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घर लौटा जांबाज
अमर उजाला ब्यूरो उचौलिया (लखीमपुर खीरी)।
Updated Sun, 09 Oct 2016 11:43 PM IST
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सेना
- फोटो : अमर उजाला
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उड़ी हमले में जख्मी हवलदार श्यामलाल से मिलने वालों का तांता
कश्मीर में गत माह सेना के उड़ी बेस पर हुए आतंकी हमले में घायल कस्बा निवासी सेना में हवलदार श्यामलाल रविवार सुबह घर आ गए। उनके घर आने की खबर पाकर उनके घर दिन भर लोगों का तांता लगा रहा। श्यामलाल के आने से घर में खुशी का माहौल है।
गत 18 सितंबर को कश्मीर के उड़ी में सेना बेस पर हुए आतंकी हमले में उचौलिया निवासी सेना में हवलदार श्यामलाल जख्मी हो गए थे। श्यामलाल ने बताया कि हमला तड़के करीब साढ़े चार बजे हुआ। उस वक्त तंबू में छह लोग थे और नींद में थे। आतंकियों द्वारा ग्रेनेड फेंके जाने लगे। वे लोग तंबू से निकल कर ईंटों की आड़ में जान बचाकर भागे लेकिन आतंकियों द्वारा की गई फायरिंग में उनके बाएं पैर में दो और दाहिने पैर में एक गोली लगी। उनके कैंप के चार लोग हमले में मारे गए। इस बीच सेना की जवाबी कार्रवाई में आतंकी मारे जाने के बाद घायल सैनिकों को अस्पताल ले जाया गया। बताया कि छुट्टी बिताने के बाद उन्हें फिर श्रीनगर के सेना के अस्पताल में भर्ती किया जाएगा। वहां इलाज चलेगा। श्यामलाल के घर पहुंचने पर परिवारवालों की खुशी का ठिकाना न रहा। पिता जवाहर लाल, मां रमारती देवी, दो भाई रमाकांत और अनेग पाल बेहद खुश हैं। पत्नी शशि के मायके में होने की वजह से वह अब तक अपने एक माह के बेटे भी नही देख सके हैं। उनका कहना है कि सेना आतंकियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर रही है।
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कश्मीर में गत माह सेना के उड़ी बेस पर हुए आतंकी हमले में घायल कस्बा निवासी सेना में हवलदार श्यामलाल रविवार सुबह घर आ गए। उनके घर आने की खबर पाकर उनके घर दिन भर लोगों का तांता लगा रहा। श्यामलाल के आने से घर में खुशी का माहौल है।
गत 18 सितंबर को कश्मीर के उड़ी में सेना बेस पर हुए आतंकी हमले में उचौलिया निवासी सेना में हवलदार श्यामलाल जख्मी हो गए थे। श्यामलाल ने बताया कि हमला तड़के करीब साढ़े चार बजे हुआ। उस वक्त तंबू में छह लोग थे और नींद में थे। आतंकियों द्वारा ग्रेनेड फेंके जाने लगे। वे लोग तंबू से निकल कर ईंटों की आड़ में जान बचाकर भागे लेकिन आतंकियों द्वारा की गई फायरिंग में उनके बाएं पैर में दो और दाहिने पैर में एक गोली लगी। उनके कैंप के चार लोग हमले में मारे गए। इस बीच सेना की जवाबी कार्रवाई में आतंकी मारे जाने के बाद घायल सैनिकों को अस्पताल ले जाया गया। बताया कि छुट्टी बिताने के बाद उन्हें फिर श्रीनगर के सेना के अस्पताल में भर्ती किया जाएगा। वहां इलाज चलेगा। श्यामलाल के घर पहुंचने पर परिवारवालों की खुशी का ठिकाना न रहा। पिता जवाहर लाल, मां रमारती देवी, दो भाई रमाकांत और अनेग पाल बेहद खुश हैं। पत्नी शशि के मायके में होने की वजह से वह अब तक अपने एक माह के बेटे भी नही देख सके हैं। उनका कहना है कि सेना आतंकियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर रही है।
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