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कुछ मिला, कुछ लिए जूझते रहे पूरे साल
Updated Mon, 01 Jan 2018 01:49 AM IST
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कुछ मिला, कुछ के लिए जूझते रहे पूरे साल
गुजरता वर्ष 2017 पर्यटन के लिए प्रसिद्ध नगरी ललितपुर जनपद की स्वास्थ्य सुविधाओं के लिहाज से कुछ महत्वपूर्ण नहीं माना जाएगा। हालांकि चिकित्सकों व कर्मचारियों की कमी जरूर रही, इसके कारण व्यवस्थाएं पूरे वर्ष भर बदहाल रहीं। रिपोर्ट- सुनील यादव
ललितपुर। वर्ष 2017 में स्टाफ की कमी से जूझ रही चिकित्सा व्यवस्था को दुरुस्त करने की दिशा में प्रयास किए गए। लेकिन जन समस्याओं को तात्कालिक तौर पर अपेक्षित लाभ नहीं मिला। जिला अस्पताल से लेकर सरकारी अस्पतालों में मरीजों और तीमारदारों की भीड़ लगभग पूरे वर्ष भर लगती रही। निजी अस्पतालों के महंगे इलाज से करा पाने में असमर्थ मरीज सरकारी चिकित्सा से जिस तरह की अपेक्षा करते हैं, उसे वह इलाज नहीं मिला है। सरकारी अस्पताल में कई चिकित्सक व पर्याप्त दवाएं समय पर नहीं मिली। जबकि सरकार सरकारी अस्पताल में पर्याप्त दवाओं का दावा करते रहे, जिसके चलते कुछ चिकित्सकों ने जेनरिक दवाएं लिखने की जहमत नहीं उठाई। इसका नतीजा यह निकला कि गरीब व असहाय मरीज या तो परेशान हुआ और महंगा इलाज कराने के लिए मजबूर हुआ। गंभीर बीमारी में और दुर्घटनाओं की स्थिति में सरकारी अस्पताल केवल रेफर करता है। इलाज के लिए पहल करने की जरूरत कभी नहीं समझी गई। टीवी से संबधित इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था कर ली गई है। और इलाज चल रहा है।
एक नजर में------ जिलें में
सीएचसी-04
पीएचसी-23
उपकेंद्र- 198
स्वास्थ्य सेवाओं में जनपद अव्वल
स्वास्थ्य सेवाओं के सूचकांक में जनपद ने वाजी मारी थी। स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की जारी 2016-17 की जारी रैकिंग में स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधाएं उपलब्ध कराने में अव्वल रहा। यहां की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति अच्छी रही।
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नहीं है जेनेरिक औषधि के स्टोर
जनपद में जेनेरिक दवाएं नहीं मिलती है, जिससे गरीब लोगों को महंगे इलाज के लिए मजबूर होना पड़ता है। कुछ लोग महंगा इलाज कराने में असमर्थ नहीं हैं, वे परेशान होते हैं। जेनेरिक औषधि केंद्र होने से गरीब व असहाय लोगों को सस्ते इलाज की सौगात मिलती। लेकिन जिले में अभी तक एक भी जेनरिक औषधि केंद्र नहीं खुल सके हैं।
जनपद है भारी चिकित्सकों की कमी
जनपद चिकित्सकों व विशेषज्ञों की कमी से वर्ष भर जूझता रहा। जिले किसी भी अस्पतालों में एक भी विशेषज्ञ नहीं है। साथ ही चिकित्सकों की भारी कमी है। जनपद में एक भी रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण जिला चिकित्सालय में एक्सरे होने की व्यवस्था नहीं है। एक्सरे के लिए लोगों को बाहर जाना पड़ता है।
विवादों में घिरा रहा स्वास्थ्य विभाग
स्वास्थ्य विभाग लगातार वर्ष भर ही विवादों में रहा, जिसमें आए ब्लड बेचते हुए फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। विकासखंड बार में महिला गर्भवती महिला की मौत होना। साथ ही जिला अस्पताल की मोर्चरी में सड़ता रहा शव। जिला अस्पताल के अस्थाई कर्मचारी पर अस्पताल परिसर में ही किशोरी के साथ छेड़खानी का आरोप लगा। इन घटनाओं के बावजूद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
फोटो- 17
आंगनबाड़ी कर्मचारियों का आंदोलन बना मुसीबत
ललितपुर। वर्ष के अंत में आंगनबाड़ी कर्मचारियों के आंदोलन ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को तगड़ा झटका दिया गया। विभिन्न मांगों को लेकर आंगनबाड़ी कर्मचारियों ने आंदोलन चलाने के साथ ही अंत के महीनों में लगभग हर रोज धरना-प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि आश्वासन के बाद भी उनकी समस्याओं की ओर ध्यान दिया जा रहा है।
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गुजरता वर्ष 2017 पर्यटन के लिए प्रसिद्ध नगरी ललितपुर जनपद की स्वास्थ्य सुविधाओं के लिहाज से कुछ महत्वपूर्ण नहीं माना जाएगा। हालांकि चिकित्सकों व कर्मचारियों की कमी जरूर रही, इसके कारण व्यवस्थाएं पूरे वर्ष भर बदहाल रहीं। रिपोर्ट- सुनील यादव
ललितपुर। वर्ष 2017 में स्टाफ की कमी से जूझ रही चिकित्सा व्यवस्था को दुरुस्त करने की दिशा में प्रयास किए गए। लेकिन जन समस्याओं को तात्कालिक तौर पर अपेक्षित लाभ नहीं मिला। जिला अस्पताल से लेकर सरकारी अस्पतालों में मरीजों और तीमारदारों की भीड़ लगभग पूरे वर्ष भर लगती रही। निजी अस्पतालों के महंगे इलाज से करा पाने में असमर्थ मरीज सरकारी चिकित्सा से जिस तरह की अपेक्षा करते हैं, उसे वह इलाज नहीं मिला है। सरकारी अस्पताल में कई चिकित्सक व पर्याप्त दवाएं समय पर नहीं मिली। जबकि सरकार सरकारी अस्पताल में पर्याप्त दवाओं का दावा करते रहे, जिसके चलते कुछ चिकित्सकों ने जेनरिक दवाएं लिखने की जहमत नहीं उठाई। इसका नतीजा यह निकला कि गरीब व असहाय मरीज या तो परेशान हुआ और महंगा इलाज कराने के लिए मजबूर हुआ। गंभीर बीमारी में और दुर्घटनाओं की स्थिति में सरकारी अस्पताल केवल रेफर करता है। इलाज के लिए पहल करने की जरूरत कभी नहीं समझी गई। टीवी से संबधित इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था कर ली गई है। और इलाज चल रहा है।
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एक नजर में------ जिलें में
सीएचसी-04
पीएचसी-23
उपकेंद्र- 198
स्वास्थ्य सेवाओं में जनपद अव्वल
स्वास्थ्य सेवाओं के सूचकांक में जनपद ने वाजी मारी थी। स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की जारी 2016-17 की जारी रैकिंग में स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधाएं उपलब्ध कराने में अव्वल रहा। यहां की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति अच्छी रही।
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नहीं है जेनेरिक औषधि के स्टोर
जनपद में जेनेरिक दवाएं नहीं मिलती है, जिससे गरीब लोगों को महंगे इलाज के लिए मजबूर होना पड़ता है। कुछ लोग महंगा इलाज कराने में असमर्थ नहीं हैं, वे परेशान होते हैं। जेनेरिक औषधि केंद्र होने से गरीब व असहाय लोगों को सस्ते इलाज की सौगात मिलती। लेकिन जिले में अभी तक एक भी जेनरिक औषधि केंद्र नहीं खुल सके हैं।
जनपद है भारी चिकित्सकों की कमी
जनपद चिकित्सकों व विशेषज्ञों की कमी से वर्ष भर जूझता रहा। जिले किसी भी अस्पतालों में एक भी विशेषज्ञ नहीं है। साथ ही चिकित्सकों की भारी कमी है। जनपद में एक भी रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण जिला चिकित्सालय में एक्सरे होने की व्यवस्था नहीं है। एक्सरे के लिए लोगों को बाहर जाना पड़ता है।
विवादों में घिरा रहा स्वास्थ्य विभाग
स्वास्थ्य विभाग लगातार वर्ष भर ही विवादों में रहा, जिसमें आए ब्लड बेचते हुए फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। विकासखंड बार में महिला गर्भवती महिला की मौत होना। साथ ही जिला अस्पताल की मोर्चरी में सड़ता रहा शव। जिला अस्पताल के अस्थाई कर्मचारी पर अस्पताल परिसर में ही किशोरी के साथ छेड़खानी का आरोप लगा। इन घटनाओं के बावजूद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
फोटो- 17
आंगनबाड़ी कर्मचारियों का आंदोलन बना मुसीबत
ललितपुर। वर्ष के अंत में आंगनबाड़ी कर्मचारियों के आंदोलन ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को तगड़ा झटका दिया गया। विभिन्न मांगों को लेकर आंगनबाड़ी कर्मचारियों ने आंदोलन चलाने के साथ ही अंत के महीनों में लगभग हर रोज धरना-प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि आश्वासन के बाद भी उनकी समस्याओं की ओर ध्यान दिया जा रहा है।