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अलाव के सहारे रात काटते तीमारदार
Updated Wed, 03 Jan 2018 02:09 AM IST
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अलाव के सहारे रात काटते तीमारदार
ललितपुर। जिला चिकित्सालय में तीमारदार अलाव के सहारे रात काटने को विवश हैं। अस्पताल के अंदर तीमारदार गर्म कपड़े व विस्तर लेकर पहुंच रहे हैं। परिसर में बने रैनबसेरा में ठंड से बचने के कोई इंतजाम नहीं हैं। इन हालात में रात काटना मुश्किल हो रहा है।
जिला चिकित्सालय पर पूरे जनपद के लोग इलाज के लिए आते हैं। दो दिन से पड़ रही सर्दी ने लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है। आलम यह है कि अस्पताल के रैन बसेरे में न तो ओढ़ने के लिए कंबलों की व्यवस्था है और न ही जमीन पर बिछाने के लिए चटाई की व्यवस्था है। ऐसे में मरीजों को ठिठुरन से राहत के लिए स्वयं की व्यवस्था के भरोसे रहना पड़ रहा है। विशेष परिस्थितियों में आने वाले मरीज के तीमारदारों को पूरी रात अलाव के सहारे गुजारनी पड़ रही है। गौरतलब हो कि जिला चिकित्सालय में दो रैन बसेरा हैं। इनमें अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई है। दोनों ही रैन बसेरों में न तो कंबल है और न ही चटाई है। अपने साथ गर्म कपड़े लाने वाले तीमारदार ही इस रैनबसेरे की सुविधा ले पा रहे हैं। शहर के अन्य स्थानों पर भी पर्याप्त अलाव की व्यवस्था न होने से लोग सर्दी से ठिठुर रहे हैं। सुबह जहां कोहरे की चादर और रात में ठंडी हवाओं ने मुश्किल पैदा कर दी है।
अस्पताल प्रशासन की ओर से तीमारदारों के लिए कोई व्यवस्था नहीं की जाती है। मरीज के साथ रहने के लिए एक व्यक्ति को ही अनुमति होती है। रैनबसेरा में एक ही अलाव लगवाया गया। ऐसे में मरीज के साथ एक से अधिक लोग आने पर उन्हें रैनबसेरा में रुकने को जगह दे दी जाती है। तीमारदार अपनी व्यवस्था के साथ ही ठंड से भी बचाव करते हैं।
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एसके वासवानी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला चिकित्सालय
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ललितपुर। जिला चिकित्सालय में तीमारदार अलाव के सहारे रात काटने को विवश हैं। अस्पताल के अंदर तीमारदार गर्म कपड़े व विस्तर लेकर पहुंच रहे हैं। परिसर में बने रैनबसेरा में ठंड से बचने के कोई इंतजाम नहीं हैं। इन हालात में रात काटना मुश्किल हो रहा है।
जिला चिकित्सालय पर पूरे जनपद के लोग इलाज के लिए आते हैं। दो दिन से पड़ रही सर्दी ने लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है। आलम यह है कि अस्पताल के रैन बसेरे में न तो ओढ़ने के लिए कंबलों की व्यवस्था है और न ही जमीन पर बिछाने के लिए चटाई की व्यवस्था है। ऐसे में मरीजों को ठिठुरन से राहत के लिए स्वयं की व्यवस्था के भरोसे रहना पड़ रहा है। विशेष परिस्थितियों में आने वाले मरीज के तीमारदारों को पूरी रात अलाव के सहारे गुजारनी पड़ रही है। गौरतलब हो कि जिला चिकित्सालय में दो रैन बसेरा हैं। इनमें अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई है। दोनों ही रैन बसेरों में न तो कंबल है और न ही चटाई है। अपने साथ गर्म कपड़े लाने वाले तीमारदार ही इस रैनबसेरे की सुविधा ले पा रहे हैं। शहर के अन्य स्थानों पर भी पर्याप्त अलाव की व्यवस्था न होने से लोग सर्दी से ठिठुर रहे हैं। सुबह जहां कोहरे की चादर और रात में ठंडी हवाओं ने मुश्किल पैदा कर दी है।
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अस्पताल प्रशासन की ओर से तीमारदारों के लिए कोई व्यवस्था नहीं की जाती है। मरीज के साथ रहने के लिए एक व्यक्ति को ही अनुमति होती है। रैनबसेरा में एक ही अलाव लगवाया गया। ऐसे में मरीज के साथ एक से अधिक लोग आने पर उन्हें रैनबसेरा में रुकने को जगह दे दी जाती है। तीमारदार अपनी व्यवस्था के साथ ही ठंड से भी बचाव करते हैं।
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एसके वासवानी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला चिकित्सालय