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आमदनी बढ़ाने के लिए ‘देशी मिठाई’ में मिलावट
लखीमपुर खीरी।
Updated Mon, 23 Mar 2015 05:30 PM IST
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गुड़ खाने वालों सावधान हो जाओ, क्योंकि जिस ‘देशी मिठाई’ को आप खा रहे हैं, वह आपकी सेहत के लिए घातक हो सकती है। मुंह में रस घोलने वाली यह मिठाई भी मिलावट का शिकार हो गई है। वजह इसमें मार्बल डस्ट का प्रयोग हो रहा है। जिले में यह कारोबार पिछले कई सालों से अवैध रूप से हो रहा है। मार्बल डस्ट को सिंहज राब कहते हैं। इसकी 50 किलो की बोरी गुड़ बनाने वालों को 160 से 180 रुपये में मिल जाती है।
बाजार में शुद्ध गुड़ का रेट 2400 रुपये प्रति क्विंटल तक है। मार्बल डस्ट तीन रुपये प्रति किलो है।
बनाने की विधि
चॉक पर गुड़ घोटने के दौरान इसमें 10 से 15 फीसदी मार्बल डस्ट को मिला दिया जाता है। एक दिन में गुड़ बेल मालिक 12 क्विंटल या इससे भी ज्यादा गुड़ तैयार करते हैं। इससे उसे एक दिन में ही मिलावट कर अतिरिक्त मुनाफा होता है।
वजह
गुड़ में मिलावट की वजह इसकी डिमांड बढ़ना है। यह डिमांड कच्ची दारू बनाने वालों की वजह से है जो इसका प्रयोग अब जमकर रहे हैं। कच्ची शराब बनाने में संतरा और गुड़ का प्रयोग होता है लेकिन संतरा हर सीजन में आसानी से मिलता नहीं सो गुड़ एक अच्छा विकल्प है। बारिश में इसकी डिमांड ज्यादा होती है।
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इस्तेमाल से नुकसान
मिलावट वाले गुड़ के इस्तेमाल से कई तरह की बीमारियां हो जाती हैं। डॉक्टरों के मुताबिक ऐसा गुड़ खाने वाले की सांस फूलने लगती है तथा वह पेट की कई बीमारियों से पीड़ित हो सकता है। पेट में स्टोन बन जाते हैं जो असहनीय दर्द देते हैं।
कहां-कहां हो रहा कारोबार
जिले के निघासन, तिकुनियां, बेहजम, धौरहरा, गोला, मितौली, फरधान, कैमहरा, मोहम्मदी, कस्ता, पलिया में मिलावटी गुड़ का कारोबार बड़े पैमाने पर हो रहा है, लेकिन इनकी आढ़त निघासन, रकेहटी, तिकुनियां, बेलरायां और गोदाम पलिया, निघासन, चंदनचौकी में हैं।
ऐसे करें पहचान
मार्बल डस्ट मिला गुड़ खाने से दांतों में किसकन होती है। इसका स्वाद भी कुछ फीका होता है। मिलावटी गुड़ को कांच के गिलास में घोलकर एक घंटे के लिए रख दिया जाए तो सफेद रंग की मार्बल डस्ट नीचे बैठ जाती है जबकि गुड़ पानी में घुल जाता है।
मार्बल डस्ट अखाद्य पदार्थ है। इसको मिलाकर गुड़ बनाना और बेचना कानूनन अपराध है, ऐसे लोगों के खिलाफ शिकायत मिलने पर उनको पकड़ा जाएगा और मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई होगी।
-एसके सिंह, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी
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बाजार में शुद्ध गुड़ का रेट 2400 रुपये प्रति क्विंटल तक है। मार्बल डस्ट तीन रुपये प्रति किलो है।
बनाने की विधि
चॉक पर गुड़ घोटने के दौरान इसमें 10 से 15 फीसदी मार्बल डस्ट को मिला दिया जाता है। एक दिन में गुड़ बेल मालिक 12 क्विंटल या इससे भी ज्यादा गुड़ तैयार करते हैं। इससे उसे एक दिन में ही मिलावट कर अतिरिक्त मुनाफा होता है।
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वजह
गुड़ में मिलावट की वजह इसकी डिमांड बढ़ना है। यह डिमांड कच्ची दारू बनाने वालों की वजह से है जो इसका प्रयोग अब जमकर रहे हैं। कच्ची शराब बनाने में संतरा और गुड़ का प्रयोग होता है लेकिन संतरा हर सीजन में आसानी से मिलता नहीं सो गुड़ एक अच्छा विकल्प है। बारिश में इसकी डिमांड ज्यादा होती है।
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इस्तेमाल से नुकसान
मिलावट वाले गुड़ के इस्तेमाल से कई तरह की बीमारियां हो जाती हैं। डॉक्टरों के मुताबिक ऐसा गुड़ खाने वाले की सांस फूलने लगती है तथा वह पेट की कई बीमारियों से पीड़ित हो सकता है। पेट में स्टोन बन जाते हैं जो असहनीय दर्द देते हैं।
कहां-कहां हो रहा कारोबार
जिले के निघासन, तिकुनियां, बेहजम, धौरहरा, गोला, मितौली, फरधान, कैमहरा, मोहम्मदी, कस्ता, पलिया में मिलावटी गुड़ का कारोबार बड़े पैमाने पर हो रहा है, लेकिन इनकी आढ़त निघासन, रकेहटी, तिकुनियां, बेलरायां और गोदाम पलिया, निघासन, चंदनचौकी में हैं।
ऐसे करें पहचान
मार्बल डस्ट मिला गुड़ खाने से दांतों में किसकन होती है। इसका स्वाद भी कुछ फीका होता है। मिलावटी गुड़ को कांच के गिलास में घोलकर एक घंटे के लिए रख दिया जाए तो सफेद रंग की मार्बल डस्ट नीचे बैठ जाती है जबकि गुड़ पानी में घुल जाता है।
मार्बल डस्ट अखाद्य पदार्थ है। इसको मिलाकर गुड़ बनाना और बेचना कानूनन अपराध है, ऐसे लोगों के खिलाफ शिकायत मिलने पर उनको पकड़ा जाएगा और मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई होगी।
-एसके सिंह, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी