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विश्व रक्तचाप दिवसः दिनचर्या में करें सुधार, न करें चिंता, संतुलित रहेगा रक्तचाप
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बीपी चेक कराती युवती।
जिला अस्पताल में रोजाना आ रहे इससे पीड़ित मरीज
लखीमपुर खीरी। बदलती जीवन शैली और असंतुलित खान शरीर को रोगी बना रहा है। वहीं इसका एक कारण चिंता भी है। कोरोना संक्रमण के बाद अचानक हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है। इसमें सबसे ज्यादा संख्या युवक, युवतियों और महिलाओं की है। डॉक्टरों का कहना है इसका मुख्य कारण कोरोना काल में लोगों का रोजगार छिन जाने से लेकर घर परिवार की आर्थिक स्थिति दयनीय होना है।
पिछले दो साल से लोग कोरोना के खौफ में जीवन यापन कर रहे हैं। संक्रमण काल में तमाम लोगों की नौकरी छिन गई तो वहीं तमाम लोगों का काम धंधा चौपट हो गया। कोरोना की मार से बेहाल लोग अभी तक उबर नहीं पाए हैं। इसको लेकर लोग तनाव ग्रस्त है। उधर, युवा जहां अपने कैरियर को लेकर तनाव ग्रस्त हैं, तो वहीं महिलाएं बच्चों और गृह गृहस्थी को लेकर। इससे यह सब तनाव में आकर हाई ब्लडप्रेशर का शिकार बन रहे हैं। ऐसे मरीजों की संख्या दिन पर दिन जिला अस्पताल में बढ़ती जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि 15 से 20 फीसद लोग उच्च रक्तचाप का शिकार हैं। इससे बचने के लिए चिंता मुक्त रहकर शारीरिक श्रम करना बेहद जरूरी है। इसके अलावा संतुलित खानपान और दिनचर्या अपनाकर इस बीमार से बचा जा सकता है। वहीं इसकी चपेट में आने वाले लोग नियमित दवाओं का सेेवन करते रहे।
इन बातों का रखें ध्यान
1. रोजाना सुबह के समय 30 मिनट व्यायाम या फिर प्राणायाम करें।
2. दिन में कभी भी अचानक धड़कन तेज हो तो शांत होकर गहरी सांस लें।
3. उच्च रक्तचाप के मरीज नमक और मिर्च कम मात्रा में लें।
4. समय समय पर ब्लड प्रेशर की जांच कराते रहें।
5. खाली पेट बिल्कुल न रहें और दवाओं का नियमित सेवन करें।
6. पालतू पशुओं या प्रकृति के बीच समय बिताएं, इससे बेहतर महसूस होगा।
7. हरी सब्जियों का अधिक सेवन करें, तैलीय भोजन से दूर रहें।
8. पानी खूब पिएं और खाना खाने के बाद कुछ देर तक टहलें।
अवसाद का कारण बन सकता है उच्च रक्तचाप
मनोचिकित्सक डॉ. अखिलेश शुक्ला बताते हैं कि हाइपरटेंशन और अवसाद के तमाम मरीज आते है। इनमें युवाओं और महिलाओं की संख्या ज्यादा होती है, क्योंकि युवाओं को भविष्य की चिंता सताती है तो महिलाएं परिवार से लेकर बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित रहती हैं। इससे उच्च रक्तचाप की समस्या बनती है, जो धीरे धीरे डिप्रेशन यानी अवसाद में बदल जाती है। इसलिए जरूरी है कि अनावश्यक बातों से अपना ध्यान हटाए।
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भूखे पेट रहना हो सकता है खतरनाक
डॉक्टर बताते हैं कि उच्च रक्तचाप का सीधा संबंध खानपान और भूख से है। हाईपरटेंशन के मरीजों को भूख कम लगती है, या फिर लगने पर भोजन करने का मन नहीं होता। यह दोनो स्थिति खतरनाक है। इसका सीधा असर लिवर यानी यकृत पर पड़ता है। यदि खाना शरीर में नहीं जाएगा तो शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिलेंगे। इससे शरीर कमजोर होगा और दूसरे अन्य रोग तेजी से अपनी चपेट में लेने लगेंगे। वहीं भोजन ऐसा करें, जिसमें कॉलेस्ट्रॉल कम बनें और पोषक तत्व ज्यादा मिले। इसलिए समय पर संतुलित और पौष्टिक भोजन करें।
उच्च रक्तचाप
रक्तचाप आमतौर पर रक्त के स्तर से निर्धारित होता है, जो दिल को पंप करता है। यदि धमनियां संकीर्ण हैं और दिल अत्यधिक मात्रा में रक्त पंप करता है, तो दबाव अधिक हो जाता है। हाइपरटेंशन बिना किसी स्पष्ट लक्षण के कई साल तक विकसित हो सकता है। उच्च रक्तचाप स्ट्रोक और दिल के दौरे आदि की समस्याओं को जन्म दे सकता है।
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लखीमपुर खीरी। बदलती जीवन शैली और असंतुलित खान शरीर को रोगी बना रहा है। वहीं इसका एक कारण चिंता भी है। कोरोना संक्रमण के बाद अचानक हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है। इसमें सबसे ज्यादा संख्या युवक, युवतियों और महिलाओं की है। डॉक्टरों का कहना है इसका मुख्य कारण कोरोना काल में लोगों का रोजगार छिन जाने से लेकर घर परिवार की आर्थिक स्थिति दयनीय होना है।
पिछले दो साल से लोग कोरोना के खौफ में जीवन यापन कर रहे हैं। संक्रमण काल में तमाम लोगों की नौकरी छिन गई तो वहीं तमाम लोगों का काम धंधा चौपट हो गया। कोरोना की मार से बेहाल लोग अभी तक उबर नहीं पाए हैं। इसको लेकर लोग तनाव ग्रस्त है। उधर, युवा जहां अपने कैरियर को लेकर तनाव ग्रस्त हैं, तो वहीं महिलाएं बच्चों और गृह गृहस्थी को लेकर। इससे यह सब तनाव में आकर हाई ब्लडप्रेशर का शिकार बन रहे हैं। ऐसे मरीजों की संख्या दिन पर दिन जिला अस्पताल में बढ़ती जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि 15 से 20 फीसद लोग उच्च रक्तचाप का शिकार हैं। इससे बचने के लिए चिंता मुक्त रहकर शारीरिक श्रम करना बेहद जरूरी है। इसके अलावा संतुलित खानपान और दिनचर्या अपनाकर इस बीमार से बचा जा सकता है। वहीं इसकी चपेट में आने वाले लोग नियमित दवाओं का सेेवन करते रहे।
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इन बातों का रखें ध्यान
1. रोजाना सुबह के समय 30 मिनट व्यायाम या फिर प्राणायाम करें।
2. दिन में कभी भी अचानक धड़कन तेज हो तो शांत होकर गहरी सांस लें।
3. उच्च रक्तचाप के मरीज नमक और मिर्च कम मात्रा में लें।
4. समय समय पर ब्लड प्रेशर की जांच कराते रहें।
5. खाली पेट बिल्कुल न रहें और दवाओं का नियमित सेवन करें।
6. पालतू पशुओं या प्रकृति के बीच समय बिताएं, इससे बेहतर महसूस होगा।
7. हरी सब्जियों का अधिक सेवन करें, तैलीय भोजन से दूर रहें।
8. पानी खूब पिएं और खाना खाने के बाद कुछ देर तक टहलें।
अवसाद का कारण बन सकता है उच्च रक्तचाप
मनोचिकित्सक डॉ. अखिलेश शुक्ला बताते हैं कि हाइपरटेंशन और अवसाद के तमाम मरीज आते है। इनमें युवाओं और महिलाओं की संख्या ज्यादा होती है, क्योंकि युवाओं को भविष्य की चिंता सताती है तो महिलाएं परिवार से लेकर बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित रहती हैं। इससे उच्च रक्तचाप की समस्या बनती है, जो धीरे धीरे डिप्रेशन यानी अवसाद में बदल जाती है। इसलिए जरूरी है कि अनावश्यक बातों से अपना ध्यान हटाए।
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भूखे पेट रहना हो सकता है खतरनाक
डॉक्टर बताते हैं कि उच्च रक्तचाप का सीधा संबंध खानपान और भूख से है। हाईपरटेंशन के मरीजों को भूख कम लगती है, या फिर लगने पर भोजन करने का मन नहीं होता। यह दोनो स्थिति खतरनाक है। इसका सीधा असर लिवर यानी यकृत पर पड़ता है। यदि खाना शरीर में नहीं जाएगा तो शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिलेंगे। इससे शरीर कमजोर होगा और दूसरे अन्य रोग तेजी से अपनी चपेट में लेने लगेंगे। वहीं भोजन ऐसा करें, जिसमें कॉलेस्ट्रॉल कम बनें और पोषक तत्व ज्यादा मिले। इसलिए समय पर संतुलित और पौष्टिक भोजन करें।
उच्च रक्तचाप
रक्तचाप आमतौर पर रक्त के स्तर से निर्धारित होता है, जो दिल को पंप करता है। यदि धमनियां संकीर्ण हैं और दिल अत्यधिक मात्रा में रक्त पंप करता है, तो दबाव अधिक हो जाता है। हाइपरटेंशन बिना किसी स्पष्ट लक्षण के कई साल तक विकसित हो सकता है। उच्च रक्तचाप स्ट्रोक और दिल के दौरे आदि की समस्याओं को जन्म दे सकता है।