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और मारा गया अत्याचार, अनाचार और अहंकार का प्रतीक रावण
लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 22 Oct 2015 10:14 PM IST
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अत्याचार, अनाचार, और अहंकार के प्रतीक रावण के वध के साथ पूरा वातावरण भगवान राम के जयकारों से गूंज उठा। असत्य पर सत्य की और बुराई पर अच्छाई की जीत हुई। शहर के ऐतिहासिक रामलीला मेले में विजयादशमी के दिन गुरुवार को कुंभकर्ण, मेघनाद और रावण के वध का भव्य मंचन किया गया। रामलीला के इस मुख्य प्रसंग का मंचन देखने को जिले भर से भीड़ जुटी। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि मेला मैदान में तिल रखने को जगह नहीं बची। मेला मैदान के बीच से निकलने वाले रास्ते पर आवागमन रोक दिया गया।
गुरुवार की रामलीला में हनुमान जी, मां सीता का पता लगाने लंका जाते हैं। वहां उनकी विभीषण से भेंट होती है। उन्हीं से सीता जी के अशोक वाटिका में होने का पता चलता है। हनुमान जी अशोक वाटिका में सीता जी से भेंटकर उन्हें श्रीराम की निशानी के रूप में उनकी मुद्रिका देते हैं। इसके बाद सीता जी की अनुमति से हनुमान जी अशोक वाटिका में फल खाते हुए उसे पूरा उजाड़ डालते हैं। मेघनाद द्वारा हनुमान को ब्रह्मास्त्र से बांधे जाने और लंका दहन की लीला का मंचन किया गया। इसके बाद राम सेतु बांधने और लंका पर चढ़ाई की लीलाएं हुईं। लक्ष्मण का शक्ति बाण लगने से घायल होने और हनुमान का संजीवनी लाना। इसके बाद कुंभकर्ण और फिर मेघनाद का वध आदि लीलाओं का मंचन हुआ।
अंत में श्रीराम और रावण के बीच भीषण युद्ध हुआ। विभीषण द्वारा रावण की मृत्यु के रहस्य को बताने पर राम एक साथ 31 बाण छोड़ते हैं। इससे रावण के दस सिर और बीस भुजाएं कट जाती हैं और एक बाण रावण की नाभि में लगता है जिससे उसके नाभि का अमृत सूख जाता है और रावण की मौत हो जाती है। रावण धू-धू कर जल उठता है। रावण के जलते ही पूरा वातावरण भगवान राम के जयकारों से गूंज उठता है।
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देवता और अप्सराएं प्रभु राम पर फूलों की वर्षा करते हैं।
विजयादशमी पर हुई शस्त्रों की पूजा
लखीमपुर खीरी। विजयादशमी के मौके पर क्षत्रियों ने अपने घरो में शस्त्र पूजा की तो महिलाओं ने घरों में भगवान राम की पूजा अर्चना की। गाय के गोबर से गौर का निर्माण कर सौभाग्य का प्रतीक सिंदूर अर्पित किया। साथ ही अपने सौभाग्य और परिवार के सुख समृद्धि की कामना की।
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गुरुवार की रामलीला में हनुमान जी, मां सीता का पता लगाने लंका जाते हैं। वहां उनकी विभीषण से भेंट होती है। उन्हीं से सीता जी के अशोक वाटिका में होने का पता चलता है। हनुमान जी अशोक वाटिका में सीता जी से भेंटकर उन्हें श्रीराम की निशानी के रूप में उनकी मुद्रिका देते हैं। इसके बाद सीता जी की अनुमति से हनुमान जी अशोक वाटिका में फल खाते हुए उसे पूरा उजाड़ डालते हैं। मेघनाद द्वारा हनुमान को ब्रह्मास्त्र से बांधे जाने और लंका दहन की लीला का मंचन किया गया। इसके बाद राम सेतु बांधने और लंका पर चढ़ाई की लीलाएं हुईं। लक्ष्मण का शक्ति बाण लगने से घायल होने और हनुमान का संजीवनी लाना। इसके बाद कुंभकर्ण और फिर मेघनाद का वध आदि लीलाओं का मंचन हुआ।
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अंत में श्रीराम और रावण के बीच भीषण युद्ध हुआ। विभीषण द्वारा रावण की मृत्यु के रहस्य को बताने पर राम एक साथ 31 बाण छोड़ते हैं। इससे रावण के दस सिर और बीस भुजाएं कट जाती हैं और एक बाण रावण की नाभि में लगता है जिससे उसके नाभि का अमृत सूख जाता है और रावण की मौत हो जाती है। रावण धू-धू कर जल उठता है। रावण के जलते ही पूरा वातावरण भगवान राम के जयकारों से गूंज उठता है।
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विजयादशमी पर हुई शस्त्रों की पूजा
लखीमपुर खीरी। विजयादशमी के मौके पर क्षत्रियों ने अपने घरो में शस्त्र पूजा की तो महिलाओं ने घरों में भगवान राम की पूजा अर्चना की। गाय के गोबर से गौर का निर्माण कर सौभाग्य का प्रतीक सिंदूर अर्पित किया। साथ ही अपने सौभाग्य और परिवार के सुख समृद्धि की कामना की।