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कितना कराया कार्य, देना होगा हिसाब
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Sat, 22 Oct 2016 12:23 AM IST
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money shimla
- विद्यालयों को टीएलएम, रंगाई-पुताई आदि की दी जाती है धनराशि
- गांवों में बनाई जाएगी सोशल आडिट टीम
- बीईओ की अगुवाई में तीन सदस्यीय कमेटी देगी प्रशिक्षण
परिषदीय स्कूलों में व्यय किए जाने वाले पैसे का हिसाब लिया जाएगा। विद्यालयों को प्रति वर्ष टीएलएम, रंगाई-पुताई/मरम्मत और विद्यालय विकास अनुदान मद में धनराशि दी जाती है। इस धनराशि का अधिकांश विद्यालयों में गोलमाल हो रहा है, जिससे कोई बदलाव नजर नहीं आता है। लिहाजा राज्य परियोजना निदेशक ने सभी विद्यालयों में पांच से 20 दिसंबर 2016 तक सोशल आडिट कराने के आदेश दिए हैं।
अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिनियम 2009 के तहत परिषदीय विद्यालयों में सोशल आडिट कराया जाना है, जिसके लिए गांवों में ही टीम बनाई जाएगी। चार सदस्यीय सोशल आडिट टीम में विद्यालय प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष, शिक्षक जो सचिव न हो, वार्ड मेंबर/बीडीसी और गैर सरकारी संगठन/एनजीओ/युवा संगठन/सेवानिवृत्त शिक्षक शामिल किए जाएंगे। इसके अलावा ब्लाक स्तर पर टीम बनेगी, जिसमें खंड शिक्षा अधिकारी, बीडीसी और एनजीओ का एक सदस्य शामिल होगा। ब्लाक स्तर पर सोशल आडिट टीम को प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी बीआरसी के सहायक समन्वयक, प्रति न्याय पंचायत के दो शिक्षकों को दी गई है। बताते चलें कि टीएलएम मद में प्रत्येक विद्यालय को 500 रुपये प्रति शिक्षक के हिसाब से धनराशि दी जाती है। रंगाई-पुताई/मरम्मत के लिए परिषदीय विद्यालयों को न्यूनतम पांच हजार से अधिकतम 10 हजार रुपये, विद्यालय विकास अनुदान के तौर पर प्राथमिक विद्यालयों को पांच-पांच हजार और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को सात-सात हजार रुपये दिए जाते हैं। बीएसए संजय कुमार शुक्ला ने बताया कि सोशल आडिट के क्रियान्वयन के लिए सभी आवश्यक तैयारी करने के लिए बीईओ और नगर शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं।
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- गांवों में बनाई जाएगी सोशल आडिट टीम
- बीईओ की अगुवाई में तीन सदस्यीय कमेटी देगी प्रशिक्षण
परिषदीय स्कूलों में व्यय किए जाने वाले पैसे का हिसाब लिया जाएगा। विद्यालयों को प्रति वर्ष टीएलएम, रंगाई-पुताई/मरम्मत और विद्यालय विकास अनुदान मद में धनराशि दी जाती है। इस धनराशि का अधिकांश विद्यालयों में गोलमाल हो रहा है, जिससे कोई बदलाव नजर नहीं आता है। लिहाजा राज्य परियोजना निदेशक ने सभी विद्यालयों में पांच से 20 दिसंबर 2016 तक सोशल आडिट कराने के आदेश दिए हैं।
अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिनियम 2009 के तहत परिषदीय विद्यालयों में सोशल आडिट कराया जाना है, जिसके लिए गांवों में ही टीम बनाई जाएगी। चार सदस्यीय सोशल आडिट टीम में विद्यालय प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष, शिक्षक जो सचिव न हो, वार्ड मेंबर/बीडीसी और गैर सरकारी संगठन/एनजीओ/युवा संगठन/सेवानिवृत्त शिक्षक शामिल किए जाएंगे। इसके अलावा ब्लाक स्तर पर टीम बनेगी, जिसमें खंड शिक्षा अधिकारी, बीडीसी और एनजीओ का एक सदस्य शामिल होगा। ब्लाक स्तर पर सोशल आडिट टीम को प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी बीआरसी के सहायक समन्वयक, प्रति न्याय पंचायत के दो शिक्षकों को दी गई है। बताते चलें कि टीएलएम मद में प्रत्येक विद्यालय को 500 रुपये प्रति शिक्षक के हिसाब से धनराशि दी जाती है। रंगाई-पुताई/मरम्मत के लिए परिषदीय विद्यालयों को न्यूनतम पांच हजार से अधिकतम 10 हजार रुपये, विद्यालय विकास अनुदान के तौर पर प्राथमिक विद्यालयों को पांच-पांच हजार और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को सात-सात हजार रुपये दिए जाते हैं। बीएसए संजय कुमार शुक्ला ने बताया कि सोशल आडिट के क्रियान्वयन के लिए सभी आवश्यक तैयारी करने के लिए बीईओ और नगर शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं।
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