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सर्दियों में शिकार की रहती है ज्यादा आशंका, गश्त पर रहेगा विशेष ध्यान
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दुधवा में बाघ संरक्षण माह के तहत एंटी स्नेयर वॉक अभियान चलाते डीडी, साथ में वन कर्मी। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
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बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व में मंगलवार को बाघ संरक्षण माह का शुभारंभ किया गया। इसके तहत अलग-अलग जगहों पर विभिन्न कार्यक्रम हुए। कतर्निया घाट में शुभारंभ गोष्ठी के रूप में किया गया। जिसमें बाघ संरक्षण में मीडिया की भूमिका पर चर्चा की गई जबकि दुधवा नेशनल पार्क में एंटी स्नेयर वॉक अभियान के साथ जागरूकता कार्यक्रम हुए।
दुधवा नेशनल पार्क में बाघ संरक्षण माह के अंतर्गत एंटी स्नेयर वॉक अभियान चलाया गया। जिसका नेतृत्व उपनिदेशक मनोज सोनकर ने किया। इसके तहत विभिन्न उपकरणों से यह पता लगाने की कोशिश की गई कि कहीं शिकार के लिए कुड़का, खाबड़ आदि तो नहीं लगाए गए हैं। बाघ संरक्षण माह के तहत गश्त भी तेज कर दी गई है। उपनिदेशक ने बताया कि सर्दियों के मौसम में गश्त सुस्त हो जाने से शिकारी सक्रिय हो जाते हैं। इस मौसम में शिकार की आशंका ज्यादा रहती हैं। बाघ संरक्षण माह के तहत बफरजोन में भी जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। बाघ संरक्षण माह पूरे दिसंबर चलेगा। इसमें पूरे माह जंगल से सटे इलाकों में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा और बाघ मित्रों का भी चयन किया जाएगा।
दुधवा टाइगर रिजर्व के कतर्निया घाट (वन्यजीव विहार) में हुई गोष्ठी को संबोधित करते हुए डीएफओ यशवंत ने बताया कि तराई क्षेत्र में मानव-बाघ संघर्ष एक बड़ी समस्या है। इससे निपटने के लिए वन विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। इसके प्रति जागरूकता पैदा करने में मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। गोष्ठी में विश्व प्रकृति निधि (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी दबीर हसन ने भी विचार रखे।
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गोष्ठी में बताए बाघ से बचाव के उपाय
ममरी। बाघ संरक्षण माह के तहत मोहम्मदी महेशपुर रेंज के वनकर्मियों ने सहजनिया गांव के विद्यालय में गोष्ठी कर ग्रामीणों को बाघ से बचाव के उपाय बताकर वन्यजीवों के संरक्षण पर बल दिया गया।
ग्राम प्रधान मुरलीधर वर्मा की अध्यक्षता में हुई गोष्ठी में रेंजर मोबीन आरिफ ने बताया कि बाघ के दिखने पर 20 लोग समूह बनाकर हांका लगाएं। खेतों में समूह बनाकर जाएं। छोटे बच्चों को स्कूल, खेल मैदान, बाजार अकेले न भेजें, खेतों में काम करते वक्त रेडियो या मोबाइल से ध्वनि करें। क्योंकि बाघ अक्सर हमला बैठे हुए लोगों पर करता है। गन्ने में बाघ दिखने पर सूचना वन चौकी पर दें, हो सके तो पालतू कुत्तों को साथ में खेत पर ले जाएं, खेतों में काम करते वक्त सिर पर हेलमेट, नेक पैड पहने, फसल की रखवाली मचान पर करें।
फारेस्टर जगदीश वर्मा ने बताया कि फसलों की सिंचाई, पलेवा करने के लिए पंपसेट या मोटर में ऑटो कटर लगाएं, रात में घर से बाहर न निकलें, बाघ के शावक दिखने पर उन्हें बाघिन के पास अपने परिवार में जाने दें। संवाद
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दुधवा नेशनल पार्क में बाघ संरक्षण माह के अंतर्गत एंटी स्नेयर वॉक अभियान चलाया गया। जिसका नेतृत्व उपनिदेशक मनोज सोनकर ने किया। इसके तहत विभिन्न उपकरणों से यह पता लगाने की कोशिश की गई कि कहीं शिकार के लिए कुड़का, खाबड़ आदि तो नहीं लगाए गए हैं। बाघ संरक्षण माह के तहत गश्त भी तेज कर दी गई है। उपनिदेशक ने बताया कि सर्दियों के मौसम में गश्त सुस्त हो जाने से शिकारी सक्रिय हो जाते हैं। इस मौसम में शिकार की आशंका ज्यादा रहती हैं। बाघ संरक्षण माह के तहत बफरजोन में भी जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। बाघ संरक्षण माह पूरे दिसंबर चलेगा। इसमें पूरे माह जंगल से सटे इलाकों में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा और बाघ मित्रों का भी चयन किया जाएगा।
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दुधवा टाइगर रिजर्व के कतर्निया घाट (वन्यजीव विहार) में हुई गोष्ठी को संबोधित करते हुए डीएफओ यशवंत ने बताया कि तराई क्षेत्र में मानव-बाघ संघर्ष एक बड़ी समस्या है। इससे निपटने के लिए वन विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। इसके प्रति जागरूकता पैदा करने में मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। गोष्ठी में विश्व प्रकृति निधि (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी दबीर हसन ने भी विचार रखे।
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गोष्ठी में बताए बाघ से बचाव के उपाय
ममरी। बाघ संरक्षण माह के तहत मोहम्मदी महेशपुर रेंज के वनकर्मियों ने सहजनिया गांव के विद्यालय में गोष्ठी कर ग्रामीणों को बाघ से बचाव के उपाय बताकर वन्यजीवों के संरक्षण पर बल दिया गया।
ग्राम प्रधान मुरलीधर वर्मा की अध्यक्षता में हुई गोष्ठी में रेंजर मोबीन आरिफ ने बताया कि बाघ के दिखने पर 20 लोग समूह बनाकर हांका लगाएं। खेतों में समूह बनाकर जाएं। छोटे बच्चों को स्कूल, खेल मैदान, बाजार अकेले न भेजें, खेतों में काम करते वक्त रेडियो या मोबाइल से ध्वनि करें। क्योंकि बाघ अक्सर हमला बैठे हुए लोगों पर करता है। गन्ने में बाघ दिखने पर सूचना वन चौकी पर दें, हो सके तो पालतू कुत्तों को साथ में खेत पर ले जाएं, खेतों में काम करते वक्त सिर पर हेलमेट, नेक पैड पहने, फसल की रखवाली मचान पर करें।
फारेस्टर जगदीश वर्मा ने बताया कि फसलों की सिंचाई, पलेवा करने के लिए पंपसेट या मोटर में ऑटो कटर लगाएं, रात में घर से बाहर न निकलें, बाघ के शावक दिखने पर उन्हें बाघिन के पास अपने परिवार में जाने दें। संवाद