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मौसम दे रहा साथ, आलू किसानों की बल्ले-बल्ले
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 19 May 2018 01:21 AM IST
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तीन साल से मंदी की मार झेल रहे तराई के आलू उत्पादक किसानों के लिए यह सीजन राहत भरा है। शुरू में ही आलू के दाम अच्छे होने से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। आलू के दाम सात सौ रुपये प्रति 50 किलो तक पहुंचने से किसानों की बल्ले-बल्ले हो गई है। आलू उत्पादक किसानों के अनुसार इस वर्ष आलू का रकबा घटने से उत्पादन घटा है, वहीं मांग बढ़ने से किसानों को आलू के अच्छे दाम मिल रहे हैं। इस बार आलू किसान पुराना घाटा पूरा होने से काफी खुश हैं।
वर्ष 2015-16 में आलू का उत्पादन तो अच्छा हुआ, लेकिन मंदी से किसानों को उपज का पूरा फायदा नहीं मिला। 2017 में किसानों ने अच्छे मुनाफे के लालच में रकबा बढ़ाकर आलू बोया, जिससे जबर्दस्त उत्पादन हुआ। इस जनपद समेत पड़ोसी शाहजहांपुर जिले के कोल्ड स्टोरेज भर जाने के बाद भी बड़ी मात्रा में आलू किसानों के पास बच गया, जो उन्हें बहुत सस्ते दामों पर बेचना पड़ा। जो आलू बिका नहीं उसे किसानों को फेंकना पड़ा। दो सालों से आलू फसल की हुई दुर्गति से सबक लेकर कर्जदार हुए किसानों का आलू फसल से मोह भंग हो गया। इससे किसानों ने इस साल कम रकबे में आलू बोया, बावजूद इसके अच्छा उत्पादन होने से किसानों को बाजार में मूल्य भी अच्छा मिल रहा है। इससे किसानों की बल्ले-बल्ले हो गई है।
बांकेगंज इलाके में कम पैदा हुआ आलू
बांकेगंज। जिले में बांकेगंज समेत कई इलाकों में आलू उत्पादन सर्वाधिक होता है। पिछले कई सालों से रुला रही गन्ने की उपज से इलाकाई किसानों का जब मोह भंग हुआ तो उन्होंने एक बड़े रकबे में आलू फसल की बुवाई की। पहले कुछ सालों में तो आलू फसल के बेहतर मूल्य मिलने से उनका उत्साह बढ़ गया, लेकिन 2015 से लगातार मंदी के कारण नुकसान को देखते हुए इस साल बांकेगंज इलाके के आलू उत्पादक किसानों ने पिछले वर्षों की अपेक्षा इस साल आलू फसल का रकबा आधा कर दिया। कम रकबा में आलू बुवाई के बाद फसल उत्पादन तो अच्छा हुआ, लेकिन बाजार में आलू की मांग के चलते दामों में बढ़ोत्तरी होने पर पिछले दो सालों से घाटा झेल रहे आलू उत्पादक किसानों की बाछे खिल गईं।
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इन कारणों से बढ़े दाम
- तीन साल से आलू के दाम में गिरावट रही।
- लगातार गिरावट से लघु किसान इस बाद आलू उत्पादन से हट गया।
- आलू का उत्पादन काफी कम हुआ, जिससे मांग बढ़ी।
प्रति एकड़ आलू बुवाई में ये आती है लागत
- 15 क्विंटल आलू बीज।
- आलू बीज खर्च, 12 हजार।
- खाद और कीटनाशक दवाएं खर्च, लगभग 15 हजार।
-सिंचाई खर्च लगभग पांच हजार रूपये।
- जुताई -बुवाई खर्च लगभग दस हजार।
-फसल खोदाई खर्च, लगभग दस हजार।
एक एकड़ आलू बुवाई पर कुल खर्च लगभग 52 हजार।
उत्पादन प्रति एकड़..
- 100 क्विंटल लगभग।
- मार्केट में आलू बिक्री, एक हजार से 14 सौ रुपये प्रति क्विंटल।
आलू फसल बुवाई का समय
अक्टूबर महीने में पूरे 31 दिनों तक।
फरवरी माह में फसल पककर तैयार होती है।
अच्छे रहेंगे दाम
पश्चिम बंगाल और बिहार में आलू का उत्पादन काफी कम हुआ है, जिससे आलू न मिलने से महंगाई बढ़ी है। इससे तराई समेत यूपी के आलू उत्पादकों को इसका लाभ मिलेगा। इस बार आलू के दाम बढ़े रहेंगे।
वाहिद अली, उपनिदेशक, उद्यान (फल/ सब्जी)
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वर्ष 2015-16 में आलू का उत्पादन तो अच्छा हुआ, लेकिन मंदी से किसानों को उपज का पूरा फायदा नहीं मिला। 2017 में किसानों ने अच्छे मुनाफे के लालच में रकबा बढ़ाकर आलू बोया, जिससे जबर्दस्त उत्पादन हुआ। इस जनपद समेत पड़ोसी शाहजहांपुर जिले के कोल्ड स्टोरेज भर जाने के बाद भी बड़ी मात्रा में आलू किसानों के पास बच गया, जो उन्हें बहुत सस्ते दामों पर बेचना पड़ा। जो आलू बिका नहीं उसे किसानों को फेंकना पड़ा। दो सालों से आलू फसल की हुई दुर्गति से सबक लेकर कर्जदार हुए किसानों का आलू फसल से मोह भंग हो गया। इससे किसानों ने इस साल कम रकबे में आलू बोया, बावजूद इसके अच्छा उत्पादन होने से किसानों को बाजार में मूल्य भी अच्छा मिल रहा है। इससे किसानों की बल्ले-बल्ले हो गई है।
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बांकेगंज इलाके में कम पैदा हुआ आलू
बांकेगंज। जिले में बांकेगंज समेत कई इलाकों में आलू उत्पादन सर्वाधिक होता है। पिछले कई सालों से रुला रही गन्ने की उपज से इलाकाई किसानों का जब मोह भंग हुआ तो उन्होंने एक बड़े रकबे में आलू फसल की बुवाई की। पहले कुछ सालों में तो आलू फसल के बेहतर मूल्य मिलने से उनका उत्साह बढ़ गया, लेकिन 2015 से लगातार मंदी के कारण नुकसान को देखते हुए इस साल बांकेगंज इलाके के आलू उत्पादक किसानों ने पिछले वर्षों की अपेक्षा इस साल आलू फसल का रकबा आधा कर दिया। कम रकबा में आलू बुवाई के बाद फसल उत्पादन तो अच्छा हुआ, लेकिन बाजार में आलू की मांग के चलते दामों में बढ़ोत्तरी होने पर पिछले दो सालों से घाटा झेल रहे आलू उत्पादक किसानों की बाछे खिल गईं।
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इन कारणों से बढ़े दाम
- तीन साल से आलू के दाम में गिरावट रही।
- लगातार गिरावट से लघु किसान इस बाद आलू उत्पादन से हट गया।
- आलू का उत्पादन काफी कम हुआ, जिससे मांग बढ़ी।
प्रति एकड़ आलू बुवाई में ये आती है लागत
- 15 क्विंटल आलू बीज।
- आलू बीज खर्च, 12 हजार।
- खाद और कीटनाशक दवाएं खर्च, लगभग 15 हजार।
-सिंचाई खर्च लगभग पांच हजार रूपये।
- जुताई -बुवाई खर्च लगभग दस हजार।
-फसल खोदाई खर्च, लगभग दस हजार।
एक एकड़ आलू बुवाई पर कुल खर्च लगभग 52 हजार।
उत्पादन प्रति एकड़..
- 100 क्विंटल लगभग।
- मार्केट में आलू बिक्री, एक हजार से 14 सौ रुपये प्रति क्विंटल।
आलू फसल बुवाई का समय
अक्टूबर महीने में पूरे 31 दिनों तक।
फरवरी माह में फसल पककर तैयार होती है।
अच्छे रहेंगे दाम
पश्चिम बंगाल और बिहार में आलू का उत्पादन काफी कम हुआ है, जिससे आलू न मिलने से महंगाई बढ़ी है। इससे तराई समेत यूपी के आलू उत्पादकों को इसका लाभ मिलेगा। इस बार आलू के दाम बढ़े रहेंगे।
वाहिद अली, उपनिदेशक, उद्यान (फल/ सब्जी)