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उजड़ रही चौसिंघा हिरनों की दुनिया

Wed, 20 May 2015 05:51 PM IST
बांकेगंज
बांकेगंज Updated Wed, 20 May 2015 05:51 PM IST
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Was destroyed Chausinga The world of deer
दस साल पहले तक दक्षिण खीरी वन प्रभाग, और पीलीभीत के जंगलों में बढ़ी चौसिंघा हिरनाें की आबादी में निराशाजनक गिरावट आ रही है। अगर यही हाल रहा तो आने वाले दो-तीन साल में हिरन की यह दुर्लभ और खूबसूरत चौसिंघा प्रजाति तराई की धरती से लुप्त हो जाएगी। माना जा रहा है कि चौसिंघा की आबादी शिकार के चलते घटी है लेकिन वन विभाग इस सबसे लापरवाह है।
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वनविभाग चौसिंघा के संरक्षण के दावे तो कर रहा है, लेकिन इन्हें बचाने के कोई प्रयास नजर नहीं आ रहे हैं।  दक्षिण खीरी वनप्रभाग के भीरा, मैलानी रेंजों के अलावा  उत्तरखीरी वनप्रभाग के बेलरायां और दुधवा के चंदनचौकी क्षेत्र में दस साल पहले तक इनकी आबादी बढ़ रही थी। इससे यह अक्सर खेतों और जंगलों के किनारे दिखाई पड़ जाते थे लेकिन एकाएक इनकी आबादी घटना शुरू हुई। आज हालत यह हैं कि जंगल के आसपास इक्का-दुक्का ही चौसिंघा दिखाई पड़ते हैं।
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ग्रासलैंड और वेटलैंड मैनेजमेंट से एक तरफ जहां हिरन की बारासिंघा, चीतल, संाभर और पाढ़ा प्रजातियों की आबादी बढ़ी है वहीं चौसिंघा लुप्त होने के कगार पर है। इसके पीछे चौसिंघा हिरनों के संरक्षण के प्रति वन विभाग की उदासीनता और शिकार माना जा रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों की माने तो चौसिंघा हिरन के लिए तराई की धरती और जलवायु बेहद अनुकूल है। बावजूद इसके इनकी संख्या न बढ़ना वन्यजीवों के लिए चिंता और शोध का विषय बन गया है।
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आमतौर से शुष्क जलवायु में मिलने वाले काले हिरनों की आबादी में उत्साहजनक बढ़ोतरी हुई है। यदि चौसिंघा के संरक्षण पर ध्यान दिया जाता तो निश्चय ही जिले की जैवविविधता और समृद्ध होती। साथ ही जिले को हिरनों की सात प्रजातियों को संजोने का गौरव भी मिलता।
पूर्व सदस्य राज्य वन्यजीव सलाहकार परिषद डॉ. वीपी सिंह ने बताया कि वनक्षेत्र घटने और घास के मैदानों के बदलते स्वरूप के कारण चौसिंघा हिरनों के लिए प्राकृतिक आवास का संकट पैदा हो रहा है। इस कारण चौसिंघा जब जंगल के बाहर निकलते हैं तो शिकारियों के हत्थे चढ़ जाते हैं। शिकार के कारण इनकी आबादी लगातार घट रही है।

डीएफओ साउथ खीरी नीरज कुमार ने बताया कि चौसिंघा हिरन के संरक्षण के प्रति वनविभाग पूरी तरह संवेदनशील और सतर्क है। चौसिंघा मिलने वाले क्षेत्रों की लगातार निगरानी कराई जा रही है।
हिरन की खूबसूरत प्रजाति है चौसिंघा
चार सीगाें वाले चौसिंघा हिरन की ऊंचाई करीब दो फुट होती है। मादा के सींग नहीं होते। इनके सींग बारासिंगा की तरह गिरते नहीं। ये वन क्षेत्र के बाहरी हिस्सों व प्राकृतिक जलस्त्रोत वाले स्थानों पर छोटी घास और गेहूं के खेत में रहना पसंद करते हैं। भोजन की तलाश में यह खेतों में आते हैं।

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