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बाघ और तेंदुआ के बाद अब बस्ती में सियार का खौफ
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बांकेगंज में सियार के हमले में जख्मी बालिका और ग्रामीण।
- फोटो : LAKHIMPUR
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व जंगल से सटे इलाके में बसे लोग एक तरफ जहां बाघ और तेंदुओं के खौफ से जूझ रहे हैं, तो वहीं अब सियार, लकड़बग्घा और भेड़ियों के आबादी वाले इलाकों में आने से गांव वालों में दहशत है।
आए दिन आबादी में सियार, भेड़िए और लकड़बग्घे आकर लोगों को घायल कर जाते हैं। वन विभाग बाघ और तेंदुओं की तो निगरानी करता है लेकिन इन छोटे हिंसक जानवरों पर नियंत्रण के लिए वन विभाग के पास कोई रणनीति नहीं है। जिसके चलते खेतों में बाघ और तेंदुए की दहशत तो गांव के अंदर छोटे हिंसक जानवरों के आतंक से दो-चार होना पड़ता है।
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इससे पहले भी सियार हमले की हो चुकी हैं घटनाएं
बांकेगंज कस्बे से सटे अर्जुनपुर और गंगापुर में मंगलवार शाम को हुई घटना से पहले अर्जुनपुर गांव में ही करीब दो माह पहले गांव में घुसे सियार ने एक बकरी और दो लोगों पर हमला कर घायल कर दिया था। इसी तरह ग्रंट नंबर 11 के कलीमपुर गांव में 05 अक्तूबर को दिन-दहाड़े घुसे सियार ने आबादी में घुसकर तीन लोगों को घायल किया था। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की धौरहरा रेंज में तो आए दिन सियार और भेड़ियों के हमले की घटनाएं कई बार सामने आ चुकी हैं। कई बार तो अंधेरे में इन जानवरों का हमला होने पर लोग तेंदुए का हमला समझ बैठते हैं।
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भोजन की तलाश में आबादी में आ रहे छोटे हिंसक जीव
वन्यजीव विशेषज्ञ अशोक कश्यप का कहना है कि सियार, भेड़िया, लकड़बग्घे आदि खरगोश, गिलहरी, चूहे जैसे जीवों का शिकार करते हैं। जंगल में पर्याप्त भोजन न मिलने के कारण यह आबादी की तरफ आते हैं। जहां उन्हें आसानी से भोजन मिल जाता है।
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ग्रामीणों ने कहा-चैन नहीं लेने दे रहे छोटे हिंसक जानवर
अर्जुनपर गांव निवासी रमेश कुमार भार्गव का कहना है कि जंगल से सटे गांवों में बसे लोग न तो खेतों में सुरक्षित हैं न ही गांवों में। खेतों में जहां बाघ और तेंदुए हमले कर लोगों को घायल करने के साथ ही उनकी जान ले रहे हैं,वहीं गांवों में घुसकर छोटे हिंसक जीव लोगों और पालतू मवेशियों को काटकर जख्मी कर रहे हैं।
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ग्रामीण अनूप कुमार का कहना है जंगल से सटे गांवों के लोगों पर बाघ, तेंदुओं के बाद अब छोटे हिंसक जानवर भी हमलावर हो रहे हैं। इन छोटे हिंसक वन्यजीवों के हमलों के डर से लोगों के बच्चों का गांव में खेलना और निकलना दूभर हो रहा है। कभी दिन-दहाड़े तो कभी सरेशाम हो रहे इन हमलों से लोगों का जीन मुहाल हो रहा है।
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अमीन नगर गांव निवासी नीतेश कुमार का कहना है कि अब छोटे हिंसक जानवर ग्रामीणों को चैन नहीं लेने दे रहे हैं। आए दिन यह छोटे हिंसक वन्यजीव सियार आदि आबादी में घुसकर लोगों और उनके पालतू पशुओं को निशाना बनाकर उन्हें काटकर घायल कर रहे हैं।
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पसियापुर गांव निवासी अनूप कुमार का कहना है जंगल से सटे गांवों में बसे लोगों पर हर तरफ से जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है। यह छोटे-बड़े हिंसक वन्यजीव कभी रास्तों, कभी खेतों तो कभी गांवों में घुसकर लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर रहे हैं। बावजूद इसके वन विभाग का ध्यान इस ओर आज तक नहीं गया। संवाद
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आए दिन आबादी में सियार, भेड़िए और लकड़बग्घे आकर लोगों को घायल कर जाते हैं। वन विभाग बाघ और तेंदुओं की तो निगरानी करता है लेकिन इन छोटे हिंसक जानवरों पर नियंत्रण के लिए वन विभाग के पास कोई रणनीति नहीं है। जिसके चलते खेतों में बाघ और तेंदुए की दहशत तो गांव के अंदर छोटे हिंसक जानवरों के आतंक से दो-चार होना पड़ता है।
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इससे पहले भी सियार हमले की हो चुकी हैं घटनाएं
बांकेगंज कस्बे से सटे अर्जुनपुर और गंगापुर में मंगलवार शाम को हुई घटना से पहले अर्जुनपुर गांव में ही करीब दो माह पहले गांव में घुसे सियार ने एक बकरी और दो लोगों पर हमला कर घायल कर दिया था। इसी तरह ग्रंट नंबर 11 के कलीमपुर गांव में 05 अक्तूबर को दिन-दहाड़े घुसे सियार ने आबादी में घुसकर तीन लोगों को घायल किया था। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की धौरहरा रेंज में तो आए दिन सियार और भेड़ियों के हमले की घटनाएं कई बार सामने आ चुकी हैं। कई बार तो अंधेरे में इन जानवरों का हमला होने पर लोग तेंदुए का हमला समझ बैठते हैं।
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भोजन की तलाश में आबादी में आ रहे छोटे हिंसक जीव
वन्यजीव विशेषज्ञ अशोक कश्यप का कहना है कि सियार, भेड़िया, लकड़बग्घे आदि खरगोश, गिलहरी, चूहे जैसे जीवों का शिकार करते हैं। जंगल में पर्याप्त भोजन न मिलने के कारण यह आबादी की तरफ आते हैं। जहां उन्हें आसानी से भोजन मिल जाता है।
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ग्रामीणों ने कहा-चैन नहीं लेने दे रहे छोटे हिंसक जानवर
अर्जुनपर गांव निवासी रमेश कुमार भार्गव का कहना है कि जंगल से सटे गांवों में बसे लोग न तो खेतों में सुरक्षित हैं न ही गांवों में। खेतों में जहां बाघ और तेंदुए हमले कर लोगों को घायल करने के साथ ही उनकी जान ले रहे हैं,वहीं गांवों में घुसकर छोटे हिंसक जीव लोगों और पालतू मवेशियों को काटकर जख्मी कर रहे हैं।
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ग्रामीण अनूप कुमार का कहना है जंगल से सटे गांवों के लोगों पर बाघ, तेंदुओं के बाद अब छोटे हिंसक जानवर भी हमलावर हो रहे हैं। इन छोटे हिंसक वन्यजीवों के हमलों के डर से लोगों के बच्चों का गांव में खेलना और निकलना दूभर हो रहा है। कभी दिन-दहाड़े तो कभी सरेशाम हो रहे इन हमलों से लोगों का जीन मुहाल हो रहा है।
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अमीन नगर गांव निवासी नीतेश कुमार का कहना है कि अब छोटे हिंसक जानवर ग्रामीणों को चैन नहीं लेने दे रहे हैं। आए दिन यह छोटे हिंसक वन्यजीव सियार आदि आबादी में घुसकर लोगों और उनके पालतू पशुओं को निशाना बनाकर उन्हें काटकर घायल कर रहे हैं।
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पसियापुर गांव निवासी अनूप कुमार का कहना है जंगल से सटे गांवों में बसे लोगों पर हर तरफ से जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है। यह छोटे-बड़े हिंसक वन्यजीव कभी रास्तों, कभी खेतों तो कभी गांवों में घुसकर लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर रहे हैं। बावजूद इसके वन विभाग का ध्यान इस ओर आज तक नहीं गया। संवाद