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Lakhimpur Kheri News: डेंगू से ढाई वर्षीय बच्चे की मौत, स्वास्थ्य विभाग अनजान
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महेवागंज। बाढ़ प्रभावित तहसील निघासन और सीएचसी फूलबेहड़ के गांव ग्रंट-12 में डेंगू से पीड़ित एक ढाई वर्षीय बच्चे की इलाज के दौरान लखनऊ में मौत हो गई। वहीं स्वास्थ्य विभाग मामले से अनजान है।
फूलबेहड़ सीएचसी के ग्रंट-12 गांव निवासी रत्नेश शुक्ला ने बताया कि 13 सितंबर को उनके ढाई वर्षीय बेटे ऋतिक शुक्ला को तेज बुखार आया था। परिजन उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां जांच में रिपोर्ट सामान्य आई। बुखार की दवा दी गई, लेकिन कोई आराम नहीं मिला। दूसरे दिन शहर के एक निजी अस्पताल में दिखाया, वहां भी जांच में कुछ नहीं निकला। दो तीन-दिन तक बुखार की दवाएं चलती रहीं। इस बीच उसकी तबियत बिगड़ती गई।
16 सितंबर को परिजन बच्चे को लखनऊ के एक निजी अस्पताल लेकर गए। रत्नेश ने बताया कि लखनऊ में जांच में डेंगू की पुष्टि हुई। बच्चे को छह दिन वेंटीलेटर पर रखा गया। मंगलावर सुबह ऋतिक की मौत हो गई। बुधवार को शव घर लाकर अंतिम संस्कार कर दिया गया। परिजन ने कहा कि शुरुआती जांच रिपोर्ट में अगर डेंगू के लक्षण पता चल जाते तो बच्चे को बचाया जा सकता था।
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मामला मेरी जानकारी में नहीं है। इससे पहले गांव के कुछ मरीजों में वायरल, मलेरिया के लक्षण मिले थे। टीम लगातार सर्वे और दवाई बांट रही है।
-डाॅ. पवन कुमार, सीएचसी अधीक्षक फूलबेहड़
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फूलबेहड़ सीएचसी के ग्रंट-12 गांव निवासी रत्नेश शुक्ला ने बताया कि 13 सितंबर को उनके ढाई वर्षीय बेटे ऋतिक शुक्ला को तेज बुखार आया था। परिजन उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां जांच में रिपोर्ट सामान्य आई। बुखार की दवा दी गई, लेकिन कोई आराम नहीं मिला। दूसरे दिन शहर के एक निजी अस्पताल में दिखाया, वहां भी जांच में कुछ नहीं निकला। दो तीन-दिन तक बुखार की दवाएं चलती रहीं। इस बीच उसकी तबियत बिगड़ती गई।
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16 सितंबर को परिजन बच्चे को लखनऊ के एक निजी अस्पताल लेकर गए। रत्नेश ने बताया कि लखनऊ में जांच में डेंगू की पुष्टि हुई। बच्चे को छह दिन वेंटीलेटर पर रखा गया। मंगलावर सुबह ऋतिक की मौत हो गई। बुधवार को शव घर लाकर अंतिम संस्कार कर दिया गया। परिजन ने कहा कि शुरुआती जांच रिपोर्ट में अगर डेंगू के लक्षण पता चल जाते तो बच्चे को बचाया जा सकता था।
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मामला मेरी जानकारी में नहीं है। इससे पहले गांव के कुछ मरीजों में वायरल, मलेरिया के लक्षण मिले थे। टीम लगातार सर्वे और दवाई बांट रही है।
-डाॅ. पवन कुमार, सीएचसी अधीक्षक फूलबेहड़