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आबादी क्षेत्र में बाघ ने घोड़े को मार डाला
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घटनास्थल पर मिले बाघ के पगचिह्न। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
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मैलानी। डीटीआर बफर जोन मैलानी रेंज की खरेहटा बीट के जंगल से निकले बाघ ने शनिवार की सुबह सुवाबोझ स्थित एक ईंट भट्ठे के पास घोड़े पर हमला कर उसे मार डाला। इससे ग्रामीणों में दहशत है। मौके पर पहुंचे कार्यवाहक पशु चिकित्साधिकारी मैलानी डॉ राजेंद्र प्रताप ने बाघ के हमले में घोड़े की मौत की पुष्टि की।
ग्राम पंचायत खरेहटा के ग्राम राजेपुर निवासी मोसीन ने बताया कि सुबह लगभग साढ़े छह बजे अपने घोड़े को उमर के भट्ठे के पास खाली पड़े मैदान में चरने के लिए बांधकर आया था। कुछ देर बाद भट्ठे पर काम करने वाले मजदूरों ने उसे बताया कि पहले से गन्ने के खेत में बैठे बाघ ने घोड़े को मार डाला। सूचना पर ग्रामीणों के साथ वह मौके पर गया, तो मुजीम के गन्ने के खेत के कुछ अंदर घोड़े का शव पड़ा था, जिसकी गर्दन कटी हुई थी।
उसने बताया कि बाघ घोड़े के शव को खींचकर करीब डेढ़ सौ मीटर दूर सुवाबोझ निवासी मुजीम के खेत में ले गया। रेंजर मैलानी केपी सिंह ने बताया कि मौके पर बाघ के पग चिह्न मिले हैं।उन्होंने ग्रामीणों से जंगल के किनारे और खेतों में समूह में और शोरगुल करते हुए खेतों में जाने के लिए कहा है। ताकीद की है कि बच्चों को खेेतों में न भेजें।
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मोसीन की रोजी-रोटी का जरिया था घोड़ा
राजेपुर निवासी मोसीन ने बताया कि वह भट्ठे पर घोड़ा बुग्गी चलाकर अपने परिवार को पालता था। घोड़ा मर जाने से उसकी रोजी-रोटी का सहारा छिन गया है। उसे वन विभाग से मुआवजा मिलने की आस है। संवाद
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ग्राम पंचायत खरेहटा के ग्राम राजेपुर निवासी मोसीन ने बताया कि सुबह लगभग साढ़े छह बजे अपने घोड़े को उमर के भट्ठे के पास खाली पड़े मैदान में चरने के लिए बांधकर आया था। कुछ देर बाद भट्ठे पर काम करने वाले मजदूरों ने उसे बताया कि पहले से गन्ने के खेत में बैठे बाघ ने घोड़े को मार डाला। सूचना पर ग्रामीणों के साथ वह मौके पर गया, तो मुजीम के गन्ने के खेत के कुछ अंदर घोड़े का शव पड़ा था, जिसकी गर्दन कटी हुई थी।
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उसने बताया कि बाघ घोड़े के शव को खींचकर करीब डेढ़ सौ मीटर दूर सुवाबोझ निवासी मुजीम के खेत में ले गया। रेंजर मैलानी केपी सिंह ने बताया कि मौके पर बाघ के पग चिह्न मिले हैं।उन्होंने ग्रामीणों से जंगल के किनारे और खेतों में समूह में और शोरगुल करते हुए खेतों में जाने के लिए कहा है। ताकीद की है कि बच्चों को खेेतों में न भेजें।
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मोसीन की रोजी-रोटी का जरिया था घोड़ा
राजेपुर निवासी मोसीन ने बताया कि वह भट्ठे पर घोड़ा बुग्गी चलाकर अपने परिवार को पालता था। घोड़ा मर जाने से उसकी रोजी-रोटी का सहारा छिन गया है। उसे वन विभाग से मुआवजा मिलने की आस है। संवाद