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लोगों ने भेड़िए को समझा बाघ, दहशत
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ममरी। हैदराबाद थाना क्षेत्र के गांव मूड़ा दीक्षित में रविवार शाम लोग खेत पर काम कर रहे थे। उसी समय उन्हें खेत में दो वन्य जीव दिखाई दिए, जिन्हें बाघ समझकर लोगों के होश उड़ गए और भगदड़ मच गई।
पूर्व प्रधान और गांव वालों की सूचना पर पहुंचे महेशपुर रेंज के फॉरेस्टर जगदीश वर्मा, श्याम किशोर शुक्ल आदि वनकर्मियों ने ग्रामीणों द्वारा बताए गए स्थान का जब निरीक्षण किया तो पता चला कि वह बाघ नहीं बल्कि भेड़िए के पग चिह्न थे। फिर भी लोग बाघ होने की जिद पर अड़े रहे, जिन्हें वनकर्मियों ने बाघ और भेड़िए के पंजे का अंतर बताकर शांत किया। रेंजर मोबीन आरिफ ने बताया कि भेड़ियों को देख भयभीत गांव वालों को वन्य जीवों के बारे में जानकारी देने के लिए गांव में बैठक होगी। उनका कहना है कि गांव के आसपास गन्ने के खेतों को छोड़ जब कोसों दूर जंगल का नामोनिशान ही नहीं है तो वहां बाघ के होने का सवाल ही नहीं होता। बताया कि इससे पूर्व दो भेड़िए बिलहरी गांव के समीप विचरण करते देखे गए थे। संवाद
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पूर्व प्रधान और गांव वालों की सूचना पर पहुंचे महेशपुर रेंज के फॉरेस्टर जगदीश वर्मा, श्याम किशोर शुक्ल आदि वनकर्मियों ने ग्रामीणों द्वारा बताए गए स्थान का जब निरीक्षण किया तो पता चला कि वह बाघ नहीं बल्कि भेड़िए के पग चिह्न थे। फिर भी लोग बाघ होने की जिद पर अड़े रहे, जिन्हें वनकर्मियों ने बाघ और भेड़िए के पंजे का अंतर बताकर शांत किया। रेंजर मोबीन आरिफ ने बताया कि भेड़ियों को देख भयभीत गांव वालों को वन्य जीवों के बारे में जानकारी देने के लिए गांव में बैठक होगी। उनका कहना है कि गांव के आसपास गन्ने के खेतों को छोड़ जब कोसों दूर जंगल का नामोनिशान ही नहीं है तो वहां बाघ के होने का सवाल ही नहीं होता। बताया कि इससे पूर्व दो भेड़िए बिलहरी गांव के समीप विचरण करते देखे गए थे। संवाद
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