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Lakhimpur Kheri News: लखीमपुर और मितौली डिवीजन के एक्सईएन आमने-सामने
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लखीमपुर खीरी। गढ़ी पावर हाउस के पास रातोंरात शिफ्ट की गई बिजली लाइन के मामले में दो डिवीजन के अधिशासी अभियंता आमने-सामने आ गए। लखीमपुर डिवीजन के एक्सईएन बोले - गलत तरीके बिना अनुमति बिजली की लाइन शिफ्ट की गई, जबकि मितौली डिवीजन के एक्सईएन का कहना है कि अनुमति है और लागत भी जाम है।
लखीमपुर डिविजन के एक्सईएन शैलेंद्र कुमार ने मंगलवार को मीडिया को बुलाकर बताया था कि गढ़ी के पास एसएसबी की ओर एक लाइन को शिफ्ट कराई जा थी, जो पूरी तरह अवैध है। एक प्रॉपटी डीलर को फायदा पहुंचाने के लिए ठेकेदार यह काम करा रहा था। गढ़ी पाॅवर हाउस के एसडीओ शफरुद्दीन ने इस मामले को पकड़ा है। संबंधित ठेकेदार के खिलाफ तहरीर दी गई, लेकिन बुधवार की शाम तक रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकी।
एक्सईएन शैलेंद्र कुमार ने बताया कि अनुमति से संंबंधित जो दस्तावेज सामने आए हैं वह बसैगापुर व शारदानगर के हैं, जबकि ठेकेदार यह काम उनके क्षेत्र में करा रहा था। जिसकी अनुमति नहीं है। यह लाइन पूरी तरह गलत है। एक्सईएन ने बताया कि इस मामले में अधीक्षण अभियंता की ओर से मितौली डिवीजन से जवाब भी मांगा गया है।
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वहीं इस संबंध में मितौली डिजीवन के अधिशासी अभियंता अमित कुमार ने बताया कि जो लाइन शिफ्ट कराई गई है, उसकी अनुमति है। उन्होंने मीडिया को अनुमति से संबंधित दस्तावेज भी भेजे। यह अनुमति निधि अग्रवाल के नाम है। लाइन शिफ्टिंग की लागत भी नौ लाख 12 हजार रुपये जाम कराने से संबंधित दस्तावेज दिए हैं। जब इस संबंध में अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र कुमार से बात करने का प्रयास किया तो वह कन्नी काटते नजर आए।
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लखीमपुर डिविजन के एक्सईएन शैलेंद्र कुमार ने मंगलवार को मीडिया को बुलाकर बताया था कि गढ़ी के पास एसएसबी की ओर एक लाइन को शिफ्ट कराई जा थी, जो पूरी तरह अवैध है। एक प्रॉपटी डीलर को फायदा पहुंचाने के लिए ठेकेदार यह काम करा रहा था। गढ़ी पाॅवर हाउस के एसडीओ शफरुद्दीन ने इस मामले को पकड़ा है। संबंधित ठेकेदार के खिलाफ तहरीर दी गई, लेकिन बुधवार की शाम तक रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकी।
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एक्सईएन शैलेंद्र कुमार ने बताया कि अनुमति से संंबंधित जो दस्तावेज सामने आए हैं वह बसैगापुर व शारदानगर के हैं, जबकि ठेकेदार यह काम उनके क्षेत्र में करा रहा था। जिसकी अनुमति नहीं है। यह लाइन पूरी तरह गलत है। एक्सईएन ने बताया कि इस मामले में अधीक्षण अभियंता की ओर से मितौली डिवीजन से जवाब भी मांगा गया है।
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वहीं इस संबंध में मितौली डिजीवन के अधिशासी अभियंता अमित कुमार ने बताया कि जो लाइन शिफ्ट कराई गई है, उसकी अनुमति है। उन्होंने मीडिया को अनुमति से संबंधित दस्तावेज भी भेजे। यह अनुमति निधि अग्रवाल के नाम है। लाइन शिफ्टिंग की लागत भी नौ लाख 12 हजार रुपये जाम कराने से संबंधित दस्तावेज दिए हैं। जब इस संबंध में अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र कुमार से बात करने का प्रयास किया तो वह कन्नी काटते नजर आए।