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Lakhimpur Kheri News: वट सावित्री व्रत आज और कल, तीन देवों का मिलेगा आशीर्वाद
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शाहजहांपुर। पति की लंबी उम्र की कामना के लिए वट सावित्री का व्रत सुहागिन महिलाएं सोमवार और मंगलवार को रखेंगी। पुराेहित के अनुसार, वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों का वास होता है। इस व्रत को रखने से महिलाओं के ऊपर तीनों देवताओं का आशीर्वाद बना रहता है।
श्री रुद्र बाला जी धाम के पुजारी पंडित डॉ. कान्हा कृष्ण शुक्ल ने बताया कि महावीर पंचांग में ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि की शुरूआत 26 मई की सुबह 10:54 से होगी। इसका समापन 27 मई को सुबह 8:32 पर होगा। इस अमावस्या पर कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। सूर्य, चंद्र, बुध एक साथ वृष राशि में रहेंगे। इससे त्रिग्रही योग के साथ बुधादित्य योग का भी निर्माण हो रहा है।
इस दिन सुकर्मा शिववास और सर्वार्थ सिद्ध योग का लाभ प्राप्त होगा। शुक्ला ने बताया कि वट वृक्ष एक ओर शिव का रूप माना गया है तो दूसरी ओर पद्म पुराण में इसे भगवान विष्णु का अवतार कहा गया है।
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पूजन की विधि
डॉ.केके शुक्ला ने बताया ने वट सावित्री का व्रत करने वाली महिलाएं सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। इसके बाद पारंपरिक और सुंदर वस्त्र धारण कर खुद का श्रृंगार करें। प्रसाद के लिए सात्विक भोजन तैयार कर कच्चा सूत, जल से भरा कलश, हल्दी, कुमकुम, फूल और पूजन की सभी प्रकार की सामग्री लेकर वट वृक्ष के पास जाएं। शुद्ध जल वट वृक्ष पर चढ़ाएं और उसके समक्ष गाय के देसी घी का दीपक जलाएं, फिर सभी पूजन सामग्री एक-एक करके वट वृक्ष पर अर्पित करें। इसके बाद वृक्ष के चारों ओर 108 या सात परिक्रमा करें। साथ ही चारों ओर सफेद कच्चा सूत बांध लें, फिर वट सावित्री की कथा का पाठ करें, इसके बाद अंतिम चरण में आरती करके पूजा का समापन करें। प्रणाम करके पति की लंबी आयु के लिए प्रार्थना करें।
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श्री रुद्र बाला जी धाम के पुजारी पंडित डॉ. कान्हा कृष्ण शुक्ल ने बताया कि महावीर पंचांग में ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि की शुरूआत 26 मई की सुबह 10:54 से होगी। इसका समापन 27 मई को सुबह 8:32 पर होगा। इस अमावस्या पर कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। सूर्य, चंद्र, बुध एक साथ वृष राशि में रहेंगे। इससे त्रिग्रही योग के साथ बुधादित्य योग का भी निर्माण हो रहा है।
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इस दिन सुकर्मा शिववास और सर्वार्थ सिद्ध योग का लाभ प्राप्त होगा। शुक्ला ने बताया कि वट वृक्ष एक ओर शिव का रूप माना गया है तो दूसरी ओर पद्म पुराण में इसे भगवान विष्णु का अवतार कहा गया है।
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पूजन की विधि
डॉ.केके शुक्ला ने बताया ने वट सावित्री का व्रत करने वाली महिलाएं सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। इसके बाद पारंपरिक और सुंदर वस्त्र धारण कर खुद का श्रृंगार करें। प्रसाद के लिए सात्विक भोजन तैयार कर कच्चा सूत, जल से भरा कलश, हल्दी, कुमकुम, फूल और पूजन की सभी प्रकार की सामग्री लेकर वट वृक्ष के पास जाएं। शुद्ध जल वट वृक्ष पर चढ़ाएं और उसके समक्ष गाय के देसी घी का दीपक जलाएं, फिर सभी पूजन सामग्री एक-एक करके वट वृक्ष पर अर्पित करें। इसके बाद वृक्ष के चारों ओर 108 या सात परिक्रमा करें। साथ ही चारों ओर सफेद कच्चा सूत बांध लें, फिर वट सावित्री की कथा का पाठ करें, इसके बाद अंतिम चरण में आरती करके पूजा का समापन करें। प्रणाम करके पति की लंबी आयु के लिए प्रार्थना करें।