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आखिरी दिन ट्रेजरी में करीब 200 करोड़ का उपभोग
लखीमपुर खीरी।
Updated Tue, 31 Mar 2015 08:30 PM IST
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गन्ना समितियों के चुनाव और विभिन्न सरकारी कार्र्यक्रमों के बीच मार्च क्लोजिंग में मंगलवार को विकास भवन के कार्यालयों में लेखा लिपिक व्यस्त दिखाई दिए। कोषागार कार्यालय में सुबह से लेकर देर शाम तक विभिन्न फाइलों के गट्ठर लगे रहे, जिससे करीब 200 करोड़ बजट के उपभोग का आंकलन किया जा रहा है। वहीं बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग का करीब 60 लाख रुपया सरेंडर करना पड़ा।
सीडीओ नीतीश कुमार ने बताया कि मनरेगा में बजट समाप्त होने के चलते कुछ भुगतान नहीं हो सका है, जिसे अगले वित्त वर्ष में भुगतान किया जाएगा। समाज कल्याण विभाग में लाखों का बजट 31 मार्च को शासन से प्राप्त हुआ, जिसके बाद अफरा-तफरी मच गई। परियोजना निदेशक डॉ दिनेश सिंह ने बताया कि लगभग उपभोग किया जा चुका है। वहीं ट्रेजरी के सभी काउंटरों पर व्यस्तता दिखाई दी। काउंटर के दूसरी ओर खड़े विभिन्न विभागों के कर्मचारी अपना काम जल्दी कराने की फिराक में थे। ट्रेजरी के कर्मचारियों के चेहरे पर थकावट और खीझ दिखाई दी। बैंकों में भी अधिकांश कर्मचारी कंप्यूटरों से चिपके दिखाई दिए। लेन-देन निपटाने के साथ ही खातों में ब्याज लगाने और ऋण वसूली आदि का हिसाब किताब लगाया जा रहा था। व्यस्तता इतनी कि कर्मचारियों को बात करने तक की फुरसत नहीं थी। 31 मार्च को सरकारी कार्यालयों के कर्मचारी दोहरे बोझ से जूझ रहे थे।
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सीडीओ नीतीश कुमार ने बताया कि मनरेगा में बजट समाप्त होने के चलते कुछ भुगतान नहीं हो सका है, जिसे अगले वित्त वर्ष में भुगतान किया जाएगा। समाज कल्याण विभाग में लाखों का बजट 31 मार्च को शासन से प्राप्त हुआ, जिसके बाद अफरा-तफरी मच गई। परियोजना निदेशक डॉ दिनेश सिंह ने बताया कि लगभग उपभोग किया जा चुका है। वहीं ट्रेजरी के सभी काउंटरों पर व्यस्तता दिखाई दी। काउंटर के दूसरी ओर खड़े विभिन्न विभागों के कर्मचारी अपना काम जल्दी कराने की फिराक में थे। ट्रेजरी के कर्मचारियों के चेहरे पर थकावट और खीझ दिखाई दी। बैंकों में भी अधिकांश कर्मचारी कंप्यूटरों से चिपके दिखाई दिए। लेन-देन निपटाने के साथ ही खातों में ब्याज लगाने और ऋण वसूली आदि का हिसाब किताब लगाया जा रहा था। व्यस्तता इतनी कि कर्मचारियों को बात करने तक की फुरसत नहीं थी। 31 मार्च को सरकारी कार्यालयों के कर्मचारी दोहरे बोझ से जूझ रहे थे।
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