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मांगें पूरी कराने के लिए व्यापार मंडल का प्रदर्शन
लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 24 Dec 2014 05:33 PM IST
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जिला उद्योग व्यापार मंडल ने 10 नई वस्तुओं पर मंडी शुल्क लगाए जाने के विरोध में और खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम में व्यापक परिवर्तन की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।
व्यापारियों ने अपनी मांग के संबंध में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित दो अलग-अलग ज्ञापन डीएम को सौंपे। यह प्रदर्शन जिला उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष राकेश मिश्र और संजय गुप्ता के नेतृत्व में किया गया।
प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन में कहा गया कि मिलावट खोरी रोकने को खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम 2006 में केंद्र सरकार ने बनाया था और 2011 में लागू किया था। व्यापारी भी चाहते हैं कि मिलावट खोरी बंद हो।
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कानून ऐसा बने जिसका पालन हो सके। कांग्रेसी सरकार चूंकि रिटेल ट्रेड में एफडीआई लाना चाहती थी, इसलिए इस कानून को यूरोपीय देशों की तरह हूबहू वैसा ही बना दिया है।
व्यापारियों ने मांग की कि इस कानून को भारत के वातावरण और परिस्थितियों के अनुकूल ऐसा बनाया जाए कि व्यापारी उसका पालन कर सकें और मिलावट खोरी रुके। इसके लिए एक कमेटी बनाएं, जिसमें केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हों, उद्योगपति हों और प्रमुख रूप से व्यापारी और उपभोक्ता भी इसमें हों। इस पर फिर से विचार कर संशोधित कानून का रूप दें।
मुख्यमंत्री को दिए ज्ञापन में व्यापारियों ने कहा कि 10 नई वस्तुओं पर लगाया गया मंडी शुल्क तत्काल वापस लिया जाए। मशीन टूल्स पर वैट पांच से बढ़ाकर 13.5 प्रतिशत किए जाने पर विरोध जताते हुए वापस लिए जाने की मांग की। जिला उद्योग व्यापार मंडल ने अपनी मांगों के संबंध में दो घंटे धरना भी दिया।
धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन देने वाले लोगों में जिलाध्यक्ष राकेश मिश्र, सेवक सिंह अजमानी, अशोक तोलानी, संजय गुप्ता, राकेश मोहन गुप्ता, उमेश शुक्ला, अमरजीत सिंह, अमर पाल सिंह, पंकज अग्रवाल, जगदीश शर्मा, सुबोध शुक्ला, कैलाश नाथ विमल मिश्र, रोहित गुप्ता, शिव तोलानी, मनोज मिश्र, रामजी वर्मा, रामजी दीक्षित और दिवाकर मिश्र आदि मौजूद रहे।
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व्यापारियों ने अपनी मांग के संबंध में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित दो अलग-अलग ज्ञापन डीएम को सौंपे। यह प्रदर्शन जिला उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष राकेश मिश्र और संजय गुप्ता के नेतृत्व में किया गया।
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प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन में कहा गया कि मिलावट खोरी रोकने को खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम 2006 में केंद्र सरकार ने बनाया था और 2011 में लागू किया था। व्यापारी भी चाहते हैं कि मिलावट खोरी बंद हो।
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कानून ऐसा बने जिसका पालन हो सके। कांग्रेसी सरकार चूंकि रिटेल ट्रेड में एफडीआई लाना चाहती थी, इसलिए इस कानून को यूरोपीय देशों की तरह हूबहू वैसा ही बना दिया है।
व्यापारियों ने मांग की कि इस कानून को भारत के वातावरण और परिस्थितियों के अनुकूल ऐसा बनाया जाए कि व्यापारी उसका पालन कर सकें और मिलावट खोरी रुके। इसके लिए एक कमेटी बनाएं, जिसमें केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हों, उद्योगपति हों और प्रमुख रूप से व्यापारी और उपभोक्ता भी इसमें हों। इस पर फिर से विचार कर संशोधित कानून का रूप दें।
मुख्यमंत्री को दिए ज्ञापन में व्यापारियों ने कहा कि 10 नई वस्तुओं पर लगाया गया मंडी शुल्क तत्काल वापस लिया जाए। मशीन टूल्स पर वैट पांच से बढ़ाकर 13.5 प्रतिशत किए जाने पर विरोध जताते हुए वापस लिए जाने की मांग की। जिला उद्योग व्यापार मंडल ने अपनी मांगों के संबंध में दो घंटे धरना भी दिया।
धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन देने वाले लोगों में जिलाध्यक्ष राकेश मिश्र, सेवक सिंह अजमानी, अशोक तोलानी, संजय गुप्ता, राकेश मोहन गुप्ता, उमेश शुक्ला, अमरजीत सिंह, अमर पाल सिंह, पंकज अग्रवाल, जगदीश शर्मा, सुबोध शुक्ला, कैलाश नाथ विमल मिश्र, रोहित गुप्ता, शिव तोलानी, मनोज मिश्र, रामजी वर्मा, रामजी दीक्षित और दिवाकर मिश्र आदि मौजूद रहे।