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बुजुर्गों के लिए लाभकारी है सरल भुजंगासन

Sun, 30 May 2021 06:22 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 30 May 2021 06:22 PM IST
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yoga in Khiri
लखीमपुर खीरी। योग हर उम्र में लाभकारी है। बच्चों से लेकर बुुजुर्ग तक इसका अभ्यास कर सकते हैं। निरंतर योगासान करने से शरीर बीमारी मुक्त रहता है। योग प्रशिक्षक प्रिंस रंजन बरनवाल बताते हैं कि सरल भुजंगासन उन बुजुर्गों के लिए लाभकारी है, जिन्हें स्लिप डिस्क सियाटिका, कब्ज, स्पॉन्डिलाइटिस की दिक्कत है। योग एवं आसन का अभ्यास योग प्रशिक्षक की देखरेख में करना चाहिए। संवाद
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विधि
1. समतल जमीन पर दरी बिछाकर पेट के बल लेट जाएं।
2. ललाट जमीन पर टिकाकर पैर सीधाकर पंजे आपस में मिलाकर पैरों के तलवे ऊपर रखें।
3. भुजाओं को मोड़ कर सिर के दोनों और इस तरह रखें कि कोहनी के नीचे का भाग जमीन पर एवं हथेलियां नीचे रहें।
4. शरीर को शिथिल रख भुजाओं के ऊपरी भाग को लंबवत लाकर सांस भरते हुए सिर व कंधों को ऊपर उठाएं।
5. क्षमतानुसार आराम पूर्वक रहकर सामान्य रूप से सांस लेते रहें।
6. सांस को छोड़ते हुए सामान्य स्थिति में आकरा हाथों को आराम पूर्वक रखकर विश्राम करें।
7. इस तरह तीन से चार बार क्षमता अनुसार अभ्यास करें।
लाभ
1. स्लिप डिस्क, मेरुदंड का कड़ापन, सर्वाइकल, स्पोंडिलाइटिस, कब्ज, अपच, भूख ना लगना, गुर्दों और लीवर के लिए लाभप्रद है।
2.महिलाओं में मासिक धर्म की समस्याओं में लाभदायक है।
3. डिंबाशय एवं गर्भाशय को मजबूत करता है।
4. बच्चों व बुजुर्गों में मस्तिष्क एवं शरीर में रक्त- संचार बेहतर करता है।
सावधानी
पेप्टिक अल्सर, हर्निया, आंतों की टीबी, थायराइड ग्रंथि की अधिक क्रियाशीलता से पीड़ित और बुुजुर्ग इसका अभ्यास योग शिक्षक की सलाह के बिना न करें।
सेवा है कर्म, डर हमारे लिए नहीं बना
मितौली। कोरोना संक्रमण से जहां लोगों में दहशत हैं तो वहीं स्वास्थ्यकर्मी एक कुशल योद्धा की तरह कोरोना को हराने में लगे हैं। एएनएम प्रीति सिंह जनवरी से सीएचसी पर टीकाकरण कर रहीं हैं। इस दौरान 16 अप्रैल को संक्रमित र्हुइं। इस पर घर (आगरा) जाकर होम क्वारंटीन हो गईं। प्रीति बताती हैं कि घर में एक बेटा व बेटी है। पति भी डायबिटिक हैं। इसलिए उनकी सबसे ज्यादा चिंता रहती थी। तमाम सावधानी बरतने के बावजूद बेटा संक्रमित हो गया। मगर, इच्छाशक्ति मजबूत रखकर कोरोना का हराने में सफल रहे। प्रीति सिंह ने कहा-सेवा हमारा कर्म है, कर्म ही सबसे बड़ा धर्म है। इसी मूलमंत्र के तहत काम कर रही हूं। कोरोना का डर हर किसी को है। संक्रमण के बाद शरीर टूट जाता है। क्वारंटीन के दौरान अपनों से दूरी व अकेलापन परेशान करता है। फिर भी, डर से पहले हमारा कर्म है।
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