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शाबाश बंटू! नाज है तुम पर
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Wed, 24 May 2017 11:44 PM IST
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बंटू
- फोटो : अमर उजाला
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तमाशबीन मदद करते तो बच सकती थी पांचों की जान
जिस समय पांचों छात्र नदी में नहाते समय डूब रहे थे और वहां पर चीखपुकार मची थी। उस समय कई ग्रामीण और राहगीर मौके पर जमा हो गए, लेकिन किसी ने युवकों को बचाने की कोशिश नहीं की। दो युवकों को जिंदा निकालने वाले कोरियाना गढ़ी निवासी बंटू की मानें तो उन्हें एक अज्ञात महिला ने तीन लड़कों के डूब जाने की सूचना दी थी, जिस पर वह दौड़कर मौके पर पहुंच पाता, इससे पहले ही दो युवक तीनों साथियों को बचाने के लिए नदी में कूद पड़े और वे भी डूबने लगे। इसी बीच वह मौके पर पहुंच गया और नदी में डूब रहे दोनों लड़कों को निकालने की कोशिश करने के साथ चीख-चीखकर वहां खड़े लोगों से मदद मांगने लगा, लेकिन लोग आगे नहीं आए। वह कहता है कि आज मुझे लगा कि मानवता मर गई है। यदि तमाशबीन लोग उसकी मदद करते तो पांचों युवकों की जान बचाई जा सकती थी। हालांकि उसे इस बात का मलाल है कि जिन दो छात्रों को उसने बाहर निकला, उनकी भी जान नहीं बच पाई।
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जिस समय पांचों छात्र नदी में नहाते समय डूब रहे थे और वहां पर चीखपुकार मची थी। उस समय कई ग्रामीण और राहगीर मौके पर जमा हो गए, लेकिन किसी ने युवकों को बचाने की कोशिश नहीं की। दो युवकों को जिंदा निकालने वाले कोरियाना गढ़ी निवासी बंटू की मानें तो उन्हें एक अज्ञात महिला ने तीन लड़कों के डूब जाने की सूचना दी थी, जिस पर वह दौड़कर मौके पर पहुंच पाता, इससे पहले ही दो युवक तीनों साथियों को बचाने के लिए नदी में कूद पड़े और वे भी डूबने लगे। इसी बीच वह मौके पर पहुंच गया और नदी में डूब रहे दोनों लड़कों को निकालने की कोशिश करने के साथ चीख-चीखकर वहां खड़े लोगों से मदद मांगने लगा, लेकिन लोग आगे नहीं आए। वह कहता है कि आज मुझे लगा कि मानवता मर गई है। यदि तमाशबीन लोग उसकी मदद करते तो पांचों युवकों की जान बचाई जा सकती थी। हालांकि उसे इस बात का मलाल है कि जिन दो छात्रों को उसने बाहर निकला, उनकी भी जान नहीं बच पाई।