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वन विभाग की टीम जैसे ही करीब पहुंची भाग निकला बाघ

Sat, 26 Dec 2020 01:17 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 26 Dec 2020 01:17 AM IST
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Wild Animals
किशनपुर सेंक्चुरी में फंदा लगे बाघ के पगचिह्नों का मिलान करते वन कर्मी। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। गर्दन में नायलॉन की रस्सी का फंदा लिए जंगल में घूम रहे बाघ का एक सप्ताह बाद भी सटीक सुराग नहीं मिल पाया है, हालांकि कैमरे में उसकी तस्वीरें दो-तीन बार ट्रैप हुई और पगचिह्न भी मिले, लेकिन वन विभाग की टीमें उसकी घेराबंदी करने में नाकामयाब रही हैं। इससे बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने में दिक्कत आ रही है। शुक्रवार को इस बाघ का कोई सुराग न मिलने और समय बढ़ने के साथ-साथ वन विभाग की चिंताएं भी बढ़ती जा रही हैं। हालांकि एक बार टीम के सदस्य बाघ के बिल्कुल करीब पहुंचे जरूर थे, लेकिन बाघ ने फुर्ती दिखाते हुए चकमा दे दिया।
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दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी की कटैया बीट में लगे कैमरों में एक बाघ की तस्वीर कैद हुई थी। जिसके गले में रस्सी का फंदा पड़ा हुआ है। इससे पहले इसी जगह पर दो शिकारी शिकार के उपकरण समेत पकड़े गए थे। शिकारियों के चंगुल से भागे बाघ की जान बचाने के लिए उसे ट्रैंक्युलाइज किया जाना है। इसके लिए एक सप्ताह से सर्च अभियान चलाया जा रहा है। इस बीच दो बार बाघ की तस्वीरें कैमरों में ट्रैप हुई, पगचिह्न भी दिखाई दिए। एक दो बार यह बाघ वन कर्मियों की आंखों के सामने से भी गुजरा है, लेकिन पलक झपकते ही यह झाड़ियों में गुम हो गया। पिछले तीन दिन से टैंक्युलाइजर टीमें किशनपुर सेंक्चुरी में डेरा डाले हुए हैं। लेकिन बाघ उनके निशाने पर नहीं आ रहा है। वन विभाग इसकी जान बचाने के प्रति बेहद गंभीर है। यही कारण है कि इस पूरे सर्च अभियान का नेतृत्व अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रोजेक्ट टाइगर) कमलेश कुमार गुप्ता और मुख्य वन संरक्षक / फील्ड निदेशक संजय पाठक स्वयं कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में वन विभाग की कई टीमें और दुधवा के चार प्रशिक्षित पालतू हाथियों को लगाया गया है। बावजूद इसके बाघ का सटीक सुराग नहीं मिल पा रहा है।
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घनी झाड़ियां अभियान में बन रहीं रोड़ा
किशनुपुर सेंक्चुरी जंगल की कटैया बीट में जिस जगह बाघ चहलकदमी कर रहा है वहां घनी ऊंची झाड़ियां हैं। जिसमें छिप जाने के कारण बाघ को तलाश कर पाना वन विभाग के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
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बाघ के बिल्कुल नजदीक पहुंच गया था हाथी, फिर दे गया चकमा
जिस हाथी पर सवार होकर एपीसीसीएफ ( प्रोजेक्ट टाइगर) कमलेश कुमार गुप्ता, एफडी डीटीआर संजय पाठक, प्रभारी डीडी डॉ अनिल कुमार पटेल सर्च अभियान में लगे थे वह हाथी गुरुवार को बाघ के बिल्कुल नजदीक पहुंच गया था, लेकिन बाघ चकमा देकर एक बार फिर घनी झाड़ियों में गुम हो गया।
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तीन दिन से सैलानियों के लिए बंद है किशनपुर सेंक्चुरी
बाघ के लिए चलाए जा रहे सर्च अभियान के चलते किशनपुर सेंक्चुरी में सैलानियों के भ्रमण और प्रवास करने पर रोक लगा दी गई है। यह जानकारी दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी संजय पाठक ने दी है।

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किशनपुर सेंक्चुरी जंगल में शिकारियों के चंगुल से फंदा तोड़कर भागे बाघ का सटीक सुराग अभी तक नहीं मिल सका है। हालांकि बाघ की तस्वीरें दो तीन बार कैमरों में ट्रैप हुईं और पगचिह्न भी मिले हैं। पगचिह्नों के मिलान से इस बात की पुष्टि हुई कि यह वही बाघ है,जिसके गले में फंदा पड़ा हुआ है। प्रयास जारी है। उसे जल्दी ही ट्रैंक्युलाइज कर लिया जाएगा।
- डॉ अनिल कुमार पटेल, प्रभारी उपनिदेशक, दुधवा नेशनल पार्क/ डीडी, डीटीआर,बफरजोन
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