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दुधवा टाइगर रिजर्व में बनेगा बाघों के लिए कॉरिडोर
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लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व के बाघ और अन्य वन्यजीव जंगल में एक जगह से दूसरी जगह आसानी से आ जा सकें, इसके लिए वन विभाग कॉरिडोर बनाने की संभावना तलाश रहा है। इसी के चलते भारतीय वन्यजीव संस्थान की एक टीम इन दिनों दुधवा में सर्वे कर रही है।
दुधवा टाइगर रिजर्व की इंडो नेपाल सीमा पर बाघ और दूसरे वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक गलियारे तैयार करने की संभावनाएं तलाशने के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून की एक तीन सदस्यीय टीम इन दिनों दुधवा में है। इस टीम में डॉ वाईवी झाला, प्रो कमर कुरैशी और अयान साधू शामिल हैं। यह टीम दुधवा टाइगर रिजर्व के गौरीफंटा, चंदनचौकी, वनकटी, बेलरायां और दुधवा में करीब 125 किलोमीटर सीमा का भ्रमण कर सर्वे कर चुकी है। टीम ने पाया कि कई जगह पर ऐसे स्थल हैं, जहां जंगल या घास के मैदान न होने से बाघों और दूसरे वन्यजीवों का मूवमेंट बाधित होता है। इन जगहों पर किस तरह बाधाओं को दूर किया जा सकता है, टीम इसके लिए संभावित उपायों पर मंथन करेगी और अपनी सिफारिश भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून को सौंपेगी।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि बाघों के मूवमेंट में बाधाओं को दूर करने के लिए गलियारे बनाए जाने की योजना है। इसके लिए जंगल के रास्तों पर गैरजरूरी एलाइनमेंट हटाए जा सकते हैं। जरूरत के अनुसार ओवरपास भी बनाए जा सकते हैं। भारतीय वन्यजीव संस्थान की टीम भारत नेपाल सीमा पर बफर जोन और कर्तनियाघाट में भी सर्वे करेगी।
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दुधवा टाइगर रिजर्व की इंडो नेपाल सीमा पर बाघ और दूसरे वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक गलियारे तैयार करने की संभावनाएं तलाशने के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून की एक तीन सदस्यीय टीम इन दिनों दुधवा में है। इस टीम में डॉ वाईवी झाला, प्रो कमर कुरैशी और अयान साधू शामिल हैं। यह टीम दुधवा टाइगर रिजर्व के गौरीफंटा, चंदनचौकी, वनकटी, बेलरायां और दुधवा में करीब 125 किलोमीटर सीमा का भ्रमण कर सर्वे कर चुकी है। टीम ने पाया कि कई जगह पर ऐसे स्थल हैं, जहां जंगल या घास के मैदान न होने से बाघों और दूसरे वन्यजीवों का मूवमेंट बाधित होता है। इन जगहों पर किस तरह बाधाओं को दूर किया जा सकता है, टीम इसके लिए संभावित उपायों पर मंथन करेगी और अपनी सिफारिश भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून को सौंपेगी।
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दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि बाघों के मूवमेंट में बाधाओं को दूर करने के लिए गलियारे बनाए जाने की योजना है। इसके लिए जंगल के रास्तों पर गैरजरूरी एलाइनमेंट हटाए जा सकते हैं। जरूरत के अनुसार ओवरपास भी बनाए जा सकते हैं। भारतीय वन्यजीव संस्थान की टीम भारत नेपाल सीमा पर बफर जोन और कर्तनियाघाट में भी सर्वे करेगी।
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