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तुंगा की मौत से हाथियों की सेहत की निगरानी पर उठ रहे सवाल

Sat, 03 Sep 2022 12:26 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 03 Sep 2022 12:26 AM IST
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Tunga's death raises questions on monitoring of elephants' health
मादा हाथी तुंगा (फाइल फोटो)
दुधवा में चार महीने के अंदर हो चुकी है दो हाथियों की मौत
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दुधवा प्र्रशासन ने लिया अतिरिक्त सतर्कता बरतने का निर्णय
लखीमपुर खीरी। कर्नाटक से चार साल पहले अपनी मां टरेसा के साथ आई मादा हाथी तुंगा की मौत से दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन सकते में है। चार माह के भीतर दो हाथियों की मौत से दुधवा में पालतू राजकीय हाथियों की देखरेख और सेहत की निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं। कुछ साल पहले दुधवा में नर हाथी बटालिक की भी बीमारी से मौत हो गई थी।
दुधवा में मौजूदा समय में पालतू राजकीय हाथियों की कुल संख्या 24 है। पहले यह संख्या 26 थी। तुुंगा की मौत से पहले इसी साल चार मई को काशी डिवीजन से लाए गए नर हाथी मिथुन की मौत हो गई थी। मिथुन की उम्र करीब 50 साल थी और वह अपनी उम्र पूरी कर चुका था। इससे दुधवा को खास नुकसान नहीं हुआ था, लेकिन पहले 2019 में युवा नर हाथी बटालिक और अब युवा मादा हाथी तुंगा की मौत से दुधवा टाइगर रिजर्व को तगड़ा झटका लगा है। युवा हाथियों की मौत के बाद दुधवा टाइगर रिजर्व ने अतिरिक्त सतर्कता बरतने का निर्णय लिया है।
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चार बेस कैंपों में होती है राजकीय हाथियों की देखरेख
दुधवा टाइगर रिजर्व की राजकीय सेवा में रत पालतू हाथियों को चार बेस कैंपों में रखकर उनकी देखभाल की जाती है। इन हाथियों की सेवा के लिए महावतों के अलावा चारा कटर भी हैं। सभी बेस कैंप में हाथियों की मेस भी है। इन हाथियों से वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जंगल की पेट्रोलिंग का काम लिया जाता है। इसके अलावा यह हाथी मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने में भी मदद करते हैं। कुछ हाथी सैलानियों को जंगल भ्रमण कराने का काम करते हैं। सैलानी हाथी पर सवार होकर जंगल भ्रमण करने में रोमांच का अनुभव करते हैं।
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कर्नाटक से आए दस हाथियों से बढ़ा दुधवा के हाथियों का कुनबा
वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पेट्रोलिंग करने, सैलानियों को जंगल भ्रमण कराने और अन्य राजकीय कार्यों के लिए पांच मई 1918 को कर्नाटक के बांदीपुर नेशनल पार्क से दस हाथी लाए गए थे। कर्नाटक से लाए गए हाथियों में अमृता, भास्कर, किरण, पार्वती, डायना, टरेशा, तुंगा, नकुल और काविनी शामिल थे। तुंगा टरेशा की बच्ची थी, जिसकी 31 अगस्त को बीमारी से मौत हो गई है।
ऐसे होती है राजकीय हाथियों के स्वास्थ्य की देखभाल
हाथियों की सेहत की देखभाल के लिए एक पशु चिकित्सक तैनात है, लेकिन कम से कम दो और पशु चिकित्सकों की जरूरत महसूस की जा रही है। दुधवा टाइगर रिजर्व में हाथियों की सेहत की देखभाल करने वाले पशु चिकित्सक डॉ. दया शंकर का कहना है कि दुधवा के हाथियों की मेडिकल फाइल बनाई गई है। इन हाथियों की नियमित जांच की जाती है। समय समय पर डीवार्मिंग के लिए उन्हें दवाएं दी जाती हैं। इसके अलावा मौसमी बीमारियों से बचाने के लिए पालतू हाथियों को समय-समय पर दवाएं दी जाती हैं। इनके रक्त और मल, मूत्र की जांच भी समयानुसार की जाती है। तुंगा की मौत के बाद सभी हाथियों के रक्त के नमूने लेकर जांच के लिए आईवीआरआई भेजे गए हैं।

पालतू हाथियों के स्वास्थ्य की देखभाल बेहतर ढंग से की जा रही है। हाथियों के भोजन और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। इनकी सेहत की देखभाल के लिए दुधवा टाइगर रिजर्व में एक पशु चिकित्सक तैनात है। जरूरत पड़ने पर अन्य विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की मदद भी ली जाती है।
- संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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