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झलक दिखाकर जंगल में छिप गया बाघ

Mon, 04 Jan 2021 11:58 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 04 Jan 2021 11:58 PM IST
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Wild Animals
किशनपुर सेंक्चुरी में पिंजड़े की तकनीकी जांच करते अफसर। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी जंगल में गर्दन में रस्सी का फंदा लिए घूम रहा बाघ रविवार शाम पेट्रोलिंग टीमों के सामने आया लेकिन पलक झपकते ही वह फिर जंगल में गुम हो गया। यही नहीं एक कैमरे में बाघ की तस्वीर भी कैद हुई है, जिसमें प्रभावित बाघ एक बाघिन के साथ चहलकदमी करते हुए दिखाई दे रहा है। धारियों के मिलान से इस बात की पुष्टि हुई कि यह वही बाघ है जिसके गले में रस्सी का फंदा पड़ा हुआ है।
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किशनपुर सेंक्चुरी जंगल में पिछले 19 दिनों से घूम रहे प्रभावित बाघ ने अपने भ्रमण का दायरा बढ़ा लिया है। रविवार को दस जोड़ी कैमरे और लगाए गए हैं। इन्हीं में से एक कैमरे में बाघिन के साथ बाघ की तस्वीर कैद हुई है। सोमवार सुबह एक बार फिर पेट्रोलिंग टीमों के सामने से होकर प्रभावित गुजरा तो वन कर्मियों की बांछें खिल गईं लेकिन पल भर में बाघ झाड़ियों में गुम हो गया। वन विभाग के अफसरों के मुताबिक जिस क्षेत्र में यह बाघ चहलकदमी कर रहा है वहां तीन से चार तक बाघिनों का भी बसेरा है। इन दिनों बाघों का मेटिंग सीजन भी चल रहा है। ऐसे में यह उम्मीद की जा रही है कि प्रभावित बाघ इन बाघिनों के आसपास ही मौजूद रह सकता है। अफसरों का यह भी कहना है कि यह बाघ 18 से 20 वर्ग किलोमीटर के दायरे में ही भ्रमण कर रहा है।
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पिंजड़े में बैठकर बाघ को बेहोश करने की बनी थी योजना
बाघ को बेहोश करने के लिए वन विभाग ने ट्रैंक्युलाइजर टीमों को पिंजड़े के अंदर बिठाकर बाघ को निशाने पर लेने की योजना बनाई थी। घास के मैदान में पिंजड़ा पहुंचा भी दिया गया था लेकिन जब सर्च अभियान का नेतृत्व कर रहे आईएफएस अधिकारी राजेश कुमार ने पिंजड़े की तकनीकी जांच की गई तो सुरक्षा के लिहाज से उसे सही नहीं माना गया। जिसके चलते इस योजना को रद्द कर दिया गया।
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बाघ को घेरने में जुटीं ट्रैक्युलाइजर टीमें
प्रभावित बाघ की मौजूदगी एक ही स्थान पर पता लगने के बाद अब ट्रैंक्युलाइजर टीमें बाघ की घेराबंदी करने में लगी हुई हैं। यह टीमें ऐसे मोर्चे पर पहुंचने की फिराक में हैं जहां से बाघ पर अचूक निशाना लगाया जा सके। अफसरों के मुताबिक बाघ दो दिन से एक ही सीमित दायरे में दिखाई दे रहा है। जिससे अब घेराबंदी सफल होने की उम्मीद है।

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प्रभावित बाघ का सुराग तो मिल गया है, लेकिन झाड़ियों में बार-बार छिप जाने के कारण ट्रैंक्युलाइजर टीमें उसे निशाने पर नहीं ले पा रहीं हैं।
- संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक/ फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व।
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खेत में बाघ के पगचिह्न मिलने से ग्रामीणों में दहशत
ममरी। हैदराबाद थाना क्षेत्र के गांव सिंगहा और वनबुघेली के बीच माइनर नहर से सटे खेत में बाघ के पगचिह्न मिलने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। रविवार सुबह सिंगहा और वनबुधेली गांव के बीच खेत में बाघ के पगचिह्न बने मिले, जिसे देखकर खेत जा रहे लोगों के होश उड़ गए। यहां से देवीपुर जंगल की दूरी तीन किलोमीटर बताई गई है। गांव वालों की सूचना पर पहुंचे महेशपुर रेंज के फॉरेस्टर जगदीश वर्मा आदि वन कर्मियों ने मौके का निरीक्षण कर बताया कि दो और स्थानों पर पगचिह्न बने मिले हैं। एक स्थान पर बाघ के और दूसरे स्थान पर सियार के पगचिह्न हैं। उन्होंने बताया कि हो सकता है बाघ नहर में पानी पीने पहुंच गया हो। फिलहाल लोगों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है। संवाद
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