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बाघिन शिकार मामले की जांच में आई तेजी, वन विभाग ने उड़ाए ड्रोन
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बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की मैलानी रेंज जंगल के निकट एक खेत से शिकार हुई बाघिन जांच मामले की रफ्तार में तेजी आई है। मरने से पहले इस बाघिन का मूवमेंट कहां-कहां रहा, इस बात की जानकारी के लिए रविवार वन विभाग की टीम ने घटनास्थल के आस-पास इलाके के साथ ही बरौंछा नाले में ड्रोन कैमरे उड़ाए गए।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उपनिदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि मैलानी रेंज के जटपुरा बीट जंगल से सटे एक खेत में मृत मिली बाघिन मामले की जांच के लिए ट्रेनी आईएफएस/ प्रभारी रेंजर राजेश कुमार के नेतृत्व में गठित वन कर्मियों की टीम ने रविवार घटनास्थल के आसपास और बरौंछा नाले क्षेत्र में ड्रोन कैमरे उड़ाए गए। उड़ाए गए ड्रोन कैमरों में इस बात का पता लगाया गया कि मरने से पहले बाघिन ने कहां-कहां अपना ठिकाना बनाया था। प्यास लगने पर बाघिन बरौंछा नाले में पानी भरे स्थलों पर गई या नहीं। इसके अलावा भूख लगने पर बाघिन ने किसी हिरन आदि शाकाहारी वन्यजीवों का शिकार किया या नहीं। डॉ. पटेल ने बताया कि इन बातों को केंद्र बिंदु बनाते हुए नाले में भरे पानी वाले स्थानों पर ड्रोन उड़ाए गए। साथ ही चरी खेत के आसपास इलाके में भी बाघिन के ठिकानों की लोकेशन ट्रेस की गई।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज में स्थित जटपुरा बीट जंगल से सटे हरदुआ गांव के पास एक खेत में 11 अगस्त को बाघिन का शव मिला था। उसे नायलान की रस्सी से फंदा लगाया गया था। चूंकि इस ढंग से शिकार का यह पहला मामला था। इसको लेकर वन विभाग ने अपर मुख्य वन संरक्षक और कानपुर जू के डाइरेक्टर सुनील चौधरी कही अध्यक्षता में दो सदस्यीय कमेटी गठित कर मामले की जांच के आदेश दिए थे। गठित जांच कमेटी ने बृहस्पतिवार को घटनास्थल पर पहुंच कर मामले की गहराई से जांच करते हुए वनाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए थे। इस मामले में वन विभाग ने आनन-फानन में कार्रवाई करते हुए बाघिन की हत्या के दूसरे दिन हरदुआ, ढ़ाका और सीताराम पुर गांव में ताबड़तोड़ दबिशें देकर पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर उन्हें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत जेल भेज दिया गया। साथ ही वन विभाग नामजद सात अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार दबिशें दे रहा रहा है।
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दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उपनिदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि मैलानी रेंज के जटपुरा बीट जंगल से सटे एक खेत में मृत मिली बाघिन मामले की जांच के लिए ट्रेनी आईएफएस/ प्रभारी रेंजर राजेश कुमार के नेतृत्व में गठित वन कर्मियों की टीम ने रविवार घटनास्थल के आसपास और बरौंछा नाले क्षेत्र में ड्रोन कैमरे उड़ाए गए। उड़ाए गए ड्रोन कैमरों में इस बात का पता लगाया गया कि मरने से पहले बाघिन ने कहां-कहां अपना ठिकाना बनाया था। प्यास लगने पर बाघिन बरौंछा नाले में पानी भरे स्थलों पर गई या नहीं। इसके अलावा भूख लगने पर बाघिन ने किसी हिरन आदि शाकाहारी वन्यजीवों का शिकार किया या नहीं। डॉ. पटेल ने बताया कि इन बातों को केंद्र बिंदु बनाते हुए नाले में भरे पानी वाले स्थानों पर ड्रोन उड़ाए गए। साथ ही चरी खेत के आसपास इलाके में भी बाघिन के ठिकानों की लोकेशन ट्रेस की गई।
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दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज में स्थित जटपुरा बीट जंगल से सटे हरदुआ गांव के पास एक खेत में 11 अगस्त को बाघिन का शव मिला था। उसे नायलान की रस्सी से फंदा लगाया गया था। चूंकि इस ढंग से शिकार का यह पहला मामला था। इसको लेकर वन विभाग ने अपर मुख्य वन संरक्षक और कानपुर जू के डाइरेक्टर सुनील चौधरी कही अध्यक्षता में दो सदस्यीय कमेटी गठित कर मामले की जांच के आदेश दिए थे। गठित जांच कमेटी ने बृहस्पतिवार को घटनास्थल पर पहुंच कर मामले की गहराई से जांच करते हुए वनाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए थे। इस मामले में वन विभाग ने आनन-फानन में कार्रवाई करते हुए बाघिन की हत्या के दूसरे दिन हरदुआ, ढ़ाका और सीताराम पुर गांव में ताबड़तोड़ दबिशें देकर पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर उन्हें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत जेल भेज दिया गया। साथ ही वन विभाग नामजद सात अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार दबिशें दे रहा रहा है।
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