{"_id":"69823fde05dcd93b8103f9ea","slug":"when-courage-smiled-in-the-face-of-death-lakhimpur-news-c-120-1-lkh1036-167409-2026-02-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lakhimpur Kheri News: जब मौत की आहट के सामने हौसला मुस्कराया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lakhimpur Kheri News: जब मौत की आहट के सामने हौसला मुस्कराया
Wed, 04 Feb 2026 12:05 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 04 Feb 2026 12:05 AM IST
विज्ञापन
राधा देवी
- फोटो : बहराइच में भाजपा कार्यालय पर प्रेसवार्ता करते पदाधिकारी।
मैगलगंज। कैंसर एक ऐसा शब्द है, जिसे सुनते ही अक्सर उम्मीदें कांपने लगती हैं। डर, अनिश्चितता और टूटते सपनों के बीच बहुत कम लोग ऐसे होते हैं, जो बीमारी को नहीं, बल्कि हालात को हराने की ठान लेते हैं। मैगलगंज क्षेत्र के पिपरी अजीज गांव की राधा देवी और लिधियाई गांव के नजीर अहमद ऐसे ही लोग हैं, जिनकी कहानी दर्द से शुरू होकर हिम्मत पर खत्म होती है।
साल 2017 में राधा देवी की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। पहले तो सबने सोचा कि बीमारी साधारण होगी लेकिन दिन बीतते गए और इलाज बदलते गए, पर राहत नहीं मिली। आखिरकार लखनऊ पीजीआई में जांच हुई। डॉक्टरों ने जब उन्हें थायराइड कैंसर बताया तो पूरे परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई।
उस पल राधा के चेहरे पर डर जरूर था लेकिन आंखों में हार नहीं। परिवार टूट रहा था लेकिन राधा खुद को समेट रही थीं। पति अखिलेश शुक्ला बताते हैं कि इलाज लंबा और दर्दनाक था। दो लेजर ऑपरेशन, फिर साल 2025–26 में दो बड़ी सर्जरी। घर, जमीन, जमा-पूंजी... सब कुछ दांव पर लगा दिया। करीब दो करोड़ रुपये खर्च हो गए, लेकिन राधा ने कभी यह नहीं कहा कि अब बस हो गया। इलाज के हर दिन में दर्द था, पर हर सुबह में उम्मीद और आज राधा देवी फिर मुस्कराती हैं। वह मुस्कान, जो किसी जीत से कम नहीं।
विज्ञापन
उधर, लिधियाई गांव के नजीर अहमद की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। साल 2024 में जब उन्हें मुंह के कैंसर का पता चला, तो जैसे वक्त थम गया। पहले सीतापुर, फिर शाहजहांपुर में इलाज हुआ लेकिन बीमारी ने पीछा नहीं छोड़ा। आखिरकार वे लखनऊ के कल्याण सिंह कैंसर इंस्टीट्यूट पहुंचे। नजीर अहमद बताते हैं कि डर बहुत लगा था लेकिन बच्चों की आंखों में उम्मीद देखी, तो टूट नहीं पाया।
इलाज में करीब 10 लाख रुपये खर्च हुए। हर कीमोथेरेपी और दवा, उनके हौसले की परीक्षा लेती रही लेकिन नजीर झुके नहीं। आज वह न सिर्फ स्वस्थ हैं, बल्कि दूसरों को भी यही कहते हैं कि कैंसर से भागो मत, लड़ो। संवाद
विज्ञापन
साल 2017 में राधा देवी की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। पहले तो सबने सोचा कि बीमारी साधारण होगी लेकिन दिन बीतते गए और इलाज बदलते गए, पर राहत नहीं मिली। आखिरकार लखनऊ पीजीआई में जांच हुई। डॉक्टरों ने जब उन्हें थायराइड कैंसर बताया तो पूरे परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई।
विज्ञापन
उस पल राधा के चेहरे पर डर जरूर था लेकिन आंखों में हार नहीं। परिवार टूट रहा था लेकिन राधा खुद को समेट रही थीं। पति अखिलेश शुक्ला बताते हैं कि इलाज लंबा और दर्दनाक था। दो लेजर ऑपरेशन, फिर साल 2025–26 में दो बड़ी सर्जरी। घर, जमीन, जमा-पूंजी... सब कुछ दांव पर लगा दिया। करीब दो करोड़ रुपये खर्च हो गए, लेकिन राधा ने कभी यह नहीं कहा कि अब बस हो गया। इलाज के हर दिन में दर्द था, पर हर सुबह में उम्मीद और आज राधा देवी फिर मुस्कराती हैं। वह मुस्कान, जो किसी जीत से कम नहीं।
विज्ञापन
उधर, लिधियाई गांव के नजीर अहमद की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। साल 2024 में जब उन्हें मुंह के कैंसर का पता चला, तो जैसे वक्त थम गया। पहले सीतापुर, फिर शाहजहांपुर में इलाज हुआ लेकिन बीमारी ने पीछा नहीं छोड़ा। आखिरकार वे लखनऊ के कल्याण सिंह कैंसर इंस्टीट्यूट पहुंचे। नजीर अहमद बताते हैं कि डर बहुत लगा था लेकिन बच्चों की आंखों में उम्मीद देखी, तो टूट नहीं पाया।
इलाज में करीब 10 लाख रुपये खर्च हुए। हर कीमोथेरेपी और दवा, उनके हौसले की परीक्षा लेती रही लेकिन नजीर झुके नहीं। आज वह न सिर्फ स्वस्थ हैं, बल्कि दूसरों को भी यही कहते हैं कि कैंसर से भागो मत, लड़ो। संवाद

राधा देवी- फोटो : बहराइच में भाजपा कार्यालय पर प्रेसवार्ता करते पदाधिकारी।