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बाघों ने अब साइफन पर डाला डेरा
बिजुआ
Updated Thu, 07 Jan 2016 10:58 PM IST
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जंगल के राजा को अपने घर से निकले एक महीने हुआ, लेकिन वह घर वापस जाने को तैयार नही हैं। उधर वन महकमे के अफसर रोज पगमार्क देखकर वापस हो रहे हैं। पहले तो एक बाघ के पगमार्क मिल रहे थे, गुरुवार को जोड़े के पगमार्क साइफन के पास देखे गए। खुद ट्रेनी आईएफएस वासनी प्रकाश ने पगमार्क देखकर तस्दीक कर दी कि बाघ जोड़े में हैं।
दिन-ब-दिन बाघ के कदम जंगल से दूर होते जा रहे हैं। पहले डिमरौल, सेमरिया में बाघ की मौजूदगी की तस्दीक हुई, इसी बीच बिजुआ और मूड़ाबुजुर्ग के बीच खेतों में भी बाघ के कदमों के निशान नजर आए, तब तक वन विभाग इसे बाघ मानने को तैयार ही नही था। पिछले हफ्तें एक नीलगाय के शिकार की पुष्टि के साथ ही बाघ की मौजूदगी वन विभाग ने मान ली। दो दिन से बाघ बिजुआ इलाके से पूरब बरौंछा पार करके बस्तौला की तरफ आ गया। बुधवार को एक नीलगाय का अध खाया शव नंगाराम के खेत में मिला, इसी बीच उसके पगमार्क बस्तौली के एसपी फ्यूल के सामने तक देखे गए। गुरुवार को खुद ट्रेनी अफसर वासिनी प्रकाश बस्तौली पहुंचीं। टीम में शामिल फारेस्टर एसएस चौहान, नागेंद्र पांडेय, वनरक्षक ब्रजेश शुक्ला के साथ वॉचर भी थे। इस बार लोकेशन दो बाघों के एक साथ टहलने की मिली, गुरुवार को बाघ के पगमार्क एसपी फ्यूल के किनारे जानकी के खेत से होकर पाल सिंह के खेतों से होते हुए गुलरिया की ओर जाते मिले। हालांकि शाम को बाघ के पगमार्क इस जगह से तीन किमी दूर बस्तौला साइफन के किनारे खेतों में मिले। इस साइफन के पास नहर में भरे पानी और घास को बाघों के जोड़े ने अपना ठिकाना बनाया है।
ग्रामीणों को किया आगाह
वन विभाग ने आसपास के ग्रामीणों को अलर्ट करने के साथ एक टीम को बस्तौली पर ही कैंप करने का आदेश दिया है।
भीरा से गोला रेंज तक हैं कदमों के निशान
जिस बाघ के पगमार्क गुरुवार को मिले हैं वह भीरा रेंज से निकलकर गोला रेंज तक क्षेत्र में हैं। फिलहाल अभी भीरा रेंज के ही अधिकारी और कर्मचारी पहुंचे हैं।
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दिन-ब-दिन बाघ के कदम जंगल से दूर होते जा रहे हैं। पहले डिमरौल, सेमरिया में बाघ की मौजूदगी की तस्दीक हुई, इसी बीच बिजुआ और मूड़ाबुजुर्ग के बीच खेतों में भी बाघ के कदमों के निशान नजर आए, तब तक वन विभाग इसे बाघ मानने को तैयार ही नही था। पिछले हफ्तें एक नीलगाय के शिकार की पुष्टि के साथ ही बाघ की मौजूदगी वन विभाग ने मान ली। दो दिन से बाघ बिजुआ इलाके से पूरब बरौंछा पार करके बस्तौला की तरफ आ गया। बुधवार को एक नीलगाय का अध खाया शव नंगाराम के खेत में मिला, इसी बीच उसके पगमार्क बस्तौली के एसपी फ्यूल के सामने तक देखे गए। गुरुवार को खुद ट्रेनी अफसर वासिनी प्रकाश बस्तौली पहुंचीं। टीम में शामिल फारेस्टर एसएस चौहान, नागेंद्र पांडेय, वनरक्षक ब्रजेश शुक्ला के साथ वॉचर भी थे। इस बार लोकेशन दो बाघों के एक साथ टहलने की मिली, गुरुवार को बाघ के पगमार्क एसपी फ्यूल के किनारे जानकी के खेत से होकर पाल सिंह के खेतों से होते हुए गुलरिया की ओर जाते मिले। हालांकि शाम को बाघ के पगमार्क इस जगह से तीन किमी दूर बस्तौला साइफन के किनारे खेतों में मिले। इस साइफन के पास नहर में भरे पानी और घास को बाघों के जोड़े ने अपना ठिकाना बनाया है।
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ग्रामीणों को किया आगाह
वन विभाग ने आसपास के ग्रामीणों को अलर्ट करने के साथ एक टीम को बस्तौली पर ही कैंप करने का आदेश दिया है।
भीरा से गोला रेंज तक हैं कदमों के निशान
जिस बाघ के पगमार्क गुरुवार को मिले हैं वह भीरा रेंज से निकलकर गोला रेंज तक क्षेत्र में हैं। फिलहाल अभी भीरा रेंज के ही अधिकारी और कर्मचारी पहुंचे हैं।
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