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जानलेवा साबित हो रहे हैं नदी-नालों में मौजूद मगरमच्छ

Thu, 22 Apr 2021 12:04 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 22 Apr 2021 12:04 AM IST
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wild animal
घोसियाना धूसा खुर्द गांव में गमजदा माता-पिता और मासूम बहनें। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व जंगल के किनारे और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के नदी नालों और तालाबों में बड़ी संख्या में मगरमच्छ मौजूद हैं। बाढ़ गुजरने के बाद नदियों से निकलकर मगरमच्छ छोटी नदियों, तालाबों और नालों में पहुंच जाते हैं। जहां यह मगरमच्छ अक्सर नालों के किनारे पालतू मशेवशियों के चराने ले जाने वाले चरवाहों और उनके पालतू पशुओं के लिए जानलेवा साबित होते हैं।
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जिला खीरी में बाढ़ के दौरान शारदा, घाघरा और सुहेली जैसी बड़ी नदियों से निकलकर मगरमच्छ सहायक नदियों, तालाबों और नालों में आ जाते हैं। बाढ़ गुजरने के बाद यह मगरमच्छ स्थायी रूप से इन्हीं नदी नालों और तालाबों में रह जाते हैं। मैलानी, भीरा, पलिया, संपूर्णानगर के अलावा निघासन और धौरहरा के नदी नालों में इन दिनों बड़ी संख्या में मगरमच्छ प्रवास कर रहे हैं। जिसके कारण आए दिन मगरमच्छ पालतू पशुओं और इंसानों को निवाला बना रहे हैं। यहीं नहीं कभी-कभी तो यह मगरमच्छ नालों और तालाबों से निकलकर आबादी क्षेत्र में आ जाते हैं। साथ ही गांव से सटे तालाबों में पालतू मछलियों को चट कर जाते हैं। इससे मछली पालक भी परेशान हैं। उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। यहीं नहीं गर्मियों के दिनों में गांव से सटे तालाबों का पानी खत्म होने के बाद मगरमच्छ अपना रुख आबादी को ओर करते हैं। जहां पालतू मवेशियों और इंसानों पर हमला कर या तो घायल कर रहे हैं या उन्हें निगल रहे हैं।
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पुत्र का सुराग नहीं मिलने पर परिजन का रोरोकर बुरा हाल
धौरहरा कोतवाली क्षेत्र के घोसियाना धूसा खुर्द गांव में मगरमच्छ की गिरफ्त में आया 13 वर्षीय किशोर दिशान अपने मां-बाप का इकलौता बेटा है। पिता रहीश अली और उसकी मां परमीन ने अपने बेटे को लेकर तमाम सपने बुने हैं। पुत्र का सुराग न मिलने पर परिजन का रो-रो कर बुरा हाल है। मां परमीन पुत्र की आस में नाले की ओर टकटकी लगाए हुए हैं। घोसियाना धूसा खुर्द गांव से बिल्कुल सटे नाले में मगरमच्छ की मौजूदगी से गांव निवासी शहंशाह, गुड्डू, अनीस, राजू, नौशाद, आजाद, इस्माइल, अकूप आदि में दहशत है। उन्हें अपने बच्चों और पालतू मवेशियों की सुरक्षा का डर सता रहा है। ग्रामीण बच्चों और पालतू मवेशियों को नाले की ओर भेजने से डरने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मगरमच्छ गांव से सटे तालाबों और नालों में प्रवास कर रहे हैं। बावजूद इसके वन विभाग का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि घटना की सूचना देने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर काफी देर बाद पहुंची। उधर दिशान के चाचा अनीस अली ने बुधवार दोपहर धौरहरा कोतवाली में घटना की तहरीर दी है।
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