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धनतेरस आज, भगवान धनवंतरि और कुबेर की होगी पूजा

Mon, 05 Nov 2018 02:08 AM IST
Updated Mon, 05 Nov 2018 02:08 AM IST
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धनतेरस आज, भगवान धनवंतरि और कुबेर की होगी पूजा
धनतेरस आज, भगवान धनवंतरि और कुबेर की होगी पूजा
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शुभ मुहूर्त में कर सकेंगे वाहनों और आभूषणों की खरीदारी
मंगल को हनुमान जयंती, बुधवार को मनाया जाएगा दीपावली पर्व
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। दीपावली पर्व का शुभारंभ सोमवार को धनतेरस से शुरू होगा। धनतेरस पर लोग तीन चरणों में शुभ मुहूर्त में वाहनों, आभूषणों, बर्तन और अन्य सामग्री की खरीदारी कर सकेंगे। कल मंगलवार को नरक चतुर्दशी और हनुमान जयंती एवं बुधवार को भव्य दीपों का पर्व महालक्ष्मी दीपावली मनाई जाएगी। इसके बाद बृहस्पतिवार को चतुर्थ दिन गोवर्धन पूजा, अन्नकूट महोत्सव और पांचवें दिन भातृ द्वितीया का पर्व मनाया जाएगा, जो बुंदेलखंड में विशेष महत्व रखता है।
डॉ. ओमप्रकाश शास्त्री ने जानकारी देेते हुए बताया कि पांच दिवसीय दीपावली पर्व का शुभारंभ कल सोमवार को धनतेरस के दिन से शुरू हो रहा है। धनवंतरि को हिंदू धर्म में देवताओं का वैद्य माना जाता है। यह एक महान चिकित्सक थे, जिन्हें देव पद प्राप्त हुआ था। शास्त्रों के अनुसार यह भगवान विष्णु के अवतार समझे जाते हैं, इनका पृथ्वी लोक में अवतरण समुद्र मंथन के समय हुआ था। कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को धन्वंतरि जयंती मनाई जाती है। धन्वंतरि जयंती से शुरू हुआ दीपावली पर्व पांच दिन चलता है। प्रथम दिन में धन्वंतरि जयंती, द्वितीय दिन नरक चतुर्दशी, तृतीय दिन अमावस्या को दीपावली के पर्व पर भगवती महालक्ष्मी जी के पूजन का दिन होता है। इस वर्ष पांच नबंवर दिन सोमवार को धन्वंतरि जयंती है। इसी दिन आयुर्वेद का प्रारंभ भी होना माना जाता है। धन्वंतरि भगवान विष्णु का रुप भी माना जाता है, इनकी चार भुजाएं हैं, शंख, चक्र, गदा, और पदमा धारण किए हुए हैं। इनकी चारों भुजाओं में से एक भुजा में औषधि और दूसरे में अमृत कलश लिए हुए हैं। इन्हें आयुर्वेद चिकित्सा का जनक माना जाता है। उन्होंने ही अमृत में औषधियों की खोज की थी। इनको ही शल्य चिकित्सा का विश्व जनक माना जाता है। दीपावली के एक दिन पूर्व नरक चतुर्दशी होती है। इस वर्ष धनतेरस के दिन धन्वंतरि जयंती में मध्यान्ह बारह बजे भगवान धन्वंतरि का पूजन एवं हवन का विधान किया जाएगा। सायंकाल सूर्यास्त के पश्चात भगवान कुबेर की पूजा कर घर के दरवाजे पर दीपदान करना चाहिए। इसके अगले दिन चतुर्दशी मंगलवार को हनुमान जयंती महोत्सव पर्व है। त्रेता युग में कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को भगवान श्री हनुमानजी का अवतार हुआ था, इसी दिन प्रात:काल में हनुमानजी का पूजन और हवन का आयोजन श्रेष्ठ माना जाता है। इसी दिन सायंकाल दरिद्र नि:सारण्सा की क्रिया करते हुए दीपदान व भगवती महाकाली की पूजा का भी प्रावधान है और चतुर्दशी को सायंकाल दीपदान किया जाता है। इसके बाद तीसरे दिन बुधवार को अमावस्या के दिन सात नवंबर को दीपावली महोत्सव होगा।
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आभूषण व सामग्री खरीदारी के लिए शुभ रहेगा यह मुहूर्त
वस्तुओं की खरीदारी के लिए परंपरानुसार लोक परंपरा में धनतेरस के दिन खरीदारी करने का शुभ मुहूर्त माना जाता है। इस वर्ष हस्त नक्षत्र सोमवार को धनतेरस है। सुबह आठ से दोपहर 12 बजे तक दोपहर में दो बजे से पांच बजे तक और शाम को सात बजे से रात्रि आठ बजे तक के शुभ मुहूर्त में इक्षित वस्तुओं, वाहनों व आभूषणों की खरीदारी की जा सकेगी। इस दिन सायंकाल में देहरी द्वार पर द्वार देवताओं के सम्मान में दो दीपक का पूजन कर स्थापित किए जाएंगे और इसी दिन से पांच दिवसीय दीपावली महोत्सव का शुभारंभ होगा।
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