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कृषि: कालिदास बनकर किसान अपने खेतों को कर रहे बर्बाद

Mon, 16 Apr 2018 01:44 AM IST
Updated Mon, 16 Apr 2018 01:44 AM IST
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कृषि: कालिदास बनकर किसान अपने खेतों को कर रहे बर्बाद
‘कालिदास’ बनकर अपने खेतों को कर रहे बर्बाद
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फसल के अवशेष जलाने से मिट्टी के सूक्ष्म जीव हो रहे नष्ट
अवशेष मिट्टी में दबा दिए जाएं तो बढ़ सकती है उर्वरा शक्ति
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
एक ओर खेतों की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के प्रयास हो रहे हैं। वहीं, किसान अपने खेतों में खड़े फसल के अवशेषों को जलाकर मिट्टी में रहने वाले जीवों को नष्ट कर रहे हैं। इसमें कुछ हद तक हार्वेस्टर भी जिम्मेदार हैं। यदि वह फसल को पूरी तरह काट दें तो यह स्थिति पैदा ही नहीं होगी। लेकिन ऐसा नहीं कर फसल के अवशेषों को खेतों में यूं ही छोड़ा जा रहा है। इसके किसान उन्हें जलाने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
बदले दौर में किसान हाड़तोड़ मेहनत से कतराने लगा है। जहां पहले किसान खुद खेतों में खड़ी फसल को काटते थे, अब वह हार्वेस्टर पर निर्भर होकर रह गए हैं। इस दौरान हार्वेस्टर संचालक भी जल्दी फसल की कटाई के चक्कर में उसके आधे अवशेष खेतों में ही छोड़ देते हैं। जिन्हें किसान बाद में आग लगाकर नष्ट करते हैं। ऐसा ही मामला तहसील ललितपुर के ग्राम नदनवारा व रजवारा में देखने को मिला है। जहां किसानों ने फसल के अवशेषों को जलाकर नष्ट कर दिया है। जबकि किसानों को फसलों के अवशेष को जलाने की जगह उसे मिट्टी के नीचे दबा देना चाहिए था। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक यदि कृषि के अवशेष को मिट्टी में दबाकर सड़ा दिया तो इससे खेत की मिट्टी की कई गुना उर्वरा बढ़ जाती है। ऐसे में किसानों को फसल उत्पादन में रासायनिक उर्वरकों का भी कम प्रयोग करना पड़ेगा। खेतों में फसल के अवशेषों को जलाना काफी घातक है। अवशेष जलने से खेत की मिट्टी में मौजूद उर्वरा शक्ति नष्ट हो जाती है साथ ही मिट्टी की ऊपरी परत झुलस जाती है, जिससे मिट्टी को उर्वर बनाने वाले कीड़ों की मौत हो जाती है। इसका सीधा असर फसलों के उत्पादन पर पड़ता है। खेत में कितना भी रासायनिक उवर्रक डाला जाए, लेकिन वह पहले जैसी उर्वरा मिट्टी नहीं बना पाता है। इस स्थिति में न ही फसल उग पाती है और न ही बाग बगीचे ही तैयार हो पाते हैं।
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पर्यावरण प्रदूषण का भी खतरा
गेहूं और अन्य फसल के अवशेष बड़ी मात्रा में जलाने से पर्यावरण प्रदूषण का भी खतरा बना जाता है। किसानों की अनभिज्ञता के कारण आम लोगों को भी पर्यावरण प्रदूषण से बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है।
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जुर्माना का है प्रावधान
राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण ने किसानों की अज्ञानता से उत्पन्न हो रही इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए खेतों में अवशेष जलाने पर जुर्माने का प्राविधान किया गया है। कई प्रदेशों में यह समस्या विकराल रूप ले चुकी है, जिससे वहां सांस की दिक्कत आम लोगों को उत्पन्न होने लगी है।

ऐसे बढ़ाएं खेत की उर्वरक शक्ति
किसान खेतों में गेहूं व अन्य फसलों का अवशेष न जलाएं। बल्कि खेत की जुताई कर खेत में पर्याप्त मात्रा में पानी भर दें। ऐसा करने से किसान न सिर्फ पर्यावरण बेहतरी में सहयोग करेंगे, बल्कि अपने खेत की मिट्टी को भरपूर उर्वराशक्ति वाला भी बना सकेंगे।


जांच कराकर की जाएगी कार्रवाई
हार्वेस्टर द्वारा खेतों में अवशेष छोड़ने का मामला संज्ञान में नहीं हैं। नियम के अनुसार संचालक को हार्वेस्टर के साथ रीपर को लगाना चाहिए, जिससे कि अवशेष खेतों में नहीं छूट सके। यदि इस तरह की जानकारी मिलती है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
सदानंद चौधरी
जिला कृषि अधिकारी
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