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शिशुओं के पोषण को स्वास्थ्य विभाग ने दी एडवाईजरी
Updated Sat, 05 May 2018 01:36 AM IST
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शिशुओं के पोषण को स्वास्थ्य विभाग ने दी एडवाईजरी
छह माह की अवधि पर सही पोषण की जरूरत
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा शिशुओं के स्वस्थ रहने के लिए पोषण देने के लिए एडवाईजरी जारी की है। इसके तहत पोषण से शरीर को संक्रमण, विकलांगता, बीमारियों और मृत्यु की संभावना को कम करके शिशुओं के विकास की नींव रखी जाती है। चिकित्सकों ने छह माह पर पूरक आहार की शुरुआत और सही पोषण देने का सुझाव दिया है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा शिशुओं के पोषण के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए बताया कि पोषण का सीधा संबंध जीवन, विकास और तंदरुस्ती से है। यदि यही ध्यान गर्भावस्था की शुरुआत होने पर बच्चे के जन्म के फौरन बाद व बच्चे के छह माह की अवधि पर सही पोषण उपलब्ध कराएं तो बच्चे को पोषण की कमी नहीं होगी। चिकित्सकों ने बताया कि यदि बच्चे के जन्म के एक घंटे के अंदर मां का पहला गाढ़ा दूध पिलाया जाता है, तो ऐसे बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और जब यही मां का दूध लगातार छह महीने तक बच्चे को लगातार बिना किसी अन्य पेय पदार्थ जैसे पानी, घुट्टी, शहद, गाय या भैंस का दूध के दिया जाता रहे तो यह बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए संपूर्ण आहार के रूप में काम करता है। बच्चा छह माह का होने पर बच्चा तीव्रता के साथ बढ़ता है और उसे अतिरिक्त पोषण की जरूरत होती है, जिसमें भोजन व विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ अनाज, दालें, दूूध, दूध से बने उत्पाद, तफल और हरी सब्जियां देना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार नवजात शिशुओं को स्तनपान के साथ ही छह माह की उम्र में पूरक आहार शुरू कर देना चाहिए। शुरुआत के छह-आठ माह महीनों के बीच में बच्चे को दो से तीन बार और नौ से 11 माह व 12 से 14 माह के बीच बच्चे को रोजाना तीन से चार बार भोजन कराना चाहिए। साथ ही इसी अवधि में बच्चे को दिन में एक से दो बार अतिरिक्त पौष्टिक नाश्ता भी शामिल करना चाहिए। जिला महिला चिकित्सालय के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. राज नारायण ने कहा कि छह माह के बाद जब बच्चे का शरीर बढ़ता है, तो उसको पोषण की आवश्यकता होती है। पहले के समय में चिकित्सक छह माह के बच्चों को तरल पदार्थ देने के लिए सलाह देते थे, लेकिन तरल पदार्थ में उतना पोषण नहीं होता था। इसके कारण बच्चा कमजोर हो जाता था। फिर बाद में बच्चों को शरीर की आवश्यकता अनुसार अर्द्ध ठोस आहार देने की सलाह दी गई। यह भी कम से कम पांच से दह बार देना चाहिए या फिर जब बच्चा मांगे। छह माह के बाद अर्द्ध ठोस आहार देने को नहीं दिया जाता है, तो बच्चा कमजोर हो जाता है, जिससे उसकी प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है ओर उससे कई बीमारियां होने लगती हैं।
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छह माह की अवधि पर सही पोषण की जरूरत
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा शिशुओं के स्वस्थ रहने के लिए पोषण देने के लिए एडवाईजरी जारी की है। इसके तहत पोषण से शरीर को संक्रमण, विकलांगता, बीमारियों और मृत्यु की संभावना को कम करके शिशुओं के विकास की नींव रखी जाती है। चिकित्सकों ने छह माह पर पूरक आहार की शुरुआत और सही पोषण देने का सुझाव दिया है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा शिशुओं के पोषण के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए बताया कि पोषण का सीधा संबंध जीवन, विकास और तंदरुस्ती से है। यदि यही ध्यान गर्भावस्था की शुरुआत होने पर बच्चे के जन्म के फौरन बाद व बच्चे के छह माह की अवधि पर सही पोषण उपलब्ध कराएं तो बच्चे को पोषण की कमी नहीं होगी। चिकित्सकों ने बताया कि यदि बच्चे के जन्म के एक घंटे के अंदर मां का पहला गाढ़ा दूध पिलाया जाता है, तो ऐसे बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और जब यही मां का दूध लगातार छह महीने तक बच्चे को लगातार बिना किसी अन्य पेय पदार्थ जैसे पानी, घुट्टी, शहद, गाय या भैंस का दूध के दिया जाता रहे तो यह बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए संपूर्ण आहार के रूप में काम करता है। बच्चा छह माह का होने पर बच्चा तीव्रता के साथ बढ़ता है और उसे अतिरिक्त पोषण की जरूरत होती है, जिसमें भोजन व विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ अनाज, दालें, दूूध, दूध से बने उत्पाद, तफल और हरी सब्जियां देना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार नवजात शिशुओं को स्तनपान के साथ ही छह माह की उम्र में पूरक आहार शुरू कर देना चाहिए। शुरुआत के छह-आठ माह महीनों के बीच में बच्चे को दो से तीन बार और नौ से 11 माह व 12 से 14 माह के बीच बच्चे को रोजाना तीन से चार बार भोजन कराना चाहिए। साथ ही इसी अवधि में बच्चे को दिन में एक से दो बार अतिरिक्त पौष्टिक नाश्ता भी शामिल करना चाहिए। जिला महिला चिकित्सालय के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. राज नारायण ने कहा कि छह माह के बाद जब बच्चे का शरीर बढ़ता है, तो उसको पोषण की आवश्यकता होती है। पहले के समय में चिकित्सक छह माह के बच्चों को तरल पदार्थ देने के लिए सलाह देते थे, लेकिन तरल पदार्थ में उतना पोषण नहीं होता था। इसके कारण बच्चा कमजोर हो जाता था। फिर बाद में बच्चों को शरीर की आवश्यकता अनुसार अर्द्ध ठोस आहार देने की सलाह दी गई। यह भी कम से कम पांच से दह बार देना चाहिए या फिर जब बच्चा मांगे। छह माह के बाद अर्द्ध ठोस आहार देने को नहीं दिया जाता है, तो बच्चा कमजोर हो जाता है, जिससे उसकी प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है ओर उससे कई बीमारियां होने लगती हैं।
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