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शहर में दो दिन से मटमैले पानी की हो रही आपूर्ति
Updated Mon, 08 Oct 2018 01:49 AM IST
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शहर में दो दिन से मटमैले पानी की हो रही आपूर्ति
शहर के कई इलाकों में पाइप लाइन हो रही हैं लीक
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। संक्रामक बीमारियों के दौर में शहरवासी पीला मटमैला पानी पीने के लिए मजबूर हैं। जल संस्थान की आपूर्ति पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया है। कहा जा रहा है कि कई जगहों पर पाइप लाइन लीक हो रही हैं, इसके कारण दूषित पानी की आपूर्ति हो रही है। इसके बाद भी जरूरी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
जल संस्थान ने जलापूर्ति को व्यवस्थित बनाने के लिए शहर को दो भागों में विभाजित कर रखा है। लोअर जोन में मुहल्ला चौबयाना, नदीपुरा, खिरकापुरा, महावीरपुरा, सरदारपुरा, तलैयापुरा, छत्रसालपुरा, चिरोलपुरा आदि शामिल हैं तो अपर जोन में स्टेशन क्षेत्र के मुहल्लों को रखा है। जल संस्थान गोविंद सागर बांध से कच्चा पानी लेकर उसे डोडाघाट स्थित वॉटर फिल्टर ट्रीटमेंट प्लांट में शोधित करता है, जिसकी आपूर्ति टंकियों के माध्यम से समूचे शहर में की जाती है। इसके बाद भी घरों में पीला मटमैला पानी पहुंच रहा है। इस आपूर्ति ने लोगों की चिंता बढ़ाकर रख दी है। विशेषकर तब जब शहर में टाइफाइड का प्रकोप है। नागरिकों ने विभागीय अफसरों पर हीलाहवाली का आरोप लगाया है। हालांकि, विभागीय अफसर इस पानी को सेहत के लिए बिलकुल भी नुकसानदायक नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि बांध का पानी पीला हो गया है। जिस वजह से पीले पानी की आपूर्ति हो रही है।
......
पिछले कुछ दिनों से जलापूर्ति ठीक नहीं हो रही है। घरों में आ रहे पानी का रंग पीला व हरा जैसा है। वर्तमान में संक्रामक बीमारियां फैल रही हैं, जिस कारण इस पानी को पीने से लोग परहेज कर रहे हैं। कई तो इसे उबाल पी रहे हैं।
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रमेश कुशवाहा
नझाई बाजार
जब पानी बर्तनों में भर दिया जाता है तो उसमें सफेद कलर का तरल पदार्थ बर्तन में जम जाता है और पानी का रंग हल्का पीला, मटमेला नजर आता है। यही नहीं, शुरुआती पानी का फेंकना पड़ता है, उसमें बदबू आती है। इसके बाद भी अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
आदित्य विश्वकर्मा, चंडी मंदिर क्षेत्र
यहां हैं लीकेज
ललितेश्वरी देवी मंदिर व पटेल नगर में पाइप लाइन में लीकेज बने हुए हैं, जिससे पानी की बर्बादी हो रही है। वहीं, पानी भी दूषित हो रहा है। हद तो तब हो गई जब वॉटर फिल्टर ट्रीटमेंट प्लांट परिसर में बने आवासों के लिए जो पाइप लाइन बिछाई गई है, उसमें भी लीकेज बना हुआ है। वहीं, लोअर जोन में जलापूर्ति के लिए टंकी बनाई गई है। जिसका नाम सिरोपरि जलाशय रखा गया है। इसके पाइप में लीकेज बना हुआ है। जिससे बड़ी मात्रा में पानी की बर्बादी हो रही है। जिसे अभी तक सुधारा नहीं गया है। इससे लापरवाही का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
कम कराएंगे ब्लीचिंग पाउडर की मात्रा
संक्रामक बीमारियों के मद्देनजर जल शोधन में ब्लीचिंग पाउडर की मात्रा बढ़ा दी गई है। इससे पीला पानी होने की संभावना है। इसकी मात्रा कम करा दी जाएगी।
सुरेश चंद्र, अधिशासी अभियंता
जल संस्थान
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शहर के कई इलाकों में पाइप लाइन हो रही हैं लीक
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। संक्रामक बीमारियों के दौर में शहरवासी पीला मटमैला पानी पीने के लिए मजबूर हैं। जल संस्थान की आपूर्ति पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया है। कहा जा रहा है कि कई जगहों पर पाइप लाइन लीक हो रही हैं, इसके कारण दूषित पानी की आपूर्ति हो रही है। इसके बाद भी जरूरी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
जल संस्थान ने जलापूर्ति को व्यवस्थित बनाने के लिए शहर को दो भागों में विभाजित कर रखा है। लोअर जोन में मुहल्ला चौबयाना, नदीपुरा, खिरकापुरा, महावीरपुरा, सरदारपुरा, तलैयापुरा, छत्रसालपुरा, चिरोलपुरा आदि शामिल हैं तो अपर जोन में स्टेशन क्षेत्र के मुहल्लों को रखा है। जल संस्थान गोविंद सागर बांध से कच्चा पानी लेकर उसे डोडाघाट स्थित वॉटर फिल्टर ट्रीटमेंट प्लांट में शोधित करता है, जिसकी आपूर्ति टंकियों के माध्यम से समूचे शहर में की जाती है। इसके बाद भी घरों में पीला मटमैला पानी पहुंच रहा है। इस आपूर्ति ने लोगों की चिंता बढ़ाकर रख दी है। विशेषकर तब जब शहर में टाइफाइड का प्रकोप है। नागरिकों ने विभागीय अफसरों पर हीलाहवाली का आरोप लगाया है। हालांकि, विभागीय अफसर इस पानी को सेहत के लिए बिलकुल भी नुकसानदायक नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि बांध का पानी पीला हो गया है। जिस वजह से पीले पानी की आपूर्ति हो रही है।
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पिछले कुछ दिनों से जलापूर्ति ठीक नहीं हो रही है। घरों में आ रहे पानी का रंग पीला व हरा जैसा है। वर्तमान में संक्रामक बीमारियां फैल रही हैं, जिस कारण इस पानी को पीने से लोग परहेज कर रहे हैं। कई तो इसे उबाल पी रहे हैं।
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रमेश कुशवाहा
नझाई बाजार
जब पानी बर्तनों में भर दिया जाता है तो उसमें सफेद कलर का तरल पदार्थ बर्तन में जम जाता है और पानी का रंग हल्का पीला, मटमेला नजर आता है। यही नहीं, शुरुआती पानी का फेंकना पड़ता है, उसमें बदबू आती है। इसके बाद भी अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
आदित्य विश्वकर्मा, चंडी मंदिर क्षेत्र
यहां हैं लीकेज
ललितेश्वरी देवी मंदिर व पटेल नगर में पाइप लाइन में लीकेज बने हुए हैं, जिससे पानी की बर्बादी हो रही है। वहीं, पानी भी दूषित हो रहा है। हद तो तब हो गई जब वॉटर फिल्टर ट्रीटमेंट प्लांट परिसर में बने आवासों के लिए जो पाइप लाइन बिछाई गई है, उसमें भी लीकेज बना हुआ है। वहीं, लोअर जोन में जलापूर्ति के लिए टंकी बनाई गई है। जिसका नाम सिरोपरि जलाशय रखा गया है। इसके पाइप में लीकेज बना हुआ है। जिससे बड़ी मात्रा में पानी की बर्बादी हो रही है। जिसे अभी तक सुधारा नहीं गया है। इससे लापरवाही का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
कम कराएंगे ब्लीचिंग पाउडर की मात्रा
संक्रामक बीमारियों के मद्देनजर जल शोधन में ब्लीचिंग पाउडर की मात्रा बढ़ा दी गई है। इससे पीला पानी होने की संभावना है। इसकी मात्रा कम करा दी जाएगी।
सुरेश चंद्र, अधिशासी अभियंता
जल संस्थान