{"_id":"6849c6bceb6cd2893f0a859f","slug":"tourists-thrilled-to-see-tiger-in-kishanpur-sanctuary-lakhimpur-news-c-120-1-sbly1008-147956-2025-06-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lakhimpur Kheri News: किशनपुर अभयारण्य में बाघ के दीदार, सैलानी रोमांचित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lakhimpur Kheri News: किशनपुर अभयारण्य में बाघ के दीदार, सैलानी रोमांचित
Wed, 11 Jun 2025 11:41 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 11 Jun 2025 11:41 PM IST
विज्ञापन
किशनपुर अभयारण्य में चहलकदमी करता बाघ। स्रोत : सैलानी
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर अभयारण्य में बुधवार को सुबह की पाली में फायर लाइन किनारे चहलकदमी करते बाघ को देख सैलानी रोमांच से भर उठे। उन्होंने बाघ की तस्वीर को कैमरे में कैद कर दुधवा की विजिटर बुक में दर्ज किया।
इस साल दुधवा नेशनल पार्क के द्वार सैलानियों के लिए 15 जून को बंद कर दिए जाएंगे, जो नवंबर में खोले जाएंगे। हालांकि, पिछले साल पर्यटन सत्र को बढ़ाकर 25 जून किया गया था, लेकिन इस बार ऐसा कोई आदेश नहीं है। पिछले वर्ष की अपेक्षा अबकी पर्यटन सत्र में 16 फीसदी देसी व 65 फीसदी विदेशी सैलानी दुधवा में ज्यादा आए हैं। जंगल में स्वछंद विचरण करने वाले बाघ, कुलांचे भरते हिरणों के झुंड सैलानियों को खूब लुभाते रहे।
इन्हीं वजहों से दुधवा का भ्रमण करने आने वाले सैलानियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। हालांकि, पर्यटन सत्र के दौरान सैलानियों को मुसीबतें भी झेलनी पड़ी। दुधवा की रानी कही जाने वाली बेलडंडा की बाघिन के इलाज के लिए किशनपुर अभयारण्य का पर्यटन एक सप्ताह तक बंद रहा था।
विज्ञापन
-- -बुधवार को 110 सैलानियों ने किया जंगल का भ्रमण-- -
चार दिन बाद दुधवा के द्वार बंद हो जाएंगे। इससे पहले बुधवार को किशनपुर अभयारण्य में दोनों पालियों में सैलानियों की भीड़ उमड़ी। 18 जिप्सियों में सवार करीब 110 सैलानियों ने जंगल का भ्रमण किया। इस दौरान फायर लाइन के किनारे चहलकदमी करते बाघ को देख सैलानी एकटक उसे निहारते रहे। उन्होंने इसकी तस्वीर कैमरे में जैसे ही कैद की, वह जंगल में गुम हो गया।
-- -- जैवविविधता के लिए जाना जाता है दुधवा-- --
दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी डॉ. एच राजामोहन ने बताया कि दुधवा का जंगल अपनी जैवविविधता के लिए जाना जाता है। जंगल से सटकर बहने वाली शारदा नदी का शीतल जल, हरा-भरा जंगल, ऊंचे और घने घास के मैदान बाघों के लिए अनुकूल प्राकृतवास उपलब्ध कराते हैं। यहां भोजन के रूप में प्रचुर मात्रा में हिरण, नीलगाय, जंगली सूअर आदि मौजूद हैं। यह बाघों के लिए पसंदीदा प्रजनन क्षेत्र भी है।
विज्ञापन
इस साल दुधवा नेशनल पार्क के द्वार सैलानियों के लिए 15 जून को बंद कर दिए जाएंगे, जो नवंबर में खोले जाएंगे। हालांकि, पिछले साल पर्यटन सत्र को बढ़ाकर 25 जून किया गया था, लेकिन इस बार ऐसा कोई आदेश नहीं है। पिछले वर्ष की अपेक्षा अबकी पर्यटन सत्र में 16 फीसदी देसी व 65 फीसदी विदेशी सैलानी दुधवा में ज्यादा आए हैं। जंगल में स्वछंद विचरण करने वाले बाघ, कुलांचे भरते हिरणों के झुंड सैलानियों को खूब लुभाते रहे।
विज्ञापन
इन्हीं वजहों से दुधवा का भ्रमण करने आने वाले सैलानियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। हालांकि, पर्यटन सत्र के दौरान सैलानियों को मुसीबतें भी झेलनी पड़ी। दुधवा की रानी कही जाने वाली बेलडंडा की बाघिन के इलाज के लिए किशनपुर अभयारण्य का पर्यटन एक सप्ताह तक बंद रहा था।
विज्ञापन
चार दिन बाद दुधवा के द्वार बंद हो जाएंगे। इससे पहले बुधवार को किशनपुर अभयारण्य में दोनों पालियों में सैलानियों की भीड़ उमड़ी। 18 जिप्सियों में सवार करीब 110 सैलानियों ने जंगल का भ्रमण किया। इस दौरान फायर लाइन के किनारे चहलकदमी करते बाघ को देख सैलानी एकटक उसे निहारते रहे। उन्होंने इसकी तस्वीर कैमरे में जैसे ही कैद की, वह जंगल में गुम हो गया।
दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी डॉ. एच राजामोहन ने बताया कि दुधवा का जंगल अपनी जैवविविधता के लिए जाना जाता है। जंगल से सटकर बहने वाली शारदा नदी का शीतल जल, हरा-भरा जंगल, ऊंचे और घने घास के मैदान बाघों के लिए अनुकूल प्राकृतवास उपलब्ध कराते हैं। यहां भोजन के रूप में प्रचुर मात्रा में हिरण, नीलगाय, जंगली सूअर आदि मौजूद हैं। यह बाघों के लिए पसंदीदा प्रजनन क्षेत्र भी है।