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बकाया गन्ना मूल्य भुगतान भी नहीं, चीनी का स्टॉक भी कम
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पलिया चीनी मिल के यार्ड में पसरा सन्नाटा।
डीएम की चेतावनी, 30 नवंबर तक भुगतान न किया तो मिलों पर दर्ज होगी रिपोर्ट
लखीमपुर खीरी। जनपद में बजाज ग्रुप की तीन चीनी मिलों गोला, पलिया, खंभारखेड़ा ने किसानों को समय से गन्ना मूल्य भुगतान नहीं किया है, जबकि मिलों में चीनी का स्टॉक भी कम है। बावजूद इसके बकाया गन्ना मूल्य कम नहीं हो रहा है। बकाया न देने वाली मिलों को डीएम ने 30 नवंबर तक का वक्त दिया है। डीएम का कहना है कि इसके बाद मिलों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।
गन्ना एक्ट के मुताबिक, चीनी मिल के क्रय केंद्र पर गन्ना तौल कराने से 14 दिन के अंदर किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान करने का प्रावधान है। इसके बाद भुगतान में जितनी देरी होगी, उतने समय के ब्याज का भुगतान भी चीनी मिलों को करना होगा। कुल नौ चीनी मिलों में से बजाज ग्रुप की गोला, पलिया और खंभारखेड़ा मिलें 14 दिन में भुगतान करना तो दूर एक साल बाद भुगतान कर रही हैं। सीएम समेत आला अधिकारी कई बार कार्रवाई की चेतावनी दे चुके हैं, लेकिन चीनी मिल मालिकों व अध्यासियों पर अब तक कोई खास असर नहीं है।
अब डीएम महेंद्र बहादुर सिंह ने 30 नवंबर के बाद भुगतान न करने वाली मिलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी देकर मिल प्रतिनिधियों व अध्यासियों की चिंता बढ़ा दी है। वहीं पलिया में किसानों द्वारा किए जा रहे आंदोलन से भी मिल प्रबंधन पर दबाव बढ़ा है, जबकि खंभारखेड़ा मिल की गन्ना आपूर्ति किसान संगठनों द्वारा रोके जाने के बाद 30 नवंबर तक भुगतान करने का आश्वासन दिया था। अब इसमें दो दिन शेष हैं, जिसके बाद किसान इन मिलों की गन्ना आपूर्ति को रोक सकते हैं। वहीं डीएम भी एफआईआर दर्ज करा सकते हैं।
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कुल चीनी बिक्री का 85 प्रतिशत कर रहे भुगतान
बजाज ग्रुप की तीनों मिलें गोला, पलिया, खंभारखेड़ा डिफॉल्टर होने की वजह से बैंक भी इनकी सीसीएल लिमिट नहीं बना रहा है। इससे जिला प्रशासन द्वारा नामित अधिकारियों की अभिरक्षा में चीनी का स्टॉक रखा गया है, जिसकी बिक्री से प्राप्त होने वाली कुल रकम को एस्क्रो एकाउंट में जमा कराया जाता है। इसके बाद 15 प्रतिशत धनराशि मिल प्रबंधन को मिलती है और शेष 85 प्रतिशत धनराशि से किसानों को भुगतान किया जाता है। सूत्र बताते हैं कि पलिया मिल पर कुल बकाया के सापेक्ष 60 प्रतिशत ही चीनी स्टॉक बचा है। ऐसे ही खंभारखेड़ा व गोला के पास भी बकाया के सापेक्ष चीनी स्टॉक कम है। लिहाजा नई चीनी बेचकर पुराना भुगतान करने की परिपाटी पड़ चुकी है।
बजाज ग्रुप की मिलों पर बकाया (लाख में)
गोला 28285.95
पलिया 26677.19
खंभारखेड़ा 17838.80
बजाज ग्रुप की तीनों चीनी मिलों द्वारा भुगतान में देरी किए जाने का मामला बरसों से चला आ रहा है, लेकिन अब ज्यादा समय तक ऐसी स्थिति नहीं रहनी चाहिए। इसके लिए मिल के प्रतिनिधियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। 30 नवंबर तक भुगतान न करने पर इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
- महेंद्र बहादुर सिंह, डीएम
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लखीमपुर खीरी। जनपद में बजाज ग्रुप की तीन चीनी मिलों गोला, पलिया, खंभारखेड़ा ने किसानों को समय से गन्ना मूल्य भुगतान नहीं किया है, जबकि मिलों में चीनी का स्टॉक भी कम है। बावजूद इसके बकाया गन्ना मूल्य कम नहीं हो रहा है। बकाया न देने वाली मिलों को डीएम ने 30 नवंबर तक का वक्त दिया है। डीएम का कहना है कि इसके बाद मिलों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।
गन्ना एक्ट के मुताबिक, चीनी मिल के क्रय केंद्र पर गन्ना तौल कराने से 14 दिन के अंदर किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान करने का प्रावधान है। इसके बाद भुगतान में जितनी देरी होगी, उतने समय के ब्याज का भुगतान भी चीनी मिलों को करना होगा। कुल नौ चीनी मिलों में से बजाज ग्रुप की गोला, पलिया और खंभारखेड़ा मिलें 14 दिन में भुगतान करना तो दूर एक साल बाद भुगतान कर रही हैं। सीएम समेत आला अधिकारी कई बार कार्रवाई की चेतावनी दे चुके हैं, लेकिन चीनी मिल मालिकों व अध्यासियों पर अब तक कोई खास असर नहीं है।
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अब डीएम महेंद्र बहादुर सिंह ने 30 नवंबर के बाद भुगतान न करने वाली मिलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी देकर मिल प्रतिनिधियों व अध्यासियों की चिंता बढ़ा दी है। वहीं पलिया में किसानों द्वारा किए जा रहे आंदोलन से भी मिल प्रबंधन पर दबाव बढ़ा है, जबकि खंभारखेड़ा मिल की गन्ना आपूर्ति किसान संगठनों द्वारा रोके जाने के बाद 30 नवंबर तक भुगतान करने का आश्वासन दिया था। अब इसमें दो दिन शेष हैं, जिसके बाद किसान इन मिलों की गन्ना आपूर्ति को रोक सकते हैं। वहीं डीएम भी एफआईआर दर्ज करा सकते हैं।
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कुल चीनी बिक्री का 85 प्रतिशत कर रहे भुगतान
बजाज ग्रुप की तीनों मिलें गोला, पलिया, खंभारखेड़ा डिफॉल्टर होने की वजह से बैंक भी इनकी सीसीएल लिमिट नहीं बना रहा है। इससे जिला प्रशासन द्वारा नामित अधिकारियों की अभिरक्षा में चीनी का स्टॉक रखा गया है, जिसकी बिक्री से प्राप्त होने वाली कुल रकम को एस्क्रो एकाउंट में जमा कराया जाता है। इसके बाद 15 प्रतिशत धनराशि मिल प्रबंधन को मिलती है और शेष 85 प्रतिशत धनराशि से किसानों को भुगतान किया जाता है। सूत्र बताते हैं कि पलिया मिल पर कुल बकाया के सापेक्ष 60 प्रतिशत ही चीनी स्टॉक बचा है। ऐसे ही खंभारखेड़ा व गोला के पास भी बकाया के सापेक्ष चीनी स्टॉक कम है। लिहाजा नई चीनी बेचकर पुराना भुगतान करने की परिपाटी पड़ चुकी है।
बजाज ग्रुप की मिलों पर बकाया (लाख में)
गोला 28285.95
पलिया 26677.19
खंभारखेड़ा 17838.80
बजाज ग्रुप की तीनों चीनी मिलों द्वारा भुगतान में देरी किए जाने का मामला बरसों से चला आ रहा है, लेकिन अब ज्यादा समय तक ऐसी स्थिति नहीं रहनी चाहिए। इसके लिए मिल के प्रतिनिधियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। 30 नवंबर तक भुगतान न करने पर इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
- महेंद्र बहादुर सिंह, डीएम