निर्णय लिया है। गत शुक्रवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इसके प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई है। एक साथ पांच जिलों की बिजली व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने के फैसले पर पावर कार्पोरेशन के सभी संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। सोमवार को राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में जिले भर के विद्युत अभियंताओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए धरना दिया। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि संगठन द्वारा योगी सरकार से कैबिनेट में लिए गए निजीकरण के इस फैसले को वापस लेने पर तत्काल विचार करना चाहिए। अन्यथा की स्थिति में प्रदेश लाखों अधिकारी व कर्मचारी एक साथ आंदोलन करने को विवश होंगे।
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जेई संगठन के अध्यक्ष अवर अभियंता विनय साहू ने कहा कि पहले आगरा में बिजली व्यवस्था का निजीकरण कर दिया गया है और अब एक साथ पांच जिलों को निजी हाथों में सौंपने का निर्णय विद्युत अधिकारियों व कर्मचारियों के कार्यों की मंशा पर सवाल खड़े करना जैसा है। जबकि प्रदेश में सरकार द्वारा ही बिजली व्यवस्था में सुधार के दावे किए जा रहे हैं। अब धीरे-धीरे थ्रू रेट में भी सुधार हो रहा है, तो फिर ऐसे में इन पांच जिलों की बिजली व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने का निर्णय किस हद तक सही हो सकता है। उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र ही शासन द्वारा निजीकरण का यह फैसला वापस नहीं लिया जाता है तो संगठन सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को बाध्य होगा। आंदोलनकारियों ने इस निर्णय से उपभोक्ताओं को भी नुकसान होना बताया है। इससे बिजली की दरों में वृद्घि होगी और कर्मचारियों की संख्या कम हो जाएगी। रोजगार के अवसरों पर इसका खासा असर पड़ेगा। पांच से दस हजार रुपये का वेतन देकर अधिक काम लिया जाएगा। वहीं रुपया पावर कार्पोरेशन का खर्च होगा और इसका लाभ निजी कंपनियां उठाएंगी। सोमवार को जिला परिषद स्थित विद्युत खंडीय कार्यालय परिसर में एकत्रित होकर संगठन के सदस्य अभियंताओं व कर्मचारियों ने सरकारी की इस तरह की नीतियों का विरोध किया और जमकर नारेबाजी की। इस मौके पर अधिशासी अभियंता ग्रामीण आकाश सचान, अधिशासी अभियंता मीटर बाबूलाल, उपखंड अधिकारी अखिलेश कुमार वर्मा, सौरभ पटैरिया, महेश विश्वकर्मा, राजेश पटेल, महेश प्रसाद, अवर अभियंता पंकज मौर्य, विनय साहू, पंकज मौर्य, एसपी सिंह, मोहित सोनी, जगदीश झा, डीडी सोलंकी, सुनील पाल, लखन आदि धरना प्रदर्शन में शामिल रहे।
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