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डूब क्षेत्र में बना डालीं सरकारी इमारतें
Updated Tue, 11 Jul 2017 09:31 PM IST
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डूब क्षेत्र में बना डालीं सरकारी इमारतें
ललितपुर।
शहर में गोविंद सागर बांध के डूब क्षेत्र में लोगों ने अपने मकान बना डाले तथा समय-समय पर बारिश के मौसम में उन्होंने इसका खामियाजा भी उठाया। अफसर इसे अतिक्रमण मानते हैं, पर जब हम इसी डूब क्षेत्र में बनी कांशीराम आवासीय कालोनी व सेवा योजन कार्यालय की इमारत को देखते हैं तो यह सोचने पर मजबूर हो जाते हैं इन सरकारी भवनों के निर्माण की अनुमति सरकार ने आखिर किस बिना पर दे दी।
इन सरकारी भवनों को देखकर डूब क्षेत्र में ही अब प्राइवेट प्लॉटिंग भी की जाने लगी है। कांशीराम कालोनी के पास ही डूब क्षेत्र में गोकुल धाम सोसायटी समेत कई स्थानों पर प्लाटिंग की जा रही है। शहर में गोविंद सागर बांध का पानी ओवरफ्लो होने पर शहजाद बांध में पहुंचाने लिए शहर के बीच से निकली शहजाद नदी से निकाला जाता है। इसके लिए बांध में 12 गेट बनाए गए हैं, जो महीनों के रोस्टर के हिसाब से पानी संरक्षित कर खोले जाते हैं। इसके अलावा पानी ज्यादा हो जाने पर स्वत: चलने वाले साइफन फैन भी लगाए गए हैं। शहर में शहजाद नदी के डूब क्षेत्र में प्रशासन ने ही सरकारी आवासीय कालोनियां और ऑफिस बना दिए हैं, इससे बिल्डरों के हौसले बुलंद हैं। गोविंद नगर क्षेत्र में बनी आवासीय कांशीराम आवास कालोनी नदी के डूब क्षेत्र में बनी हुई हैं। वहीं, सेवायोजन विभाग का ऑफिस भी डूब क्षेत्र में बनाया गया है। गौरतलब हो कि तीन साल पहले बारिश अधिक होने के कारण और बांध का जलस्तर बढ़ जाने के कारण साइफन फैन चालू हो गए थे। इसके बाद कांशीराम कालोनी की एक मंजिल तक डूब गई थी। इसके अलावा सेवायोजन कार्यालय भी पूरी तरह डूब गया था। इस बाढ़ से कांशीराम कालोनी के पिलर क्षतिग्रस्त हो गए थे। इसके अलावा कालोनी में पेयजल सप्लाई के लिए बनाई गई टंकी भी नीचे से पूरी तरह खोखली हो चुकी है। पास में ही बने सेवायोजन कार्यालय की बाउंड्रीवाल भी पानी के दबाव को नहीं झेल सकी और धराशायी हो चुकी है। इसके अलावा दीवारों पर पानी की टक्कर से कालोनी और कार्यालय की दीवारें कमजोर हो गई हैं। स्थानीय निवासी बताते हैं कि 2013 में साइफन खुलने के बाद कालोनी की पूरी एक मंजिल डूब गई थी। लोगों को बड़ी मशक्कत के बाद निकाला जा सका था। इसके बाद कालोनी के कमजोर हो चुके पिलर को कुछ सरकारी मदद और स्वयं खर्च करके लोगों ने फिर से बनवाया था। जब प्रशासन ने ही मानक के विपरीत आवासीय कालोनी का निर्माण कर दिया है तो निजी मकानों को बनाने से कैसे रोक पाएंगे। कांशीराम आवास कालोनी के पास नदी में मोड़ होने के कारण पानी सीधा कालोनी में चला जाता है। इसके अलावा कालोनी के पास ही गोकुलधाम सोसायटी की प्लाटिंग होने के कारण नदी की ओर दीवार बना दी गई है।
लोगों से बात
फोटो- 07
सामान्य रूप से गेट खुलने पर भी कालोनी में पानी आ जाता है। प्रशासन ने कालोनी बनाते समय मानकों को ध्यान में न रखकर स्थान का चयन किया है। हर साल बारिश के मौसम में जान का खतरा बना रहता है। तीन साल पहले आई बाढ़ का स्मरण आते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
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इदरीश,
फोटो- 08
कालोनी के पास ही गोकुल धाम सोसायटी की प्लाटिंग की जा रही है। सामान्य रूप से गेट खोले जाने पर इस प्लाट के आधे मैदान से पानी बहता है। अब नदी की ओर डूब क्षेत्र में दीवार बना दी गई है। इससे पूरा पानी कांशीराम कालोनी में ही आएगा।
शहवाज खान
फोटो- 09
जब प्रशासन ने ही मानकों की अनदेेखी कर इतनी बड़ी आवासीय कालोनी खड़ी कर दी तो प्राइवेट बिल्डरों को कैसे रोकेंगे। इस कारण ही डूब क्षेत्र में अवैध रूप से पक्के मकान बनाए जा रहे हैं। हम लोगों को हुई परेशानी से प्रशासन को क्या मतलब।
समीर
फोटो- 10
नदी में मोड़ होने के कारण तेजी से आने वाला पानी सीधे कांशीराम कालोनी में ही घुसता है। हर साल हम लोगों को परेशानी होती है। पास में दी दीवार बना देने के कारण अब पानी और प्रेेशर के साथ कालोनी में घुसेगा। हम लोगों को ही परेशानी होगी।
रहीश खान
वर्जन
सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देशित करेंगे कि मामले की पड़ताल करें। यदि नियम विरुद्ध काम हो रहा है तो उनको चिह्नित करें। कालोनी वासियों की चिंता दूर करने का पूरा प्रयास किया जाएगा।
मानवेंद्र सिंह, डीएम
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ललितपुर।
शहर में गोविंद सागर बांध के डूब क्षेत्र में लोगों ने अपने मकान बना डाले तथा समय-समय पर बारिश के मौसम में उन्होंने इसका खामियाजा भी उठाया। अफसर इसे अतिक्रमण मानते हैं, पर जब हम इसी डूब क्षेत्र में बनी कांशीराम आवासीय कालोनी व सेवा योजन कार्यालय की इमारत को देखते हैं तो यह सोचने पर मजबूर हो जाते हैं इन सरकारी भवनों के निर्माण की अनुमति सरकार ने आखिर किस बिना पर दे दी।
इन सरकारी भवनों को देखकर डूब क्षेत्र में ही अब प्राइवेट प्लॉटिंग भी की जाने लगी है। कांशीराम कालोनी के पास ही डूब क्षेत्र में गोकुल धाम सोसायटी समेत कई स्थानों पर प्लाटिंग की जा रही है। शहर में गोविंद सागर बांध का पानी ओवरफ्लो होने पर शहजाद बांध में पहुंचाने लिए शहर के बीच से निकली शहजाद नदी से निकाला जाता है। इसके लिए बांध में 12 गेट बनाए गए हैं, जो महीनों के रोस्टर के हिसाब से पानी संरक्षित कर खोले जाते हैं। इसके अलावा पानी ज्यादा हो जाने पर स्वत: चलने वाले साइफन फैन भी लगाए गए हैं। शहर में शहजाद नदी के डूब क्षेत्र में प्रशासन ने ही सरकारी आवासीय कालोनियां और ऑफिस बना दिए हैं, इससे बिल्डरों के हौसले बुलंद हैं। गोविंद नगर क्षेत्र में बनी आवासीय कांशीराम आवास कालोनी नदी के डूब क्षेत्र में बनी हुई हैं। वहीं, सेवायोजन विभाग का ऑफिस भी डूब क्षेत्र में बनाया गया है। गौरतलब हो कि तीन साल पहले बारिश अधिक होने के कारण और बांध का जलस्तर बढ़ जाने के कारण साइफन फैन चालू हो गए थे। इसके बाद कांशीराम कालोनी की एक मंजिल तक डूब गई थी। इसके अलावा सेवायोजन कार्यालय भी पूरी तरह डूब गया था। इस बाढ़ से कांशीराम कालोनी के पिलर क्षतिग्रस्त हो गए थे। इसके अलावा कालोनी में पेयजल सप्लाई के लिए बनाई गई टंकी भी नीचे से पूरी तरह खोखली हो चुकी है। पास में ही बने सेवायोजन कार्यालय की बाउंड्रीवाल भी पानी के दबाव को नहीं झेल सकी और धराशायी हो चुकी है। इसके अलावा दीवारों पर पानी की टक्कर से कालोनी और कार्यालय की दीवारें कमजोर हो गई हैं। स्थानीय निवासी बताते हैं कि 2013 में साइफन खुलने के बाद कालोनी की पूरी एक मंजिल डूब गई थी। लोगों को बड़ी मशक्कत के बाद निकाला जा सका था। इसके बाद कालोनी के कमजोर हो चुके पिलर को कुछ सरकारी मदद और स्वयं खर्च करके लोगों ने फिर से बनवाया था। जब प्रशासन ने ही मानक के विपरीत आवासीय कालोनी का निर्माण कर दिया है तो निजी मकानों को बनाने से कैसे रोक पाएंगे। कांशीराम आवास कालोनी के पास नदी में मोड़ होने के कारण पानी सीधा कालोनी में चला जाता है। इसके अलावा कालोनी के पास ही गोकुलधाम सोसायटी की प्लाटिंग होने के कारण नदी की ओर दीवार बना दी गई है।
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लोगों से बात
फोटो- 07
सामान्य रूप से गेट खुलने पर भी कालोनी में पानी आ जाता है। प्रशासन ने कालोनी बनाते समय मानकों को ध्यान में न रखकर स्थान का चयन किया है। हर साल बारिश के मौसम में जान का खतरा बना रहता है। तीन साल पहले आई बाढ़ का स्मरण आते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
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इदरीश,
फोटो- 08
कालोनी के पास ही गोकुल धाम सोसायटी की प्लाटिंग की जा रही है। सामान्य रूप से गेट खोले जाने पर इस प्लाट के आधे मैदान से पानी बहता है। अब नदी की ओर डूब क्षेत्र में दीवार बना दी गई है। इससे पूरा पानी कांशीराम कालोनी में ही आएगा।
शहवाज खान
फोटो- 09
जब प्रशासन ने ही मानकों की अनदेेखी कर इतनी बड़ी आवासीय कालोनी खड़ी कर दी तो प्राइवेट बिल्डरों को कैसे रोकेंगे। इस कारण ही डूब क्षेत्र में अवैध रूप से पक्के मकान बनाए जा रहे हैं। हम लोगों को हुई परेशानी से प्रशासन को क्या मतलब।
समीर
फोटो- 10
नदी में मोड़ होने के कारण तेजी से आने वाला पानी सीधे कांशीराम कालोनी में ही घुसता है। हर साल हम लोगों को परेशानी होती है। पास में दी दीवार बना देने के कारण अब पानी और प्रेेशर के साथ कालोनी में घुसेगा। हम लोगों को ही परेशानी होगी।
रहीश खान
वर्जन
सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देशित करेंगे कि मामले की पड़ताल करें। यदि नियम विरुद्ध काम हो रहा है तो उनको चिह्नित करें। कालोनी वासियों की चिंता दूर करने का पूरा प्रयास किया जाएगा।
मानवेंद्र सिंह, डीएम