{"_id":"5fe2418e8ebc3e410e78ca9f","slug":"wild-animals-lakhimpur-news-bly431130959","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेहोश कर खोला जाएगा बाघ के गले से फंदा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेहोश कर खोला जाएगा बाघ के गले से फंदा
विज्ञापन
बांकेगंज। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) ने शिकारियों के लगाए गए फंदे के साथ जंगल में घूम रहे बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने की अनुमति दे दी है, जिससे उसकी गर्दन से फंदा निकालकर बाघ की जान बचाई जा सके। किशनपुर सेंक्चुरी जैसे संरक्षित वन क्षेत्र में शिकार के प्रयास की इस घटना को वन विभाग ने बेहद गंभीरता से लिया है। मंगलवार को हालात का जायजा लेने के लिए अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (एपीसीसीएफ) प्रोजेक्ट टाइगर ने किशनपुर सेंक्चुरी का दौरा किया। उधर दो दिन पहले कै मरे में देखा गया यह बाघ जंगल में गुम हो गया , जिसकी तलाश की जा रही है।
बाघ की गर्दन में नायलॉन की रस्सी का फंदा पड़ा होने की पुष्टि पर दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने पीसीसीएफ (वन्यजीव) को स्थिति से अवगत कराते हुए बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने की अनुमति मांगी थी। ताकि बाघ की गर्दन में फंसे फंदे को निकालकर उसकी जान बचाई जा सके। पीसीसीएफ ने बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही गर्दन में फंसे फंदे को लेकर जंगल में घूम रहे बाघ की तलाश तेज कर दी गई है। मंगलवार को अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक ( प्रोजेक्ट टाइगर) कमलेश कुमार गुप्ता ने किशनपुर सेंक्चुरी पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने उस जगह को भी देखा, जहां शिकारी पकड़े गए थे। उस स्थान का भी निरीक्षण किया जहां पर लगे कैमरों में बाघ की तस्वीर ट्रेप हुई थी। उन्होंने दुधवा टाइगर रिजर्व के अधिकारियों से वार्ता की और बाघ की जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास करने के निर्देश दिए। जंगल में शिकारियों की घुसपैठ और शिकार की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
दो दिन पहले फंदा लगे हुए बाघ की लोकेशन ट्रेस की गई थी, लेकिन अचानक बाघ जंगल में ओझल हो गया है। जिसकी तेजी से तलाश की जा रही है, ताकि उसे ट्रैंक्युलाइज कर गर्दन से फंदा निकाला जा सके।
विज्ञापन
- संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक/ फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व।
बाघ की तलाश में जुटी टीम
दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनपुर सेंक्चुरी में करीब एक सप्ताह पहले शिकारियों ने फंदा लगाकर बाघ के शिकार की कोशिश की थी। हालांकि दोनों शिकारी नायलॉन की रस्सी और कुल्हाड़ी समेत पकड़े गए थे। इसी दौरान दुधवा नेशनल पार्क के प्रभारी उपनिदेशक डॉ अनिल कुमार पटेल के निर्देश पर जब लगाए गए कैमरों की तस्वीरों का निरीक्षण किया गया तो उनमें एक बाघ ऐसा भी दिखाई दिया जिसकी गर्दन में नायलॉन की रस्सी का फंदा फंसा हुआ था। पार्क प्रशासन ने लगातार दुधवा के चार प्रशिक्षित हाथियों से और पैदल कॉबिंग करके बाघ का पता लगा लिया। वन विभाग की टीमें लगातार उसकी निगरानी कर रही थी। सोमवार को बाघ ने नीलगाय का शिकार भी किया था, लेकिन अचानक बाघ उनकी आंखों से ओझल हो गया। तब से उसका कोई पता नहीं चला है। प्रशिक्षित वन कर्मियों की टीमों के अलावा रैपिड रिस्पांस यूनिट की टीम भी बाघ की तलाश कर रही है।
विज्ञापन
बाघ की गर्दन में नायलॉन की रस्सी का फंदा पड़ा होने की पुष्टि पर दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने पीसीसीएफ (वन्यजीव) को स्थिति से अवगत कराते हुए बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने की अनुमति मांगी थी। ताकि बाघ की गर्दन में फंसे फंदे को निकालकर उसकी जान बचाई जा सके। पीसीसीएफ ने बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही गर्दन में फंसे फंदे को लेकर जंगल में घूम रहे बाघ की तलाश तेज कर दी गई है। मंगलवार को अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक ( प्रोजेक्ट टाइगर) कमलेश कुमार गुप्ता ने किशनपुर सेंक्चुरी पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने उस जगह को भी देखा, जहां शिकारी पकड़े गए थे। उस स्थान का भी निरीक्षण किया जहां पर लगे कैमरों में बाघ की तस्वीर ट्रेप हुई थी। उन्होंने दुधवा टाइगर रिजर्व के अधिकारियों से वार्ता की और बाघ की जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास करने के निर्देश दिए। जंगल में शिकारियों की घुसपैठ और शिकार की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
दो दिन पहले फंदा लगे हुए बाघ की लोकेशन ट्रेस की गई थी, लेकिन अचानक बाघ जंगल में ओझल हो गया है। जिसकी तेजी से तलाश की जा रही है, ताकि उसे ट्रैंक्युलाइज कर गर्दन से फंदा निकाला जा सके।
विज्ञापन
- संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक/ फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व।
बाघ की तलाश में जुटी टीम
दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनपुर सेंक्चुरी में करीब एक सप्ताह पहले शिकारियों ने फंदा लगाकर बाघ के शिकार की कोशिश की थी। हालांकि दोनों शिकारी नायलॉन की रस्सी और कुल्हाड़ी समेत पकड़े गए थे। इसी दौरान दुधवा नेशनल पार्क के प्रभारी उपनिदेशक डॉ अनिल कुमार पटेल के निर्देश पर जब लगाए गए कैमरों की तस्वीरों का निरीक्षण किया गया तो उनमें एक बाघ ऐसा भी दिखाई दिया जिसकी गर्दन में नायलॉन की रस्सी का फंदा फंसा हुआ था। पार्क प्रशासन ने लगातार दुधवा के चार प्रशिक्षित हाथियों से और पैदल कॉबिंग करके बाघ का पता लगा लिया। वन विभाग की टीमें लगातार उसकी निगरानी कर रही थी। सोमवार को बाघ ने नीलगाय का शिकार भी किया था, लेकिन अचानक बाघ उनकी आंखों से ओझल हो गया। तब से उसका कोई पता नहीं चला है। प्रशिक्षित वन कर्मियों की टीमों के अलावा रैपिड रिस्पांस यूनिट की टीम भी बाघ की तलाश कर रही है।