{"_id":"5c7aea6cbdec2217fb332bef","slug":"121551559276-lalitpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"तुवन मंदिर की संपतियों की सुरक्षा को करेंगे अनशन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तुवन मंदिर की संपतियों की सुरक्षा को करेंगे अनशन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तुवन मंदिर की संपत्तियों की सुरक्षा को करेंगे अनशन
ललितपुर। तुवन मंदिर के ट्रस्टी विश्वनाथ दीक्षित ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को देकर तुवन मंदिर की संपत्तियों की सुरक्षा की मांग की है और सुरक्षा नहीं होने की दशा में सात मार्च से घंटाघर पर अनशन की चेतावनी दी है।
ज्ञापन में बताया कि हनुमंतलालजी तुवन मंदिर, सिद्धन, हनुमानधारा धार्मिक एवं परमार्थिक ट्रस्ट रजिस्टर्ड संस्था है, जिसका पंजीकरण 14 फरवरी 1998 को हुआ था। तत्कालीन महंत भगवानदास ने ट्रस्ट डीड में डीएम को संरक्षक बनाया। महंत भगवानदास ने अपने जीवन काल में कोई भी चेला तुवन मंदिर के लिए नामित नहीं किया था। लेकिन उनकी मृत्यु के तीन चार दिन पूर्व से चलने फिरने में लाचार होने पर उन्होंने एक पुजारी को वेतन पर रख लिया था। उन्होंने पुजारी पर गंभीर आरोप लगाए। तहसीलदार न्यायालय द्वारा 29 सितंबर 2017 को उक्त दाखिल खारिज वाद में महंत की वसीयतें अमान्य घोषित कर दीं। ट्रस्टी ने राष्ट्रपति से मंदिर की सभी संपत्तियों सुरक्षा करने की मांग की है।
विज्ञापन
ललितपुर। तुवन मंदिर के ट्रस्टी विश्वनाथ दीक्षित ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को देकर तुवन मंदिर की संपत्तियों की सुरक्षा की मांग की है और सुरक्षा नहीं होने की दशा में सात मार्च से घंटाघर पर अनशन की चेतावनी दी है।
ज्ञापन में बताया कि हनुमंतलालजी तुवन मंदिर, सिद्धन, हनुमानधारा धार्मिक एवं परमार्थिक ट्रस्ट रजिस्टर्ड संस्था है, जिसका पंजीकरण 14 फरवरी 1998 को हुआ था। तत्कालीन महंत भगवानदास ने ट्रस्ट डीड में डीएम को संरक्षक बनाया। महंत भगवानदास ने अपने जीवन काल में कोई भी चेला तुवन मंदिर के लिए नामित नहीं किया था। लेकिन उनकी मृत्यु के तीन चार दिन पूर्व से चलने फिरने में लाचार होने पर उन्होंने एक पुजारी को वेतन पर रख लिया था। उन्होंने पुजारी पर गंभीर आरोप लगाए। तहसीलदार न्यायालय द्वारा 29 सितंबर 2017 को उक्त दाखिल खारिज वाद में महंत की वसीयतें अमान्य घोषित कर दीं। ट्रस्टी ने राष्ट्रपति से मंदिर की सभी संपत्तियों सुरक्षा करने की मांग की है।
विज्ञापन