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अकालगढ़ को तबाह कर रहीं शारदा की लहरें
अमर उजाला ब्यूरो बिजुआ।
Updated Wed, 09 Aug 2017 11:14 PM IST
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बाढ़
- फोटो : अमर उजाला
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जिले की सबसे पुरानी पंजाबियों की बस्ती का खत्म हो सकता वजूद
बचाव की तरीके फेल
लोग खुद ही तोड़ रहे अपना घर
अकालगढ़ को बचाने की सारी कोशिशें शारदा की तेज लहरों के आगे फेल हो गईं। दो दिन से नदी ने का रुख बस्ती की ओर है। बाढ़ खंड ने बचाव के लिए बैंबू कैरेट से लेकर जियो ट्यूब का इस्तेमाल किया था लेकिन कुछ काम न आया।
गोला तहसील की अकालगढ़ बस्ती जिले की सबसे पुरानी पंजाबियों की बस्ती मानी जाती थी। पिछले पखवाड़ेे इस बस्ती पर शारदा का कहर टूटा, जिसके बाद यहां के बलजीत सिंह पुत्र हरदेव सिंह, अमरजीत सिंह पुत्र हरदेव सिंह, हरदेव सिंह पुत्र रतन सिंह ने अपनी पक्की कोठियां तोड़ कर नए ठिकाने पर चले गए थे। इस पखवाड़े उम्मीद थी कि नदी का वेग कम होगा। पर दो दिन से शारदा ने उग्र रूप धर लिया। कटान इतनी तेजी से बढ़ा कि शेष बचे चार और घर तोड़े जाने लगे। बुधवार को सर्वजीत सिंह पुत्र पाल सिंह, अमरवीर सिंह पुत्र पाल सिंह, धर्मेंद्र सिंह पुत्र मंजीत सिंह, जसवंत सिंह पुत्र मनजीत सिंह, अनूप सिंह पुत्र साधू सिंह, जसकरन सिंह पुत्र करम सिंह ने अपने घरों को तोड़ दिया। अब इस गांव का वजूद खत्म होने को है। नदी का वेग अगर यही रहा तो कुछ दिनों में शारदा दक्षिण की ओर बह रहा नाले मरहइया में गिर सकती है।
सैकड़ों लोंगों ने की मदद, परिवार गुरुद्वारे में लिए हैं पनाह
अकालगढ में शारदा की मुसीबत सुनकर नाते रिश्तेदारों के अलावा गांव के लोग भी मदद को पहुंचे हैं। लोग घर को तोड़ने में मदद करने के साथ सामान दूसरी जगह ले जा रहे हैं। वहीं ये सभी परिवार पास के गुरुद्वारे में पनाह लिए है। नदी का कटान इतना तेज था कि लोगों को घरों को जेसीबी मशीन से तोड़ना पड़ा।
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बलदेवपुरवा में कट गई सैकड़ों एकड़ खेती की जमीन
बिजुआ। अकालगढ़ ही नहीं, शारदा बल्देवपुरवा गांव की सैकड़ों एकड़ जमीन में गन्ने की फसल को काट ले गई। बल्देवपुरवा की इस जमीन को बिजुआ समेत कई गांव के काश्तकार जोत रहे थे।
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बचाव की तरीके फेल
लोग खुद ही तोड़ रहे अपना घर
अकालगढ़ को बचाने की सारी कोशिशें शारदा की तेज लहरों के आगे फेल हो गईं। दो दिन से नदी ने का रुख बस्ती की ओर है। बाढ़ खंड ने बचाव के लिए बैंबू कैरेट से लेकर जियो ट्यूब का इस्तेमाल किया था लेकिन कुछ काम न आया।
गोला तहसील की अकालगढ़ बस्ती जिले की सबसे पुरानी पंजाबियों की बस्ती मानी जाती थी। पिछले पखवाड़ेे इस बस्ती पर शारदा का कहर टूटा, जिसके बाद यहां के बलजीत सिंह पुत्र हरदेव सिंह, अमरजीत सिंह पुत्र हरदेव सिंह, हरदेव सिंह पुत्र रतन सिंह ने अपनी पक्की कोठियां तोड़ कर नए ठिकाने पर चले गए थे। इस पखवाड़े उम्मीद थी कि नदी का वेग कम होगा। पर दो दिन से शारदा ने उग्र रूप धर लिया। कटान इतनी तेजी से बढ़ा कि शेष बचे चार और घर तोड़े जाने लगे। बुधवार को सर्वजीत सिंह पुत्र पाल सिंह, अमरवीर सिंह पुत्र पाल सिंह, धर्मेंद्र सिंह पुत्र मंजीत सिंह, जसवंत सिंह पुत्र मनजीत सिंह, अनूप सिंह पुत्र साधू सिंह, जसकरन सिंह पुत्र करम सिंह ने अपने घरों को तोड़ दिया। अब इस गांव का वजूद खत्म होने को है। नदी का वेग अगर यही रहा तो कुछ दिनों में शारदा दक्षिण की ओर बह रहा नाले मरहइया में गिर सकती है।
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सैकड़ों लोंगों ने की मदद, परिवार गुरुद्वारे में लिए हैं पनाह
अकालगढ में शारदा की मुसीबत सुनकर नाते रिश्तेदारों के अलावा गांव के लोग भी मदद को पहुंचे हैं। लोग घर को तोड़ने में मदद करने के साथ सामान दूसरी जगह ले जा रहे हैं। वहीं ये सभी परिवार पास के गुरुद्वारे में पनाह लिए है। नदी का कटान इतना तेज था कि लोगों को घरों को जेसीबी मशीन से तोड़ना पड़ा।
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बलदेवपुरवा में कट गई सैकड़ों एकड़ खेती की जमीन
बिजुआ। अकालगढ़ ही नहीं, शारदा बल्देवपुरवा गांव की सैकड़ों एकड़ जमीन में गन्ने की फसल को काट ले गई। बल्देवपुरवा की इस जमीन को बिजुआ समेत कई गांव के काश्तकार जोत रहे थे।