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Lakhimpur Kheri News: तराई से म्यामार, चीन और हांगाकांग तक होती है कछुओं की तस्करी

Thu, 01 Dec 2022 08:00 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 01 Dec 2022 08:00 AM IST
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Turtles are smuggled from Terai to Myanmar, China and Hong Kong
कछुआ - फोटो : LAKHIMPUR
लखीमपुर खीरी। तराई का निघासन क्षेत्र कछुआ तस्करी के लिए बदनाम हो रहा है। पिछले कुछ वर्षों में पकड़े गए कछुआ तस्करों और उनके कब्जे से बड़े पैमाने पर बरामद हुए कछुओं से यह बात साफ हो गई है कि यहां से कछुओं की तस्करी बांग्लादेश और म्यांमार के रास्ते चीन और हांगकांग तक होती है। एसटीएफ इसी तरह का इनपुट मिलने के बाद निघासन-ढखेरवा रोड पर बिहार के एक तस्कर को 155 कछुओं के साथ पकड़ने में कामयाब हुई है।
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इससे पहले भी जिला खीरी और राज्य के दूसरे हिस्सों में पकड़े गए कछुआ तस्करों की संलिप्तता निघासन क्षेत्र के लोगों से पाई गई। इससे पता चला कि यहां के कछुआ शिकारियों के तार अंतरराष्ट्रीय तस्करों से जुड़े हुए हैं। करीब पांच साल पहले सीतापुर जिले में हरगांव के पास एसटीएफ टीम ने बड़ी संख्या में कछुओं के साथ तीन तस्करों को दबोचा था। यह तीनों तस्कर निघासन तहसील क्षेत्र के निवासी थे। पूछताछ में पता चला था वे इन कछुओं को पश्चिम बंगाल के एक बड़े कछुआ तस्कर के पास लेकर जा रहे थे। जहां इन कछुओं के बदले मोटी रकम मिलने वाली थी।
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11 प्रजातियों के कछुओं का होता है अवैध कारोबार
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक बताते हैं कि भारत में 29 प्रजातियों के कछुए पाए जाते हैं। इनमें से 15 प्रजातियां उत्तर प्रदेश में मिलती हैं। इनमें से 11 प्रजातियों के कछुओं का अवैध व्यापार होता है। इन कछुओं को दो वर्गों शाफ्ट सेल (मुलायम कवच) और हार्ड सेल (कठोर कवच) में वर्गीकृत किया गया है। उत्तर प्रदेश में यह कछुए यमुना, चंबल, गंगा, गोमती, घाघरा और गण्डक नदियों के अलावा इनकी सहायक नदियों, झीलों और तालाबों में बहुतायत से मिलते हैं।
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कछुए नदियों के पानी को स्वच्छ रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए इन्हें जलाशयों का सफाईकर्मी भी कहा जाता है। इनकी तस्करी मांस खाने, पालने और कछुए की झिल्ली को सुखाकर शक्तिवर्धक दवा बनाने के लिए की जाती है। एशिया के कई देशों में यहां के कछुओं की भारी मांग है।

‘स्पेशल टास्क फोर्स ने मंगलवार शाम बिहार के एक कछुआ तस्कर को निघासन-ढखेरवा रोड पर गिरफ्तार किया है। उसके पास से 155 कछुए बरामद हुए हैं। तराई से कछुओं की तस्करी को लेकर वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो काफी गंभीर है। स्थानीय स्तर पर कछुओं के शिकार और तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण के प्रयास किए जा रहे हैं।’
- संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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