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विद्यालय प्रबंध समितियों का होगा पुनर्गठन, चुनाव को बजेगी डुगडुगी
Updated Mon, 17 Sep 2018 01:40 AM IST
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विद्यालय प्रबंध समितियों का होगा पुनर्गठन
चुनाव की बजी डुगडुगी
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जिले के परिषदीय प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में गठित प्रबंध समितियों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इसे ध्यान में रखकर इनके पुनर्गठन का निर्णय लिया गया है। विभागीय अफसर चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं।
नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियमावली 2011 के अनुसार नवीन विद्यालय प्रबंध समितियों का गठन निष्पक्ष तरीके से किया जाता है। पूर्व से गठित समितियों का दो वर्षीय कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इसके मद्देनजर इनके पुनर्गठन का फैसला किया गया है। चुनी गई समिति के अध्यक्ष का नाम, समिति के सचिव के साथ बैंक खातों में दर्ज कराया जाता है। इसी खाते से विद्यालय विकास सहित विभिन्न मदों की धनराशि व्यय की जाती है।
ये हैं निर्देश
विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों की कुल संख्या के कम से कम पचास प्रतिशत बच्चों के माता-पिता/ सरंक्षकों की उपस्थिति में विद्यालय प्रबंध समिति का चयन किया जाए। कोरम को पूरा कराने का दायित्व प्रधानाध्यापक का होगा। विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों के माता-पिता/संरक्षक ही समिति के सदस्य बनने के पात्र होंगे। बच्चे के अनाथ होने की स्थिति में संरक्षक भी एसएमसी सदस्य के लिए पात्र होंगे। विद्यालय प्रबंध समिति के चयनित सदस्यों में से एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष का चयन होगा। समिति में 50 प्रतिशत महिलाएं अवश्य होंगी। इनमें अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष में एक महिला अवश्य हो। अध्यक्ष का कार्यकाल दो वर्षीय होगा। शिक्षा मित्रों, रसोइयों व शिक्षा विभाग में कार्यरत व्यक्तियों को सदस्य सचिव के अतिरिक्त सदस्य नहीं बनाया जाएगा। शासन के प्रमुख सचिव सुनील कुमार ने सितंबर माह में गठन की कार्रवाई पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। इसमें कहा गया कि विद्यालय प्रबंध समिति का गठन सभी अभिभावकों की खुली बैठक में किया जाएगा। यदि चुनाव में आम सहमति नहीं बने तो हाथ उठाकर बहुमत के आधार पर चयन कराया जाए। खुली बैठक ग्राम प्रधान या प्रधान द्वारा नामित ग्राम पंचायत सदस्य/ नगर/ जिला पंचायत अध्यक्ष द्वारा नामित नगर/ जिला पंचायत सदस्य की उपस्थिति में कराई जाएगी। विवाद की स्थिति में खंड शिक्षा अधिकारी की मौजूदगी में गोपनीय मतदान से समस्या का निराकरण कराया जाएगा। प्रधानाध्यापक का दायित्व होगा कि विद्यालय में अध्ययनरत प्रत्येक छात्र की नोटबुक/कापी, पर्ची में खुली बैठक की तिथि अंकित कर बच्चों के माता-पिता/ संरक्षकों को सूचना दें। उधर, राज्य परियोजना निदेशक सर्व शिक्षा अभियान डा. वेदपति मिश्र ने नव गठित विद्यालय प्रबंध समिति को एक अक्तूबर से क्रियाशील बनाने के निर्देश दिए हैं।
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चुनाव की तिथियां हुई तय
चुनाव के लिए तिथियां तय कर दी गई हैं, साथ ही तहसीलदार, बीडीओ, सीडीपीओ की ड्यूटी लगाई गई हैं। जिनकी देखरेख में चुनाव की प्रक्रिया संपन्न होगी।
ब्रजेश सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी नगर
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चुनाव की बजी डुगडुगी
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जिले के परिषदीय प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में गठित प्रबंध समितियों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इसे ध्यान में रखकर इनके पुनर्गठन का निर्णय लिया गया है। विभागीय अफसर चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं।
नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियमावली 2011 के अनुसार नवीन विद्यालय प्रबंध समितियों का गठन निष्पक्ष तरीके से किया जाता है। पूर्व से गठित समितियों का दो वर्षीय कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इसके मद्देनजर इनके पुनर्गठन का फैसला किया गया है। चुनी गई समिति के अध्यक्ष का नाम, समिति के सचिव के साथ बैंक खातों में दर्ज कराया जाता है। इसी खाते से विद्यालय विकास सहित विभिन्न मदों की धनराशि व्यय की जाती है।
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ये हैं निर्देश
विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों की कुल संख्या के कम से कम पचास प्रतिशत बच्चों के माता-पिता/ सरंक्षकों की उपस्थिति में विद्यालय प्रबंध समिति का चयन किया जाए। कोरम को पूरा कराने का दायित्व प्रधानाध्यापक का होगा। विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों के माता-पिता/संरक्षक ही समिति के सदस्य बनने के पात्र होंगे। बच्चे के अनाथ होने की स्थिति में संरक्षक भी एसएमसी सदस्य के लिए पात्र होंगे। विद्यालय प्रबंध समिति के चयनित सदस्यों में से एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष का चयन होगा। समिति में 50 प्रतिशत महिलाएं अवश्य होंगी। इनमें अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष में एक महिला अवश्य हो। अध्यक्ष का कार्यकाल दो वर्षीय होगा। शिक्षा मित्रों, रसोइयों व शिक्षा विभाग में कार्यरत व्यक्तियों को सदस्य सचिव के अतिरिक्त सदस्य नहीं बनाया जाएगा। शासन के प्रमुख सचिव सुनील कुमार ने सितंबर माह में गठन की कार्रवाई पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। इसमें कहा गया कि विद्यालय प्रबंध समिति का गठन सभी अभिभावकों की खुली बैठक में किया जाएगा। यदि चुनाव में आम सहमति नहीं बने तो हाथ उठाकर बहुमत के आधार पर चयन कराया जाए। खुली बैठक ग्राम प्रधान या प्रधान द्वारा नामित ग्राम पंचायत सदस्य/ नगर/ जिला पंचायत अध्यक्ष द्वारा नामित नगर/ जिला पंचायत सदस्य की उपस्थिति में कराई जाएगी। विवाद की स्थिति में खंड शिक्षा अधिकारी की मौजूदगी में गोपनीय मतदान से समस्या का निराकरण कराया जाएगा। प्रधानाध्यापक का दायित्व होगा कि विद्यालय में अध्ययनरत प्रत्येक छात्र की नोटबुक/कापी, पर्ची में खुली बैठक की तिथि अंकित कर बच्चों के माता-पिता/ संरक्षकों को सूचना दें। उधर, राज्य परियोजना निदेशक सर्व शिक्षा अभियान डा. वेदपति मिश्र ने नव गठित विद्यालय प्रबंध समिति को एक अक्तूबर से क्रियाशील बनाने के निर्देश दिए हैं।
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चुनाव की तिथियां हुई तय
चुनाव के लिए तिथियां तय कर दी गई हैं, साथ ही तहसीलदार, बीडीओ, सीडीपीओ की ड्यूटी लगाई गई हैं। जिनकी देखरेख में चुनाव की प्रक्रिया संपन्न होगी।
ब्रजेश सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी नगर